शरद पूर्णिमा का पावन पर्व आज है। शरद पूर्णिमा का त्योहार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा की रात का विशेष धार्मिक महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास होता है। कहा जाता है कि इस दिन आकाश से अमृत वर्षा होती है। इस दिन देवी देवताओं को भोग में खीर अर्पित करने की मान्यता है।
माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर ही होती है और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती है। इस रात चंद्रमा, माता लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने रास रचाया था। इस लिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं।
शरद पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Sharad Purnima Shubh Muhurt)
हिंदू पंचांग के मुताबिक, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 9 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से शुरू होगी जो अगले दिन 10 अक्टूबर को सुबह 2 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। इस साल शरद पूर्णिमा पर कई शुभ योग बन रहा है। ध्रुव योग शाम 06 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 31 मिनट से शाम 04 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
ब्रह्म मुहूर्त- 04:40 AM से 05:29 AM।
अभिजित मुहूर्त- 11:45 AM से 12:31 PM।
विजय मुहूर्त- 02:05 PM से 02:51 PM।
गोधूलि मुहूर्त- 05:46 PM से 06:10 PM।
अमृत काल- 11:42 AM से 01:15 PM।
सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:18 AM से 04:21 PM।
शरद पूर्णिमा पर धन प्राप्ति के उपाय
शरद पूर्णिमा रात के समय मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं।
उन्हें गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें।
उन्हें सफेद मिठाई और सुगंध भी अर्पित करें।
‘ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नमः’ का जाप करें।
शरद पूर्णिमा पर इन मंत्रों का करें जाप
ॐ चं चंद्रमस्यै नम:
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम। नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विद्महे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।
बंगाली समाज के लोग मना रहे लखी पूजा
बंगाली समुदाय के लोग शरद पूर्णिमा को लखी पूजा के रूप में पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। सभी दुर्गा मंदिरों, मंडपों व पूजा पंडालों में जहां-जहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई थी, वहां मां लखी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। शहर के हरि मंदिर, कोयला नगर दुर्गा मंडप, भुईफाेड़ मंदिर, खड़ेश्वरी मंदिर के साथ दुर्गा पूजा पंडालों में पूजा-अर्चना की जा रही है। पूजा अर्चना के बाद सभी भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया जाएगा। जरूरतमंद लोगों के बीच राहत सामग्री भी बांटी जाएगी।
शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा के रूप में मना रहा गुजराती समाज
गुजराती समाज शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा के रूप में मनाता है। गुजराती संस्कृति के अनुसार, रात में सामूहिक रूप से खुले मैदान या छत पर परिवार के सभी सदस्य जुटते हैं। यहां गर्म दूध में चीनी व चूड़ा डालकर या खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। जब तक चंद्रमा की शीतलता उस खीर में पड़ती है, तब तक कृष्ण के भजनों पर उसी के चारों ओर रास-गरबा का आयोजन किया जाता है। तरह-तरह के गीत गाए जाते हैं। समाज के लोगों में त्योहार को लेकर उत्साह है।
मिथिला समाज के लोग मना रहे हैं कोजागरा उत्सव
मिथिला समाज के लोग शरद पूर्णिमा को कोजागरा उत्सव के रूप में मना रहे हैं। नवविवाहित दंपती के लिए कोजागरा उत्सव महत्वपूर्ण है। इस त्योहार में मधु, मखान व पान का विशेष महत्व है। त्योहार में नवविवाहित कन्या के परिवार की ओर से वर पक्ष के घर पहले ही पान, मखान, केला, दही, मिठाई, लड्डू, नए वस्त्र, हल सहित कई अन्य सामग्री भेजी जाती है। नवविवाहित दंपती के जीवन की सुख शांति के लिए इस दिन घर में पूजा अर्चना की जाती है। कोजागरा उत्सव पर महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रख शाम में मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना करती हैं। परिवार की सुख समृद्धि के लिए कामना करती हैं। इसके बाद घर के बड़े बुजुर्गों के पांव छूकर आशीर्वाद लेती हैं।




