राज्य में बुनकरों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार हस्तकरघा उद्योग को बढावा देगी। हस्तकरघाओं को उन्नत करने के लिए उद्योग विभाग अलग से समेकित योजना लायेगा। यह बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कही। उन्होंने कहा कि नये डिजाइन के कपड़े तैयार करने के लिए लूम में नई फीटिंग आदि की व्यवस्था की जायेगी। इसके लिए सभी को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि विद्युतकरघा के उन्नयन के लिए नई योजना लायी जायेगी। नई तकनीक के उपयोग से बिजली की कम खपत होगी और उत्पादन भी अधिक होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हस्तकरघा के लिए कच्चा माल केंद्र की स्थापना की जायेगी‚ ताकि बुनकरों को आसानी से कच्चा माल उपलब्ध हो सके। बड़ी संख्या में महिलाएं इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। पुरुष भी काम कर रहे हैं। सभी लोगों को इसका फायदा मिलेगा। अधिक उत्पादन होने से दूसरे राज्यों में भी बने माल की आपूर्ति होगी। लोगों की आमदनी बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा‚ सरकार से जितना संभव होगा‚ आपलोगों का सहयोग करेगी‚ ताकि आपके साथ ही राज्य का भी विकास हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सदैव मंशा रही है कि हस्तकरघा उद्योग को बढ़ावा दिया जाये‚ ताकि बुनकरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। राज्य सरकार ने इसके लिए अनेक कदम उठाये हैं। प्रदेश के अस्पतालों में बुनकरों द्वारा तैयार की गयी सतरंगी चादर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सातों दिन अलग–अलग रंग के चादरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक सात लाख से अधिक सतरंगी चादरें बनायी गयी हैं। मुझे एक बार यात्रा के दौरान पता चला कि ये लोग हस्तकरघा पर चादर का उत्पादन नहीं करते हैं‚ क्योंकि उनके लूम का फ्रेम साइज छोटा है‚ जबकि चादर बनाने के लिए बड़े और चौड़े फ्रेम की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए बुनकरों को ६८ इंच के बड़े फ्रेमलूम को खरीदने के लिए राज्य सरकार द्वारा ९० प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इस राशि से बुनकर अपने पुराने हस्तकरघों को ६८ इंच बड़े फ्रेमलूम में परिवर्तित कर रहे हैं।
इससे वस निर्माण और अधिक होगा‚ उसकी मांग बढ़ेगी और बुनकरों को इसका लाभ मिलेगा। अब तक ३८१ बुनकरों ने इसका लाभ लिया है। मैं चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा बुनकर इसका लाभ उठायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनकरों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रही है‚ जिसके कारण उन्हें कच्चा माल खरीदने में परेशानी होती है। इसको देखते हुए बुनकरों को १० हजार रुपये की दर से कार्यशील पूंजी उपलब्ध करायी जा रही है। वर्ष २०१८–१९ से अब तक ६‚८२३ बुनकरों ने इसका लाभ लिया है। इस वर्ष से सभी इच्छुक बुनकरों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध करा दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष २००९ में विकास यात्रा के दौरान और वर्ष २०१२ में भागलपुर के नाथनगर में बुनकरों ने बताया कि बिजली का बिल अधिक रहने के कारण वे उसका भुगतान करने की स्थिति में नहीं रहते हैं। २१ हजार पावरलूम बुनकरों के साथ यह समस्या है। वर्ष २००६ से उनकी खपत की गई बिजली पर १.५० रुपये की दर से विद्युत अनुदान दिया और फरवरी २०१४ से इसे बढ़ाकर तीन रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया।
सीएम ने कहा कि मलबरी सिल्क के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा सहायता दी गई। खरीद में ५‚२४७ लोगों की सहायता दी गई। तसर सिल्क उत्पादन के लिए किसानों को तसर विकास योजना का लाभ दिया गया है‚ जिसमें तसर वृक्षारोपण‚ रेशम कीट पालन उपकरण एवं कीटपालन गृह निर्माण के लिए सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष राज्य में ४५२ लाख तसर कूकन का उत्पादन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हस्तकरघा एवं टेक्सटाइल क्षेत्र के विकास के लिए टेक्सटाइल एवं लेदर पॉलिसी २०२२ लायी गयी‚ इससे वस्त्र एवं चमड़ा प्रक्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा‚ ‘हमलोग चाहते हैं कि सरकारी गेस्ट हाउस एवं सरकारी कार्यालयों में बुनकरों द्वारा निर्मित हैंडलूम और खादी से बने चादर‚ परदा‚ तकिया के खोल की खरीद की जाये। चिकित्सकों और मरीजों के लिए पोशाक खरीदने का भी निर्णय लिया गया है।
कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद‚ उप मुख्यमंत्री रेणु देवी‚ उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन‚ स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय‚ अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान‚ मुख्य सचिव आमिर सुबहानी‚ उद्योग विभाग के प्रधान सचिव संदीप पौ्ड्रिरक एवं बिश्कोटेक्स के अध्यक्ष मो. नकीब अंसारी ने भी संबोधित किया। ॥ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार‚ स्वास्थ्य सह पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत‚ वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सह मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ‚ हस्तकरघा एवं रेशम उद्योग विभाग के निदेशक विवेक रंजन मौर्य‚ सिल्क विकास फोरम के संयोजक एवं हैंडलूम उत्पाद के प्रतिष्ठित निर्यातक जनाब जियाऊल अंसारी एवं बुनकर सहयोग समिति से जुड़े बुनकर उपस्थित थे‚ जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न जिलों से अधिकारी एवं हस्तकरघा तथा हस्तशिल्प के क्षेा में कार्य करनेवाले बुनकर जुड़े हुए थे।







