बिहार के लिए अपराध और जातिवाद दो ऐसे मसले हैं‚ जिनसे उबरने में लगता है काफी वक्त लगेगा। मंगलवार को मोटरसाइकिल पर सवार दो अपराधियों का करीब ३० किलोमीटर के दायरे में अंधाधुंध गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत और ११ से ज्यादा राहगीरों के घायल होने की वारदात में जातिवाद की एंट्री वाकई तकलीफदेह है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक समय शासन चलाने की अपनी खूबियों के चलते ‘सुशासन कुमार’ के नाम से जाने गए‚ मगर लगता है अब उम्र और हताशा उनकी इस छवि को लहूलुहान कर रहा है। जिस तरह से मुख्यमंत्री ने गोलीबारी की इस घटना को जातिवाद से जोड़़ा है‚ वह उनकी पूर्व की छवि से मेल नहीं खाती है। बेगूसराय की घटना शायद देश की पहली ऐसी घटना है‚ जहां नेशनल हाईवे २८ और ३१ में कोई अपराधी २५ मिनट लगातार गोलीबारी करता रहे। अपराध हर प्रदेश में होते हैं। अपराध को खत्म तो नहीं किया जा सकता है‚ मगर अपराधियों में यह ड़र तो होना ही चाहिए कि पकड़े़ जाने के बाद उनके साथ कैसा सलूक होगाॽ यह ड़र लगता है बिहार के अपराधियों के दिलोदिमाग से गायब है। यही वजह है कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस के हाथ खाली हैं। हां‚ पांच संदिग्धों को जरूर पुलिस ने पकड़़ा है। लेकिन यह अंधेरे में हाथ–पैर चलाने जैसा है। कानून–व्यवस्था हमेशा से बिहार की कमजोर नस रही है। जब–जब लालू की पार्टी सत्ता में आती है; जनता के मन में यह ड़र कुछ ज्यादा होने लगता है। किसी भी वारदात की चर्चा भी कुछ ज्यादा होने लगती है। चूंकि अभी नीतीश लालू के साथ सत्ता में साझीदार हैं। स्वाभाविक है विपक्ष मामले को तूल देने में कोई कसर नहीं रखेगा। इस नाते नीतीश को अनर्गल बयान देने की बजाय कानून–व्यवस्था के मामले को ज्यादा संजीदगी से हल करना होगा। गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास ही है तो स्वाभाविक रूप से उनकी जिम्मेदारी कुछ ज्यादा ही हो जाती है। बिहार को बेहतर बनाने के दावे और जमीनी हकीकत में जमीन और आसमान का अंतर है। उन्हें अपने उन वादों पर ध्यान देने की जरूरत है‚ जिसकी अपेक्षा राज्य की जनता उनसे करती है। ऐसा जघन्य अपराध करने वाला अगर अभी तक पुलिस की पकड़़ से बाहर है तो यह निश्चित रूप से मुख्यमंत्री की हार है। कैसे जनता उनपर भरोसा रखेगी‚ कैसे कोई उद्योगपति अपार संभावनाओं वाले सूबे में निवेश की हिम्मत जुटाएगाॽ नीतीश और तेजस्वी‚ दोनों को अब अपना रुख कड़़ा करना होगा।
समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं………
UGC की नई नियमावली ने देश सहित बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है। अपर कास्ट के बढ़ते आक्रोश...







