बिहार में मानसून एक्टिव है। इसे लेकर मौसम विभाग ने प्रदेश के 12 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें 6 जिलों में वज्रपात के साथ भारी बारिश के आसार हैं। वहीं बुधवार को वज्रपात से राज्य में 7 लोगों की मौत हो गई। इसे लेकर CM नीतीश कुमार ने अपनी संवेदना व्यक्त की। साथ ही लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
बिहार की नदियां उफान पर
बिहार में हो रही अच्छी बारिश से ज्यादातर नदियों का जलस्तर अब रौद्र रूप धारण करने लगा है। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के घरों में पानी घुस जाने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गंगा नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर प्रशासनिक तंत्र सतर्क
गंगा नदी के जल स्तर में अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। नदी के जल स्तर में गुरुवार से कमी आने के आसार हैं। फिलहाल जल स्तर स्थिर है। उसमें तेज वृद्धि नहीं देखी जा रही है। वरीय पदाधिकारी‚ भूमि सुधार उप समाहर्ता‚ अंचलाधिकारी एवं अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारी बाढ संभावित क्षेत्रों में ‘निरंतर भ्रमणशील’ हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि गंगा नदी का वर्तमान में औसत जलस्तर उच्चतम जलस्तर से लगभग ०.९६ से १.८९ मीटर नीचे है। मनेर में उच्चतम जलस्तर ५३.७९ मीटर है जबकि बुधवार सुबह छह बजे यहां जलस्तर ५२.५९ मीटर रिकॉर्ड किया गया जो उच्चतम जलस्तर से १.२ मीटर नीचे है। दीघा घाट में उच्चतम जलस्तर ५२.५२ मीटर है जबकि बुधवार सुबह छह बजे यहां का जलस्तर ५०.६३ मीटर था जो उच्चतम जलस्तर से १.८९ मीटर नीचे है। गांधी घाट में उच्चतम जलस्तर ५०.५२ मीटर है जबकि बुधवार सुबह छह बजे यहां का जलस्तर ४९.५५ मीटर दर्ज किया गया जो उच्चतम जलस्तर से ०.९७ मीटर नीचे है। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा के जलस्तर को लेकर अगले ३० घंटे महत्वपूर्ण हैं। राजधानी पटना के कुर्जी घाट के पास गंगा की बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश कर गया। जिलाधिकारी ने हालात को देखते हुए आम जनता से की सुरक्षा के दृष्टिकोण से निर्धारित मापदंडों का पालन करने की अपील की है ।
#पटना : कैमरे की नजर से पटना में गंगा की वर्तमान स्थिति । pic.twitter.com/JljWz6Aya1
— UB INDIA NEWS (@ubindianews) August 31, 2022
पटना गंगा नदी खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इसके चलते निचले इलाके डूब चुके हैं। लोग पलायन कर रहे हैं। कुछ मचान बनाकर रहने को मजबूर हैं। घर पूरी तरह से डूब चुके हैं। गंगा किनारे बसे कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ का जायजा लेने हमारी टीम नदी किनारे बसे गांव बिंद टोली, दरियापुर, महादेवपुर, जाहिदपुर, रानीपुर, दीघा और NIT घाट पहुंची।
सबसे पहले नदी किनारे बसे गांव बिंद टोली पहुंची। यहां की आबादी करीब 1 हजार है। 2015 में दीघा रेल पुल निर्माण के लिए इनको अपना घर छोड़ना पड़ा था। गंगा नदी में नाव पर चलकर हम गांव के बीचो बीच पहुंचे। यहां छोटे-छोटे बच्चे नाव पर चढ़कर स्कूल जाते दिखे।
महिलाएं अपने बच्चे को गोद में लेकर बांस के बने मचान पर बैठी दिखाई दी। वहीं दूसरी तरफ गांव के पुरुष बाढ़ से बचने के लिए नाव के सहारे लगातार बांस लेकर जाते दिखे। भरे हुए पानी में बांस के सहारे वह मचान बनाकर अपने आपको सुरक्षित कर रहे हैं।

बिंद टोली गांव के लोग लगा रहे मदद की गुहार
बिंद टोली निवासी हरिंदर महतो ने बताया कि हमारा घर हर साल बाढ़ में डूबता जाता है, लेकिन किसी को इसकी परवाह नहीं। हमारे घर में छोटे-छोटे बच्चें हैं, हमारी परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।
वहीं इस गांव के निवासी ओम प्रकाश का कहना है कि हमारे घर में पानी भर गया है और यह पानी दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहा है। हमारे पास खाने के लिए भी कुछ नहीं है, आने जाने में भी काफी कठिनाई हो रही हैं।

लगातार पानी में चलने की वजह से हो रहे बीमार
दरियापुर निवासी राजपतिया देवी ने कहा कि हमारे घर में पानी भर गया है। हर रोज यह बढ़ते जा रहा है, लेकिन हमारे लिए कोई व्यवस्था नहीं कराई जा रही। पानी में चलने की वजह से हमारी तबीयत भी खराब हो जा रही हैं।
हर साल जब बाढ़ से हमलोग डूब के बच जाते हैं, तब हमें खाना पहुंचाया जाता है। वहीं कौशल्या देवी का कहना है कि पानी भरने से हमें खाने पीने की सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।

पिछले 24 घंटे में 23 सेमी की हुई हैं बढ़ोतरी
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार गांधी घाट में जब नदी का जलस्तर 50 मीटर से अधिक होता है तो बाढ़ की स्थिति होने लगती है। आपदा प्रबंधन विभाग के नवल किशोर का कहना है कि गांधी घाट खतरे के निशान से 51 सेमी ऊपर है।
सोमवार को जलस्तर 49.280 मीटर था लेकिन आज यह बढ़कर 49.510 मीटर तक पहुंच गया है। इसी के साथ जलस्तर में 23 सेमी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 16 सेमी ऊपर है।
इतने खतरे के बावजूद वहां छोटे-छोटे बच्चे बाढ़ की पानी में नहाते हुए दिखे। वहां मौजूद गीता देवी का कहना है कि प्रशासन द्वारा बार बार हटाने पर भी इन बच्चों पर असर नहीं है। यह बच्चे किसी की नहीं सुनते, इसी वजह से आए दिन डूबने से मौत की घटना भी हो रही है।

कारोबार पर भी दिख रहा असर
इधर, घाटों पर पानी भर जाने के कारण आस-पास के दुकानदार काफी परेशान हैं। इनका कहना है कि यहां हर रोज लोगों की भीड़ रहती थी, इस वजह से हमारा कारोबार अच्छा चलता था। लेकिन पानी भरने के बाद से इसका बहुत बुरा प्रभाव हमारे व्यवसाय पर दिख रहा है। वहीं नारियल पानी बेचने वाले नंदू मेहता का कहना है कि बाजार में तनिक भी रौनक नहीं दिख रहा। पानी भरने की वजह यहां लोग नहीं आ रहे हैं, जिससे हमारा कारोबार ठप हो गया है।







