राजधानी दिल्ली में मंकीपॉक्स की दस्तक निश्चित तौर पर चिंता का सबब है। ड़रने की बात इसलिए है क्योंकि एक दिन पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बीमारी को वैश्विक स्वास्थ्य इमरजेंसी घोषित किया है। इससे पहले केरल में तीन मामले दर्ज किए जा चुके हैं‚ लेकिन दिल्ली में इसका आना अब हर किसी को ड़रा रहा है क्योंकि यह बीमारी इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकती है। संक्रमिक व्यक्ति के खांसने–छींकने से भी यह फैल सकता है। यहां तक कि संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों से भी फैल सकता है। आहिस्ता–आहिस्ता यह विषाणु विश्व के ७५ देशों में अपने पैर पसार चुका है। दुनियाभर में मंकीपॉक्स के कुल १६‚ ८३६ मामले सामने आए हैं‚ जबकि अब तक इस बीमारी से ५ लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में जो चार मामले अब तक सामने आए हैं‚ उनमें केरल के तीनों संक्रमित विदेश घूमकर आए थे‚ जबकि दिल्ली का संक्रमित शख्स हिमाचल प्रदेश के मनाली से होकर आया था। स्वाभाविक है कि हिमाचल प्रदेश समेत उन सभी राज्यों में निगरानी बढ़ानी होगी‚ जहां विदेशी पर्यटक ज्यादा संख्या में आते हैं। कोविड़ के कहर बरपाने के कुछ ही महीने बाद मंकीपॉक्स की दस्तक को हल्के में लेने की भूल सरकार को नहीं करनी होगी। कोरोना की दूसरी लहर की त्रासदी कभी न भूलने वाला वाकया है। ऐसे में सरकार को उन दिशा–निर्देशों की घोषणा जल्द–से–जल्द करनी चाहिए। हालांकि केंद्र सरकार ने इस बाबत कदम उठाए हैं और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (ड़ीजीएचएस) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई है। वहीं दिल्ली सरकार ने भी अपने स्तर पर अस्पतालों में चाक–चौबंद व्यवस्था की है। इन सब तैयारियों के अलावा सरकार को इस बीमारी की जांच के लिए प्रयोगशालाओं की संख्या भी बढ़ानी होगी। अभी फिलहाल जांच के लिए देशभर में १५ प्रयोगशाला संचालित है। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संंस्थान पुणे इन प्रयोगशालाओं का नोड़ल सेंटर है। इसके अलावा सरकार को उन देशों पर कड़़ी नजर रखनी होगी‚ जहां मंकीपॉक्स के मामले सबसे ज्यादा हैं। मसलन; स्पेन आने–जाने वालों पर विशेष निगाह रखनी होगी क्योंकि यहां औसतन हफ्ते भर में ५०० से ज्यादा मामले दर्ज हो रहे हैं। अमेरिका‚ जर्मनी‚ ब्रिटेन‚ फ्रांस आदि यूरोपीय देशों में भी तेजी से मामले बढ़ रहे हैं। लिहाजा हमें नजर बनाए रखनी होगी। शुरुआत में सख्ती बरतने से हम आने वाले संकट से आसानी से लड सकेंगे। थोड़़ी सी लापरवाही से दुश्वारियां कई गुना बढ़ जाएंगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मंकीपॉक्स को “ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी” घोषित करने के बाद, भारत में अलर्ट जारी किया गया है। भारत में अब तक मंकीपॉक्स वायरस के जितने मामले आए हैं, वह हैरान करने वाली है, कि दिल्ली में जिस व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है, उसका कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है।
मंकीपॉक्स वायरस तेजी से फैल रहा है, यह वायरस अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, समेत दुनिया के 75 देशों में बड़ी तेजी से फैला है। मौजूदा आकड़ों के अनुसार दुनिया भर में मंकीपॉक्स के 16 हजार से अधिक मामले हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार समलैंगिकता से यह बीमारी अधिक तेजी से फैलते हुए देखा जा रहा है। इसको देखते हुए कई स्वास्थ्य एजेंसियों ने समलैंगिक पुरुषों को सचेत भी किया है। देखा जाए तो मंकीपॉक्स एक ऑर्थोपॉक्स वायरस संक्रमण है, जो चेचक (चिकन पॉक्स) के समान दिखता है।
