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10 में से 7 भारतीय नहीं पहनते सीट बेल्‍ट… क्‍या डंडा हांकना ही जरूरी?

UB India News by UB India News
September 8, 2022
in दुर्घटना, परिवहन
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10 में से 7 भारतीय नहीं पहनते सीट बेल्‍ट… क्‍या डंडा हांकना ही जरूरी?
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क्‍या हम हादसे का इंतजार करते रहते हैं? हम अपने आप बुनियादी बातों का ख्‍याल क्‍यों नहीं रखते हैं? क्‍या अपनी जान की सुरक्षा के लिए भी हमें नियमों और कायदों की बंदिशों की जरूरत है? जब तक पुलिस डंडा नहीं हांकेगी हम क्‍यों नहीं मानते? अचानक कई सवाल खड़े हो गए हैं। सड़कों पर बिना हेलमेट बाइक दौड़ाते लोगों को फूल देकर, डंडा फटकार कर, चालान काट कर, हाथ जोड़-जोड़कर इसे लगाने को कहा गया। यह और बात है क‍ि आज भी हेलमेट के बगैर बाइक सवारों को देख लेना कोई ताज्‍जुब नहीं है। यह बात समझना कितना मुश्किल है क‍ि हेलमेट क‍िसी सड़क दुर्घटना (Road Accidents) से बचा सकता है। ठीक ऐसी ही बहस अब कार में सीट बेल्‍ट पहनने को लेकर शुरू हो गई है। सरकार अब कार में बैठे हर शख्‍स के लिए सीट बेल्‍ट (Seat belt) को जरूरी बनाने वाली है। सवाल यह है क‍ि सीट बेल्‍ट तो कार में पहले से ही होती है। वह देखने के ल‍िए तो कतई नहीं है। फिर इसे लगाने का इंतजार क‍िस बात का हो रहा है। दरअसल, हम हर बात को हवा में लेते है। जब कोई हादसा होता है तब उस पर चर्चा गरम हो जाती है। दोबारा हम भूल जाते हैं। एक सर्वे से पता चलता है क‍ि भारत में 10 में से 7 पैसेंजर कार में पीछे बैठकर कभी भी सीट बेल्‍ट नहीं लगाते हैं। यह वाकई डराने वाला आंकड़ा है।

रविवार को टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्‍त्री (Cyrus Mistry) की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वह पीछे की सीट पर बैठे हुए थे। जांच में पता चला है कि उन्‍होंने सीट बेल्‍ट नहीं लगा रखी थी। ज्‍यादातर बार ऐसा होता है। कार ड्राइव करने वाला तो सीट बेल्‍ट लगाता है। लेकिन, पीछे बैठे लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। इसके उलट सच यह है कि हजारों लोग इन सड़क दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं। अब सरकार कार में पीछे बैठे लोगों के लिए सीट बेल्‍ट अनिवार्य करने वाली है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही है। उन्‍होंने माना है कि सड़क दुर्घटना मात्र वह कमजोर पहलू है जिस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है।

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हमारी जान की फ‍िक्र किसकी?
सवाल यह है कि हमारी जान की फिक्र सिर्फ सरकार को होनी चाहिए। हमारी कोई जिम्‍मेदारी नहीं बनती है। सरकार की रिपोर्ट कहती है कि 2020 में तेज रफ्तार के कारण सबसे ज्‍यादा मौतें हुईं। सड़कों पर होने वाले हादसों में सबसे ज्‍यादा मामले इसी के चलते सामने आए। गलत दिशा और नशे में गाड़ी चलाना, ड्राइव करते बात करना, रेड सिग्‍नल की अनदेखी करना, इन्‍होंने भी हादसों को दावत दी।

सड़क हादसों पर सरकार की रिपोर्ट कहती है कि कैलेंडर वर्ष 2020 में तेज रफ्तार से वाहन चलाने के कारण कुल 2,65,343 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 91,239 लोगों की मौत हुई। 20,228 सड़क दुर्घटनाएं गलत दिशा में गाड़ी चलाने के कारण हुईं। इन हादसों में 7,332 लोगों की जान चली गई। इस दौरान सीटबेल्ट नहीं पहनने के कारण 15,146 लोगों की मौत हुई। वहीं, 39,102 लोग घायल हो गए। शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से 8,355 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 3,322 लोगों की मौत हो गई। वहीं, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन के इस्‍तेमाल के कारण 6,753 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 2,917 लोगों की मौत हो गई।

70% नहीं लगाते पीछे बैठकर सीट बेल्‍ट
हाल में लोकल सर्किल्‍स ने एक सर्वे किया था। इसमें पाया गया था कि भारत में 70 फीसदी पैंसेजर कार में पीछे बैठकर कभी सीट बेल्‍ट नहीं लगाते हैं। सर्वे में इस बात पर जोर दिया गया था कि कार में सेफ्टी के लिए सीट बेल्‍ट कितनी जरूरी है।

जनवरी में दिल्‍ली ट्रैफिक पुलिस ने 10 दिनों का कैंपेन चलाया था। इसका मकसद कार में पीछे की सीट पर बैठे लोगों को सीट बेल्‍ट लगाने के लिए जागरूक करना था। उन्‍हें इस बात से अवगत करना था कि मोटर वीकल कानूनों के तहत यह न केवल जरूरी है बल्क‍ि इसकी सलाह भी दी जाती है।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) भी इस बात को जोर देकर कह चुका है कि कार में पीछे बैठे लोगों के लिए सीट बेल्‍ट लगाना कितना जरूरी है। इससे दुर्घटना में जान जाने का खतरा 25 फीसदी तक घट जाता है। वहीं, चोटिल होने का जोखिम 75 फीसदी तक कम हो जाता है।

लेकिन, बात वहीं पर आती है। कानून तो पहले से है। मानना और नहीं मानना हमारे ऊपर है। हम क्‍यों चाहते हैं क‍ि हमेशा क‍िसी कानून को हांककर मनवाया जाए। अपने आप से हम पहल करने की कोशिश क्‍यों नहीं करते हैं। अगर हर व्‍यक्ति रोड सेफ्टी के नियमों का पालन करे तो कैसे फर्क नहीं पड़ेगा। क्‍या नियमों के उल्लंघन के लिए पेनाल्‍टी, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जैसे प्रावधानों से ही हम काबू में आएंगे। इतने ढीठ तो नहीं हैं हम।

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