पटना समेत बिहार के 38 जिलों के गंगा घाटों पर छठ व्रतियों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की। इस दौरान कई लोगों ने भगवान से मन्नते भी मांगी। वहीं, पूजा के लिए श्रद्धालु सुबह 4 बजे से ही घाट के लिए निकलने लगे थे। कई श्रद्धालुओं ने घाट पर ही पूरी रात गुजारी। इस दौरान छठी मइया की जय से पूरा बिहार गूंज उठा। ऐसे में आइए देखते है राज्य से आई 10 खास तस्वीरों को…















छठ महापर्व के चौथे और आखिरी दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। सूर्योदय से पहले ही छठ घाटों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है। इस दौरान सड़क से लेकर छठ घाट तक रौनक रही। हर काेई भगवान भास्कर को अर्घ्य देने को लालायित नजर आया। इस मौके पर ड्रोन कैमरे की नजर से पटना के छठ घाटों का यह नजारा और भी अद्भुत दिखा। राजधानी पटना में शहर के 85 गंगा घाट और 61 तालाबों पर 15 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचे। वहीं, जिले के 427 घाट और 179 तालाबों पर 25 से 30 लाख श्रद्धालु घाट पर पहुंचे।

वहीं, तीसरे दिन रविवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया गया। इस दौरान 130 मीटर यानी 426 फीट की ऊंचाई से रोशनी से जगमग छठ घाट और सजे घर काफी आकर्षक दिखे। भगवान सूर्य को अर्घ्य देते व्रती और घाट की सुंदर लाइटिंग दृश्य को काफी मनोरम बना रहे थे। सोमवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का पावन पर्व संपन्न हो गया।
रविवार की शाम को बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि से अर्घ्य का सूप सजाया गया। इसके बाद व्रतियों ने अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य दिया। लाखों की तादाद में लोग दीघा घाट, काली घाट पर उमड़े। सड़क से लेकर शहर तक दिवाली से भी ज्यादा रंग-बिरंगी रोशनी बिखरी रही। इतनी ऊंचाई से अर्घ्य में टिमटिमाते दीये सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे।

वहीं, NDRF और SDRF की टीम सुरक्षा के मद्देनजर गश्ती करती रही। गंगा नदी में स्नान करने के बाद व्रतियों ने सूर्य को एक साथ अर्घ्य दिया। कोरोना काल के दो साल बाद छठ घाट का दृश्य काफी खूबसूरत नजर आया।

व्रत करने वाली महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से सभी इंतजाम किए गए हैं। जिला प्रशासन की तरफ से पटना में 131 वाच टावर, 4500 पुलिसकर्मी, 499 दंडाधिकारी को नियुक्त किया गया है। प्रशासन की तरफ से इस साल पटना के गंगा नदी के जलस्तर को देखते हुए 17 घाटों को खतरनाक घोषित किया गया है।

36 घंटे निर्जला रहना पड़ता है व्रती को
छठ व्रत में न कोई मंदिर की जरूरत न मंत्र की, न जाप की न ही किसी कर्मकांड की। जरूरत है तो बस पूर्ण समर्पण की। यह एकमात्र व्रत है, जिसमें 36 घंटे निर्जला रहना पड़ता है। जहां छठ वही धाम और हर व्रत करने वाली महिला छठी मईया। 4 दिन के इस महापर्व को अब पूरी दुनिया में लोग करने लगे हैं।





