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भारतीय वायुसेना में शामिल हुए स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’

UB India News by UB India News
October 4, 2022
in खास खबर, सेना
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भारतीय वायुसेना (IAF) को आज एक बड़ी सौगात मिली है. वायुसेना के युद्ध कौशल को धार देने के लिए देश में विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकाॅप्टर (Light Combat Helicopter, LCH) का जत्था तैयार किया गया.  राजस्थान के जोधपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में स्वदेशी हेलीकाॅप्टरों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया. इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा एलसीएच दुश्मन को चकमा देने, कई तरह के गोला-बारूद ले जाने और उसे तुरंत साइट पर पहुंचाने में सक्षम है. एलसीएच विभिन्न इलाकों में हमारे सशस्त्र बलों की जरूरतों को  पूरा करता है और यह हमारी सेना और वायु सेना दोनों के लिए एक आदर्श मंच है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से हमलावर हेलीकॉप्टरों की जरूरत थी और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इसकी जरूरत को गंभीरता से महसूस किया गया था. एलसीएच दो दशकों के अनुसंधान एवं विकास का परिणाम है. इसका शामिल होना रक्षा उत्पादन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

प्रचंड रखा गया इन हेलीकॉप्टरों का नाम
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल अनिल चौहान और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी उपस्थिति में इन हल्के हेलीकॉप्टरों का नामकरण किया गया। जोधपुर एयरबेस से भारतीय वायु सेना में शामिल हुए इन हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर का नाम ‘प्रचंड’ रखा गया है।

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बेड़े में शामिल किए जाने के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एलसीएच दुश्मन को चकमा देने, कई तरह के गोला-बारूद ले जाने और उसे तुरंत घटना स्थल पर पहुंचने में सक्षम है। एलसीएच विभिन्न इलाकों में हमारे सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा करते हैं। यह हमारी सेना और वायु सेना दोनों के लिए एक आदर्श प्लेटफॉर्म हैं।

लंबे से इन हेलीकॉप्टरों की थी जरूरत: राजनाथ
राजनाथ सिंह ने कहा कि लंबे समय से हमलावर हेलीकॉप्टरों की जरूरत थी। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इसकी जरूरत को गंभीरता से महसूस किया गया था। एलसीएच दो दशकों के रिसर्च एवं विकास का परिणाम हैं। भारतीय वायुसेना में इनका शामिल होना रक्षा उत्पादन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

वहीं, इसके पहले रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया कि इन हेलीकॉप्टरों को शामिल करने से भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता को काफी बढ़ावा मिलेगा।

राजनाथ सिंह और वायसेना प्रमुख रहे मौजूद
फोर्स में शामिल होने वाले यह नए हेलिकॉप्टर हवाई युद्ध में सक्षम है और संघर्ष के दौरान धीमी गति से चलने वाले विमानों, ड्रोन और बख्तरबंद टैंकरों से निपटने में एयर फोर्स की मदद करेगा। आज के इस समारोह का नेतृत्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। इस दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी भी उपस्थित हैं।

10 भारतीय वायुसेना और 5 थल सेना के लिए
इस साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCS) की बैठक में स्वदेश विकसित 15 एलसीएच को 3,887 करोड़ रुपये में खरीदने की मंजूरी दी गई थी। इन 15 हेलीकॉप्टरों में से 10 भारतीय वायुसेना के लिए और पांच थल सेना के लिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह हथियारों और ईंधन के साथ 5,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकते हैं।

लद्दाख और रेगीस्तानी क्षेत्र में किया जाएगा तैनात
इन हेलीकॉप्टरों को सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (HAL) ने विकसित किया है और इसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करने के लिए प्राथमिक रूप से डिजाइन किया गया है। सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लद्दाख और रेगिस्तानी क्षेत्र में हेलिकॉप्टरों को बड़े पैमाने पर तैनात किया जाएगा। भारतीय वायुसेना ने पिछले तीन-चार सालों में चिनूक, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और अब एलसीएच को शामिल करने के साथ कई हेलीकॉप्टरों को अपने बेड़े में शामिल किया है।

गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना अब चिनूक हेलिकॉप्टरों में महिला पायलटों को भी तैनात कर रहा है, जो उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर नियमित आपूर्ति मिशन ले जा रहे हैं। वहीं, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन (LSP) एक स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित अत्याधुनिक आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टर है।

15 हेलीकाॅप्टर का जत्था शामिल 

इस वर्ष मार्च में पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में स्वदेश विकसित 15 एलसीएच को खरीदने की मंजूरी दी गई थी. इन हेलीकाॅप्टरों में दस भारतीय वायुसेना और पांच थल सेना के लिए हैं. अधिकारियों के अनुसार, यह हथियारों के साथ पांच हजार मीटर की ऊंचाई तय कर सकता है.

लद्दाख और रेगीस्तानी क्षेत्र में होगा तैनात 

इन हेलीकॉप्टरों को हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है. इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात करने के लिए बनाया गया है. सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे लद्दाख और रेगिस्तानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तैनात किया जाएगा. भारतीय वायुसेना लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है. उसने बीते तीन चार सालों में चिनूक, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और अब एलसीएच को शामिल किया है.  एलसीएच एक आधुनिक किस्म का हेलीकाॅप्टर है. इसे सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है.

 

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