लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा बिहार में भविष्य की रणनीति तय करने जा रही है। इसी क्रम में चार दिवसीय दौरे पर 28 से 31 जुलाई तक भाजपा के सात राष्ट्रीय मोर्चों के 750 पदाधिकारी बिहार दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान दो दिन गांव-गांव में जाएंगे और सरकार व संगठन के कामकाज की पड़ताल करेंगे। भाजपा ने मोर्चा के पदाधिकारियों को 11 बिंदुओं पर काम करने का टास्क सौंपा है। इसमें किसान, महिला, युवा, एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों को दो दिनों तक गांवों में प्रवास करना है।
सांसद, विधायकों के मिली जिम्मेदारी
इसके लिए पार्टी ने प्रवासी पदाधिकारियों के आवाभगत की जिम्मेदारी बकयादा सभी सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों को सौंपी गई है। वहीं, गांव-गांव ले जाने की जिम्मेदारी बिहार के अलग-अलग मोर्चों के पदाधिकारियों को दी गई है। सभी मोर्चों के देशभर के प्रमुख नेता राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर 28 और 29 जुलाई को प्रवास कर विभिन्न स्तर की बैठकें और संवाद कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
प्रति मोर्चे के पास 30 से 35 सीटों की जिम्मेदारी
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनाव के समय अगर किसी सहयोगी दल के साथ खटपट की नौबत आती है तो पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतर सके। सभी 243 सीटों को पार्टी ने अपने विभिन्न मोर्चों में बांटा है। इसी उद्देश्य से एक मोर्चा को 30 से 35 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई है।
11 बिंदुओं पर करना है काम
मोर्चों के पदाधिकारियों को संबंधित विधानसभा क्षेत्र के सभी मंडलों के संबंधित मोर्चों के साथ बैठक करना है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लाभार्थी से जनसंपर्क करना है। इंटरनेट मीडिया से संबंधित जागरूकता को लेकर बैठक करनी है। त्रिस्तरीय पंचायतों और नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों से संपर्क करना है। सामाजिक संवाद करना है। प्रभावी मतदाता से संपर्क करना है। बूथ स्तरीय बैठक करनी है। विकास तीर्थ (केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के विकास योजनाओं का अवलोकन) करना है। स्थानीय महत्वपूर्ण स्थलों पर जाना है और भाजपा का सदस्यता ग्रहण कराना है।







