काग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की राष्ट्रपति को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी न केवल शर्मनाक व दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को तार–तार करने सरीखी है। अधीर की गुस्ताखी इस कारण अक्षम्य है क्योंकि वह वरिष्ठ सांसद हैं और लोक सभा में कांग्रेस के नेता विपक्ष भी हैं। हालांकि विवाद बढ़ने पर अधीर ने माफी मांग ली‚ किंतु जबान से निकली अनर्गल टिप्पणी के चलते कांग्रेस और सत्ता पक्ष के बीच की खाई को और चौड़़ा कर दिया। सदन को शुरू हुए हफ्ते भर से ज्यादा होने को है‚ मगर कामकाज के मामले में पूरा हफ्ता फिसड्ड़ी साबित हुआ है। अधीर ने अपने बयान पर सफाई देते हुए भले खुद को बंग्लाभाषी होने के कारण शब्दों की फिसलन का सहारा लिया हो‚ मगर उनकी सफाई से सत्ता पक्ष कतई संतुष्ट नहीं है। अधीर पहले भी कई बार अपने विवादित बयानों के चलते विभिन्न पार्टियों के निशाने पर रहे हैं। अगर देश के सर्वोच्च पद पर बैठीं शख्सियत को लेकर किसी वरिष्ठ नेता की जबान मर्यादित नहीं है तोे उन्हें इसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए। अब सत्ता पक्ष इस मामले में क्या कुछ करेगी‚ यह तो आने वाला वक्त बताएगा किंतु महिला आयोग समेत कई राज्यों में अधीर के खिलाफ मामले दर्ज हो चुके हैं जो अधीर के साथ ही कांग्रेस की भी परेशानी बढ़ाएंगे। वैसे देखा जाए तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नाम जब से भाजपा ने प्रस्तावित किया‚ उनके खिलाफ भद्दी‚ अनैतिक और सतही बयानबाजी की जाने लगी थीं। बिना इस बात और तथ्य को जाने–समझे कि देश में पहली बार कोई आदिवासी महिला इस सम्माननीय और प्रतिष्ठित पद पर विराजमान होने जा रही है। निश्चित तौर पर अधीर की धीर खोती जबान से कांग्रेस ने सदन में महंगाई व अन्य महत्वपूर्ण मामले पर सत्ता पक्ष को घेरने का अच्छा मौका खो दिया है। अलबत्ता यह भी आश्चर्य की बात है कि अधीर के राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहने के विवाद में सत्ता पक्ष ने सोनिया गांधी को घेरे में ले लिया। अधीर की इस अशोभनीय टिप्पणी के पीछे सोनिया गांधी का हाथ होने का सत्ता पक्ष का आरोप हास्यास्पद ही कहा जाएगा। कुल मिलाकर इस प्रकरण से सदन का बेशकीमती वक्त बर्बाद जरूर हुआ है और इसकी भरपाई नहीं हो सकती है। होना तो यही चाहिए था कि अधीर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते और उनकी पार्टी की तरफ से भी उनके बयान की भर्त्सना की जाती। ऐसे मौकों पर दलगत भावना से ऊपर उठने में ही समझदारी है। तभी लोकतंत्र की मजबूत बनी रहेगी।
धरना-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की जगह कोई और स्थान हो?
सुप्रीम कोर्ट में आज दाखिल एक याचिका में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का मुद्दा भी उठ गया. दरअसल, याचिका में अपील...







