पटना हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट के उस निर्णय को रद्द कर दिया जिसमें बैग कारोबारी आरा निवासी इमरान की हत्या के जुर्म में १० लोगों को १० साल की कैद और दसों को तदुपरांत फांसी देने का फैसला दिया था। हाईकोर्ट ने न केवल १० अभियुक्तों की फांसी को रद्द किया बल्कि उन्हें सभी दोषों से बाइज्जत बरी कर दिया।
यह था मामलाः छह दिसंबर‚ २०१८ को एक बैग कारोबारी इमरान की गोलियों से छलनी करके हत्या कर दी गई थी। यह घटना हरमन चौक‚ आरा में दिनदहाडे दोपहर में अंजाम दी गई थी। इस मामले में नामजद खुर्शीद कुरैशी‚ अब्दुल्ला कु रैशी‚ बबली मियां‚ तौसीक मियां‚ अहमद मियां‚ अनवर कुरैशी‚ राजू खान‚ शमशेर मियां‚ गुडडू मियां‚ नैयर मियां‚ फुुरचन मियां हैं। इन सभी को आरा के एड़ीजे –नवम् मनोज कुमार की अदालत ने १० साल का सश्रम कारावास और तदुपरांत फांसी की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की गयी जिसे सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने १७ अगस्त को अपने एक फैसले में अपीलार्थियों को दोषमुक्त करते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। छह दोषियों की तरफ से वकील आशुतोष नाथ ने अपील दायर की थी। उपर्युक्त अपीलों में वरीय अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह‚ यश सिंह‚ विक्रम देव सिंह‚ राजकुमार सहाय‚ सर्वोतम कुमार‚ जैनुलाबदीन और अन्य वकीलों ने अपीलार्थियों का केस प्रस्तुत किया। सरकार की ओर से शशि बाला वर्मा और जेपी सिंह थे।
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