संसद के मानसून सत्र में सोमवार को सरकार और विपक्ष के बीच टकराव इस कदर बढ़ गया कि सदन के भीतर नारेबाजी कर रहे और तख्तियां लहरा रहे कांग्रेस के चार सदस्यों को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूरे मानसून सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया। निलंबित किए गए सदस्य मणिक्कम टैगोर‚ राम्या हरिदास‚ ज्योतिमणि और टीएन प्रतापन पूरे मानसून सत्र के दौरान लोक सभा की कार्यवाही में भाग नहीं ले सकेंगे। दरअसल‚ मानसून सत्र लगातार बाधित चल रहा है। पिछले हफ्ते भी भारी हंगामे के चलते सदन में नाममात्र का कामकाज हो सका था। सोमवार को राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के बाद संसद की कार्यवाही शुरू होते ही लोक सभा में विपक्ष महंगाई और जीएसटी पर चर्चा कराए जाने के लिए अड़़ गया जब नहीं सुनी गई तो विपक्षी दलों के सदस्यों ने जोरदार हंगामा करते हुए तख्तियां लहराइ। इस पर लोक सभा अध्यक्ष ने उन्हें कड़़ी चेतावनी दी‚ लेकिन जब वे नहीं माने तो पूरे सत्र से निलंबन जैसी कड़़ी कार्रवाई की गई। संसद के उच्च सदन में भी विपक्ष ने महंगाई पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया जिस पर उच्च सदन को शाम चार बजे तक स्थगित करना पड़़ा। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर फिर हंगामा होने लगा तो उच्च सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। कांग्रेेस के चार लोस सदस्यों के निलंबन को उचित ठहराते हुए संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार कहती आ रही है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कोविड–१९ से उबरते ही महंगाई के विषय पर संसद में चर्चा को तैयार है‚ लेकिन कांग्रेस सदस्यों का आचरण स्वीकार्य नहीं है। लोक सभा अध्यक्ष के आसन के सामने तख्तियां दिखाना विरोध प्रदर्शन का तरीका नहीं है। लोक सभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने निलंबन को गलत बताते हुए कहा कि सरकार महंगाई पर चर्चा कराने से भाग रही है। सदन में चर्चा की मांग करना हमारा अधिकार है। अब संकेत हैं कि विपक्ष निलंबन के मुद्दे को लेकर सरकार पर और भी हमलावर हो सकता है। बहरहाल‚ विपक्ष का किसी विषय पर चर्चा को लेकर अडि़़यल रुख अपनाना निंदनीय है‚ तो सरकार भी अपना दायित्व अनदेखा नहीं कर सकती। सरकार का दायित्व है कि दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से चले। कार्यवाही बाधित होने से काफी आर्थिक नुकसान होता है‚ जो किसी भी सूरत में न तो उचित है‚ न ही लोकतांत्रिक तकाजे के अनुरूप।







