हाल में ही सीएम नीतीश कुमार ने दिवंगत रामविलास पासवान की दूसरी शादी का जिक्र करते हुए उनके पुत्र चिराग पासवान को बच्चा कह दिया था. इसको लेकर अब सूबे में सियासी घमासान मच गया है. भारतीय जनता पार्टी को सीएम नीतीश कुमार का यह बयान रास नहीं आ रहा है. भाजपा ने कहा कि सीएम नीतीश बहस से भाग रहे हैं, इसलिए इस तरह के बयान दे रहे हैं. उन्होंने दिवंगत रामविलास पासवान के बारे में जो अपमानजनक बात कही, उसके लिए भी सीएम को माफी मांगनी चाहिए.
बिहार भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद ने गुरुवार को वीडियो संदेश जारी कर कहा, ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार पार्ट टाइम मुख्यमंत्री और फुल टाइम गृह मंत्री हो चुके हैं. उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर सीएम का पद डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को सौंप रखा है. जब भी राजनीतिक बात होती है, उनसे कुछ सवाल पूछा जाता है तो वे अलग-अलग तरह से बयानबाजी कर रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.
निखिल आनंद ने कहा, हाल ही में सीएम नीतीश ने बिहार के सम्मानित नेता रहे दिवंगत रामविलास पासवान को लेकर अपमाजनक टिप्पणी की थी. अगर सीएम पद पर रहते हुए नीतीश कुमार इस तरह के व्यक्तिगत बयान दे रहे हैं, तो लगता है कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. उन्हें किसी मनोविज्ञानी से परामर्श लेनी चाहिए और दिवंगत रामविलास पासवान के अपमान पर उन्हें माफी मांगनी चाहिए.
बीजेपी नेता ने कहा, नीतीश कुमार हर किसी को बच्चा-बच्चा कहते हुए फिर रहे हैं. राजनीति में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता है. देश के कई राज्यों में कम उम्र के मुख्यमंत्री हैं और उनसे वरिष्ठ लोग उनके ही मंत्रिमंडल में मंत्री हैं. देश के कई प्रधानमंत्री युवा रहे और बुजुर्ग मंत्री के तौर पर काबिज होते हैं. राजनीति में उम्र के तकाजे के आधार पर सभी को ऐसे रिजेक्ट करते रहेंगे, तो ऐसा लगता है कि वे बहस और विमर्श से भाग रहे हैं. एक सीएम के तौर पर उन्हें हल्की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए.
बता दें कि बिहार में गोपालगंज और मोकामा में हो रहे विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने पर नीतीश कुमार ने चिराग पासवान को बच्चा बता दिया था. सीएम ने कहा था कि चिराग के पिता रामविलास पासवान ने दिल्ली में जाकर दूसरी शादी कर ली थी. हम उनके वहां जाते थे. हमारा रिश्ता पुराना था. वो अब नहीं रहे. अब उनका बच्चा कुछ भी बोल रहा है.
देश में विपक्षी एकता की मुहिम चलाने वाले नीतीश कुमार आज कल साइकोलॉजिकल वॉर को प्रमुखता देने लगे हैं। खास कर महागठबंधन के साथ जाने के बाद अक्सर नीतीश कुमार का बात, व्यवहार और बोली बदल जाती है। वो भी रिएक्शनरी अंदाज में। गत दिनों चिराग पासवान भी नीतीश कुमार के इसी रिएक्शनरी ‘आक्रमण’ के शिकार हो गए। इस अंदाज में ये नीतीश कुमार का पहला हमला नहीं है। कई अन्य नेता भी नीतीश कुमार के इस अटैक के ‘शिकार’ हुए हैं।
चिराग क्यों बने हमले का कोण?
