सरकार का एक ही धर्म है‚ भारत पहले। मेरी सरकार का एक ही ग्रंथ है‚ भारत का संविधान। मेरी सरकार की एक ही भक्ति है‚ भारत भक्ति। मेरी सरकार की एक ही पूजा है‚ सवा सौ करोड़ देशवासियों का कल्याण। मेरी सरकार की एक ही कार्यशैली है‚ ‘सबका साथ–सबका विकास –सबका विश्वास–सबका प्रयास।
ये महज शब्द नहीं हैं। इन शब्दों में १३० करोड़ लोगों की लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रतिनिधित्व कर रहे ‘प्रधान सेवक’ के राष्ट्र निर्माण के संकल्प का राष्ट्रीय बोध भी है। २० वर्ष पूर्व जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर विषम परिस्थितियों में पदभार संभाला तो उनका सामना भूकंप की त्रासदी से ग्रस्त और जीर्ण–क्षीर्ण गुजरात से हुआ। यहीं से आपदा को अवसर बनाने की उनकी यात्रा की भी शुरु आत हुई। उनकी इस सकारात्मक सोच‚ दूरदर्शिता एवं मजबूत इच्छाशक्ति का अहसास पूरे देश को कोविड काल में देखने को मिला। पूरी दुनिया आपदा से त्रस्त थी और भारत ने मोदी जी के नेतृत्व में दुनिया के सामने आपदा प्रबंधन का मॉडल पेश किया। उनके नेतृत्व में भारत ने वसुधैव कुटुम्बकम का उदाहरण देते हुए ‘वैक्सीन मैत्री’ के रूप में दुनिया भर में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी। योग की ताकत से उन्होंने पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरोने का अनुपम प्रयास किया है।
20 वर्षों का उनका प्रशासनिक अनुभव भारत के लिए वरदान साबित हुआ है। विदेश नीति‚ सुरक्षा नीति‚ सामाजिक कल्याण से लेकर बड़े तौर पर आर्थिक एवं सामाजिक रिफॉर्म देश में देखने को मिले ‘रिफॉर्म–परफॉर्म–ट्रांसफॉर्म’ के पैमाने पर पिछले आठ वर्षो में मोदी जी के प्रधानमंत्री रहते हुए देश ने कई मुकाम हासिल किए हैं। आज पूरा विश्व मोदी जी को विश्व के सर्वाधिक स्वीकार्य नेतृत्व के तौर पर देखता है। व्यापक रूप से उनके रुख को पूरी दुनिया के लीडर विश्लेषण करने के बाद ही कूटनीतिक एवं राजनैतिक फैसले लेते हैं। विदेश नीति को धार देने से लेकर‚ वैश्विक समूह में हिस्सेदारी और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर भारत को नई पहचान‚ आवाज और ताकत मिली है। इसका पूरा श्रेय मोदी जी को जाता है। यूक्रेन‚ रूस‚ अफगानिस्तान‚ यमन से हमने हर एक भारतीय को सकुशल लाने का कार्य किया। अन्य पड़ोसी देशों के नागरिकों को सकुशल वापस लाने में भी बड़ी भूमिका निभाई‚ जिसकी पूरे विश्व में प्रशंसा हुई। धारा ३७० जैसी जटिल गुत्थी को उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति से सुलझाया ही नहीं‚ जम्मू–कश्मीर को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का भी काम किया है। सर्जिकल स्ट्राइक‚ बालाकोट‚ पठानकोट में पूरे विश्व ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की उनकी नीति को जाना। पूर्वोत्तर में सीमा से जुड़े मसलों को भी वार्ता एवं संवाद के जरिये सुलझाने के सफल प्रयास उन्होंने किए हैं। खेल जगत में भी भारत ने देश की युवाशक्ति और प्रतिभा का लोहा पिछले आठ वर्षों में मनवाया है। ऐसा कोई अवसर नहीं‚ जब देश का प्रधानमंत्री हमारे खिलाडि़यों के उत्साहवर्धन और संवर्धन के लिए उनके साथ खड़ा न दिखाई दिया हो। आज पूरा देश ‘एक देश एक टैक्स’ के कवर में आ चुका है। हर माह रिकॉर्ड टैक्स का संचय हो रहा है।
