हफ्तों पहले संसद में एक सवाल के उत्तर में चौंका देने वाले आंकडे बताए गए। आंकडों के अनुसार २०१५ से २०२१ के बीच ९ लाख ३२ हजार २७६ भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोडी है। गृह मंत्रालय के अनुसार केवल साल २०२१ में ही १६३‚३७० लोगों ने भारत की नागरिकता छोडी। मंत्रालय के अनुसार इन भारतीयों ने ‘निजी वजहों’ से नागरिकता छोडने का फैसला किया। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बडे पैमाने में भारतीय देश छोड कर क्यों जा रहे हैंॽ
गौरतलब है कि कोरोना काल में बहुत सारे बडे उद्योगपति देश छोड कर कनाडा‚ अमेरिका‚ यूके‚ यूएई आदि देशों के साथ ही यूरोप में चले गए। इन धनकुबेरों के देश छोडने की एक बडी वजह कोरोना को बताया गया। हालांकि २०२२ में भी इन उद्योगपतियों का देश छोड कर अन्य देश में बसने का सिलसिला जारी है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छा संकेत नहीं। इसके साथ ही‚ अमीरों के देश से पलायन की मुख्य वजह टैक्स से जुडे सख्त नियम बताए गए हैं। पिछले महीने एक ब्रिटिश कम्पनी की रिपोर्ट ने दावा किया था कि भारत से लगभग ८‚००० करोडपति २०२२ में विदेशों में शिफ्ट हो सकते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ये उन देशों में जाना चाहते हैं‚ जहां का पासपोर्ट ज्यादा ताकतवर माना जाता है।
जो भी लोग भारत छोड विदेशों में नौकरी के सिलसिले में जाते हैं‚ उन्हें वहां पर मिलने वाली सुख–सुविधाएं इतना प्रभावित करती हैं कि वे लौट कर भारत नहीं आना चाहते। कुछ लोग तो वहां काम करते–करते अपना घर तक बसा लेते हैं। परिवार बढने के बाद जब उन्हें वहां की नागरिकता मिल जाती है‚ तो उसकी तुलना वे भारत में मिलने वाली सुविधाओं के साथ करते हैं। विदेशों में जा कर बसे भारतीय वहां पर काम करने के माहौल‚ बच्चों की पढाई‚ रहने के ढंग आदि को काफी सकारात्मक मान कर अपनी जन्मभूमि से नाता तोडने पर मजबूर होते हैं। यह पहली बार नहीं है‚ जब भारतीय लोग देश छोड कर विदेशों में बसने लगे हैं। ऐसा चलन तो दशकों से चल रहा है परंतु हाल के वर्षों में यह कुछ ज्यादा ही बढ गया है। भारतीयों को नागरिकता देने वाले देशों में अमेरिका ने सबसे ज्यादा नागरिकता दी है। आजादी के ७५ वर्षों में अगर बडे पैमाने पर भारतीय मूलभूत सुविधाओं की खोज में देश छोड कर जाने को मजबूर हो रहे हैं तो यह चिंता का विषय है। एक सर्वे के मुताबिक व्यापारी वर्ग का मानना है कि भारत में उन्हें अपने व्यापार या कारोबार की सुरक्षा की चिंता है। चिंता देश में विभिन्न करों और नियमों में आए दिन होने वाले बदलावों के कारण भी है। इसी असुरक्षा के कारण इन उद्योगपतियों को देश छोडने का निर्णय लेना पड रहा है। यदि भारत में उद्योगपतियों को उनके व्यापार की सुरक्षा की गारंटी मिल जाए तो शायद यह पलायन इतनी बडी संख्या में न हो। एक ओर तो व्यापारिक सुरक्षा कारण है‚ तो वहीं दूसरी ओर देश का कानून भी कुछ लोगों को नागरिकता छोडने पर मजबूर कर देता है। फिर आप चाहे उनको भगोडे कहें या हाईप्रोफाइल अपराधी‚ मेहुल चोकसी‚ विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे सैकडों उदाहरण मिल जाएंगे।
शिक्षा के क्षेत्र में देश में मूलभूत ढांचे का कमजोर होना भी देश से हो रहे ‘ब्रेन–ड्रेन’ का एक कारण है। देश का होनहार युवा तमाम कोशिशों के बावजूद देश में आरक्षण और अन्य वजहों के चलते अपने हुनर को निखार नहीं पाता। किसान का पुत्र अगर पढाई–लिखाई में तेज है‚ तो वह खुद को अच्छी शिक्षा देने की होड में लग जाता है। ऐसे में उसका किसान पिता भी उसे रोकता नहीं है‚ बल्कि जरूरत पडने पर अपनी जमीन गिरवी रख कर उसे पढाता है। परंतु आरक्षण कानून के चलते जब उसे अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती तो वह हताश हो जाता है। ऐसे में अगर देश का युवा विदेश में पढाई के लिए जाता है‚ और उसके हुनर की कद्र करते हुए वहीं पर अच्छी नौकरी भी मिल जाती है‚ तो वो वहीं बस जाता है। इस तरह के पलायन में भी काफी बढोतरी हुई है। यदि हम देश के युवा को अपने ही देश में अच्छी शिक्षा और नौकरी देना सुनिश्चित कर देते हैं‚ तो विदेशों की बडी से बडी कम्पनी अच्छे हुनर की तलाश में भारत में ही अपना ऑफिस खोलेगी। विदेशी कम्पनियों द्वारा निवेश होने पर न सिर्फ पढे–लिखे श्रेष्ठ युवाओं को‚ बल्कि हर वर्ग के लोगों को उस कम्पनी में नौकरी भी मिलेगी।
भारत में अभी तक एकल नागरिकता का ही प्रावधान है। कानून के जानकारों के मुताबिक दोहरी नागरिकता का प्रावधान भी पलायन का एक कारण है। भारत छोड कर जाने वाले लोगों की प्राथमिकता उन देशों में जा कर बसने की भी है जिन देशों में ऐसा कानून है। यदि कोई भी भारतीय अपनी नागरिकता और पासपोर्ट छोड देता है‚ तो उसे भारत दोहरी नागरिकता न दे कर ओसीआई कार्ड जारी कर देती है। इस कार्ड से उस व्यक्ति को भारत में आने के लिए वीजा नहीं लेना पडता। वो बेझिझक देश में आ सकता है। परंतु नागरिकता से जुडे उसके कई अधिकार रद्द हो जाते हैं। दुनिया के कई देशों में अर्जेन्टीना‚ इटली‚ पराग्वे और आयरलैंड ऐसे देश हैं‚ जहां पर दोहरी नागरिकता का प्रावधान है। भारत की नागरिकता छोडने के पीछे यह भी एक बडी वजह है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो देश छोडने वालों ने निजी कारणों को ही देश छोडने की वजह बताई‚ लेकिन यदि इस पर गौर किया जाए तो मूलभूत सुविधाओं की कमी भी देश छोडने का महत्वपूर्ण कारण दिखाई देती है। आजादी के ७५ वर्षों में कई सरकारें आइ और गइ लेकिन देश से पलायन करने वालों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। इस बात को मौजूदा सरकार और आने वाली सरकारों को गम्भीरता से लेना होगा नहीं तो देश से होने वाले ‘ब्रेन–ड्रेन’ पर लगाम नहीं लग पाएगी। यदि ऐसा होता है तो दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र वाले देश के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है।