दरअसल, नीतीश कुमार का चिराग के प्रति इस अंदाज में हो जाना, दो-तीन दिन का रिएक्शन नहीं है। नीतीश कुमार की ये गांठ 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान बंधी थी, जो मौका देखते ही खुल गई। भले सवाल गुजरात दुर्घटना के बाद चिराग पासवान के संदर्भ में पूछी गई लेकिन पहले से खार खाए नीतीश कुमार ने साफ खुलासा कर दिया कि 2020 में जदयू उम्मीदवार के खिलाफ जो लोजपा के उम्मीदवार खड़े किए गए थे, किसके इशारे पर ऐसा हुआ था। उपचुनाव में अगर वो भाजपा के लिए प्रचार कर रहे हैं तो ठीक ही कर रहे हैं। वे भाजपा से अलग कहां हुए थे? लेकिन इतना कह कर भी नीतीश कुमार जब अपनी गांठ पूरी तरह नहीं खोल पाए तो ये कह गए कि रामविलास पासवान ने दिल्ली में दूसरी शादी की थी। ये कह कर बड़ी महीन तरीके से नीतीश कुमार संदेश देने में सफल हो गए कि ये बिहार की पीड़ा को नहीं समझेंगे। इनका ललन-पालन दिल्ली कल्चर में हुआ है। ऐसा कहने का मकसद सिर्फ यही था कि एक मनोवैज्ञानिक दबाव बना कर चिराग को कमजोर किया जाए। ये मोरली डिप्रेस्ड कर ही किया जा सकता है।
पीके के विरुद्ध साइकोलॉजिकल वॉर
जिस प्रशांत किशोर ने (PK) ने ‘हर-हर मोदी, घर-घर मोदी’ का लोकप्रिय नारा दिया। जिस पीके ने ‘फिर से नीतीशे कुमार’ का नारा दिया। बाद में नीतीश कुमार ने पीके को पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद दिया। वो जब इनके विरुद्ध बिहार में नई राजनीति की धारा तलाशने उतरे तो उनके खिलाफ नीतीश कुमार ने भी साइकोलॉजिकल वॉर शुरू किया। अल्फाज तब क्या थे- अरे ऊ उसको क्या आता है? राजनीति का ए. बी. सी. भी आता है? आंकड़ेबाज हैं, आंकड़ा बनाते रहे।
मोदी और लालू भी हुए नीतीश के शिकार
2014 लोक सभा चुनाव में जब नीतीश कुमार राजद की छतरी के तले महागठबंधन में आए तो एक पीएम की सारी मर्यादा भूल, नीतीश कुमार ने मनोवैज्ञानिक हमला बोलते कहा कि झाड़ू से बुहार देंगे। तब इनके बयान को एक पीएम के विरुद्ध कही गई बातों का राजनीतिक गलियारों में काफी भर्त्सना भी की गई। डीएनए को लेकर भी इसी मनोवैज्ञानिक हमले की राह नीतीश जी चल पड़े थे। इस तरह के हमले से लालू यादव और उनका परिवार भी अछूता नहीं रहा है।
पासवान की दूसरी शादी का जिक्र क्यों?
दरअसल, कोई भी राजनीतिक व्यक्ति अगर सामाजिक-राजनीतिक जीवन जीने वालों पर निजी हमला करता है तो माना जाता है कि वो आदमी जवाब देने में असमर्थ है या राजनीतिक जीवन में कमजोर पड़ने लगा है। निजी पहलुओं को उजागर करना, सामने वाले व्यक्ति को डिमॉरलाइज करना होता है। चिराग पर हमला करते हुए नीतीश कुमार ने रामविलास पासवान की जिस दूसरी शादी का जिक्र किया। वो सिर्फ इसलिए कि रामविलास को जो हक पासवान की राजनीति करने का था, वही हक चिराग को नहीं है। राज्य में होने वाले दो उपचुनाव को लेकर नीतीश कुमार ने जानबुझ कर इस प्रसंग को महागठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में करने के लिए की। वरना राजनीति में कुछ कम नहीं है उनकी संख्या, जिन्होंने दूसरी शादी की है। मुलायम सिंह यादव ने भी दूसरी शादी की, मगर मेरी जानकारी में मुलायम यादव की दूसरी शादी को कभी भी भाजपा ने राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया। ऐसा इसलिए भी कि रिश्ते राजनीति में बनते बिगड़ते रहते हैं। राजनीति में हमेशा के लिए न तो दोस्त होता है ना दुश्मन।
‘नीतीश कुमार पर उम्र हावी होते जा रही’
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल कहते हैं कि जैसे-जैसे नीतीश कुमार पर उम्र हावी होते जा रही है, वो खिसियाहट के साथ राजनीतिक टिप्पणियां करने लगे हैं। ऐसे में वे राजनीति कम व्यक्तिगत टिप्पणी ज्यादा करने लग गए हैं। महागठबंधन के साथ जब भी गए उनका चाल, चरित्र और चेहरा बदल गया।







