इडी उर्फ इनफोर्समेंट डाइरेक्टोरेट में मेरा एक मित्र काम करता है‚ मैंने उससे निवेदन किया कि भाई एक छापा मेरे यहां भी करवा दो‚ अपना स्टेटस कुछ टाप टाइप का हो जाएगा। एक जमाने में इनकम टैक्स के छापे स्टेटस सिंबल होते थे। अब नया स्टेटस सिंबल है–ईडी का छापा‚ ईडी का छापा पड़ जाए‚ तो समझना चाहिए कि बंदा पहुंचा हुआ है। एक परम इलीट टापमटाप लोगों की पार्टी में मैंने यह सुना– वरिष्ठ अफसर ने दूसरे वरिष्ठ अफसर से कही–बिटिया की शादी बात चलानी है‚ ईडी का छापा पड़ जाए‚ तो बात चलाऊँ। ईडी का छापा हो जाए‚ तो फिर स्टेटस नये ऊंचे लेवल पर आ जाता है। सुनने वाले अफसर ने बताया कि अभी तो ईडी नेताओं में और बहुत टाप के लोगों में बिजी है‚ तुम्हारा नंबर अभी ना आएगा। इनकम टैक्स के पांच सात छापे पड़वा लो और बिटिया की शादी की तैयारियां शुरू करो। मैंने ईडी वाले मित्र से कहा–एक छापा पड़वा दो‚ तो मेरी भी हैसियत सही सी बन जाएगी। ईडीवाला मित्र हंसा–अबे हिंदी के लेखक‚ १००० की रायल्टी ना देता तुझे प्रकाशक‚ कनाट प्लेस के मंदिरों के भिखारियों की नेथ वर्थ तुझसे ज्यादा है। भक्क‚ ईडी का छापा चाहिए इन्हे। मैंने कहा–तू मेरा मित्र है‚ इतना काम ना करवाएगा कि असली न सही फर्जी छापा पड़वा दे। ईडी वाला मित्र बोला–तमाम उद्योगपति और नेता ईडी पर मानहानि का मुकदमा लगा देंगे कि बताइये जो एजेंसी हमारे यहां छापा मार रही है वही हिंदी के लेखक के यहां भी छापा मार रही है।
हमारी बराबरी हिंदी के लेखक के साथ‚ यह तो विकट बेइज्जती है। तेरे चक्कर में हम मानहानि के मुकदमे क्यों झेलें। मैंने निवेदन किया–एक बार हिंदी के लेखक के यहां ईडी का छापा‚ नकली ही सही पड़ जाए‚ तो युवाओं में संदेश जाएगा कि हिंदी का लेखक भी तोप टाइप चीज होता है। ईडी के मित्र ने फाइनली बता दिया है कि हिंदी के लेखक के यहां छापा मारकर ईडी के स्टाफ मारल बहुतै डाऊन हो जाएगा‚ वो खुद को बहुत निम्न स्तर का सरकारी कर्मचारी महसूस करेंगे। राष्ट्रहित में यही उचित है कि मैं ईडी के छापे का आग्रह ना करूं। हिंदी दिवस के आसपास हिंदी के लेखक यह औकात निकली है जी।