डिजिटल इंडिया का उनका विजन ही था जिसके परिणामस्वरूप भारत डिजिटल ट्रांजेक्शन में आज विश्व में नंबर एक है। जनधन खातों की मदद से देश के एक बड़े वर्ग को आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण का लाभ मिला है। ३४ वर्षों बाद मोदी जी के नेतृत्व में देश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० मिली जो देश की मजबूत आधारशिला का काम करेगी। ‘मेक इन इंडिया’‚ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का उनका विजन न केवल रक्षा बल्कि हर एक क्षेत्र में देश को आर्थिक मजबूती दे रहा है। रक्षा उत्पाद में हम आयात से हटकर निर्यात की ओर बढ़ रहे हैं। जल्द ही भव्य राम मंदिर का निर्माण भी पूरा हो जाएगा। काशी जीर्णोद्धार का ऐतिहासिक काम मोदी जी के समर्पण एवं आस्था का सबसे सजीव उदाहरण है। आज देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आने वाले २५ वर्ष ‘अमृत काल’ के रूप में ऐतिहासिक होंगे। पहली बार देश को आजाद भारत का राष्ट्रीय समर स्मारक मिला। सेंट्रल विस्टा का उद्धार भी हाल ही में संपन्न हुआ। जल्द ही देश की नई संसद भवन की इमारत भी तैयार होगी जो आने वाले दौर के लिए पूरी तरह सक्षम होगी।
आज भी मेरे जेहन में वो तस्वीर उभर आती है जब प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार संसद के प्रवेश द्वार पर माथा टेका था और संविधान के सामने नतमस्तक हुए थे। इन सब विषयों से हमें उनकी लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था का आभास होता है और भविष्य में अनुकरण करने की प्रेरणा मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं को बड़ा सोचने‚ बड़ा लक्ष्य तय करने के लिए प्रोत्साहित भी किया और विकल्प भी दिए। आज भी वह सबसे ज्यादा लोकप्रिय ‘यूथ आइकन’ के रूप में देश के युवाओं के दिल में बिराजे हुए हैं। ‘ये कैसे होगा’ से ‘ये भी हो सकता है’ तक का सफर भारतीय जनमानस ने पिछले ८ वर्षों में तय किया है। आज जब देश का युवा‚ जवान–किसान और प्रवासी भारतीय तक यह कहता है ‘मोदी है तो मुमकिन है’ तो निश्चित रूप से यह बात स्थापित हो जाती है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ८ वर्षों में देश का विश्वास हासिल किया है जो २०१४ से पूर्व पूरी तरह कमजोर नेतृत्व के चलते क्षीण हो चुका था।
राजनैतिक वर्ग के प्रति जनता के विश्वास को उन्होंने अपने पुरु षार्थ से अर्जित किया है। राष्ट्र निर्माण के यज्ञ में उनके भागीरथ प्रयास का परिणाम है कि आज भारत विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोदी जी का जीवन हर पार्टी कार्यकर्ता‚ प्रशासनिक अधिकारी‚ युवा और आम नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। इस दिन को हम ‘कर्मयोगी दिवस’ के रूप में मनाएं और ‘एक काम देश के नाम’ समर्पित करें। उनका ‘नेशन फर्स्ट आलवेज फर्स्ट’ का सूत्र हर फैसले का मूलभूत सिद्धांत मानकर हम राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं। संकल्प से सिद्धि के मार्ग पर अग्रसर प्रधानमंत्री जी के समर्पित‚ कर्मठ एवं त्यागी जीवन के संदर्भ में कुछ पंक्तियां याद आती हैं– मन समर्पित‚ तन समर्पित और यह जीवन समर्पित/चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं।