बताया जाता है कि यह बीमारी सबसे पहले वर्ष 1958 में बंदरों में दिखाई दी थी। बंदरों में दिखाई देने के कारण इसका नाम “मंकीपॉक्स” रखा गया है। मंकीपॉक्स का सबसे पहला मामला वर्ष 1970 में एक युवा में देखा गया था।
बिहार के सर्विलांस अफसर डॉ रणजीत कुमार के अनुसार, राज्य में अभी तक मंकीपॉक्स के संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद देश में फैलते संक्रमण को देखते हुए सभी जिलों को इससे संबंधित दिशा निर्देश जारी किया गया है। सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को निदेश दिया गया है कि वह आशा और एएनएम को इस बीमारी के बारे में जानकारी दें।
मंकीपॉक्स के लक्षण भी आम लक्षणों की तरह है शुरु में बुखार, जुकाम, सिर दर्द, बदन दर्द, सूजन, कमर दर्द, शरीर की मांसपेशियों में दर्द शामिल रहता है। लेकिन मुख्य रूप से इस बीमारी में शरीर पर लाल-लाल दाने (रेसेस) होते है। ज्यादातर यह दाने हथेलियों और पैरों के तलवों पर होते है। मंकीपॉक्स के रोगियों में यह देखा जा रहा है कि संक्रमण अपने आप 14 से 21 दिन में खत्म हो जाता है।
भारत में अब तक 3 मामलों में मंकीपॉक्स का वायरस सेक्सुअल इंटरकोर्स के जरिए पहुंचा है। इनमें से 2 मामले केरल में और एक मामले दिल्ली के है।
मंकीपॉक्स का वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, त्वचा पर किसी कटे या आंख नाक या मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है। यह संक्रमण सेक्स के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति, संक्रमित जानवर बंदर, चूहा, गिलहरी आदि से भी फैलता है।
मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित लोगों में संक्रमण घातक दिखाई नहीं दे रहा है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार इस संक्रमण से हर 10वें व्यक्ति की मौत हो सकती है। छोटे बच्चों में और मरीज के स्वास्थ्य और उसकी जटिलताओं पर भी यह निर्भर करता है कि संक्रमण की गंभीरता कितनी है। ऐसे देखा जा रहा है कि मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में 2 से 4 हफ्ते बाद लक्षण धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। यह संक्रमण 40 से 50 साल से कम उम्र के लोगों में ज्यादा फैल रहा है।
भारत में केन्द्र सरकार अलर्ट है। सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को अंतरराष्ट्रीय यात्री की स्क्रीनिंग करने का निर्देश दिया गया है, ताकि मंकीपॉक्स के फैलने के खतरे को कम किया जा सके।
बिहार में मंकीपॉक्स का पहला संदिग्ध मरीज मिला है। महिला पटना सिटी के गुडहट्टा एरिया की निवासी है। PMCH की माइक्रो वायरोलॉजी विभाग की टीम सैंपल लेने मरीज के घर पहुंची है। महिला में मंकीपॉक्स के सभी लक्षण मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग इस केस को संदिग्ध मान रहा है। इसलिए इसकी जांच कराई जा रही है। महिला की ट्रैवल हिस्ट्री का भी अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है।
डॉक्टर के के राय ने बताया कि जांच के लिए 4 लोगों की टीम बनाई गई है। मरीज के सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIB ) पुणे भेजे जाएंगे। जहां उसकी जांच की जाएगी। महिला अभी कहां रहना चाहती है वो उसपर निर्भर है। होम आइसोलेशन की व्यवस्था ठीक होगी तो उसे घर पर ही रखा जाएगा। अगर व्यवस्थाएं नहीं होगी तो अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा।
जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना :







