केंद्रीय मंत्री के पद से आरसीपी सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. मगर इसके साथ ही ये सवाल उठने लगे हैं कि अब आगे आरसीपी सिंह का सियासी भविष्य क्या होगा? क्या आरसीपी सिंह जदयू में रहकर सियासी पारी आगे बढ़ाएंगे या फिर JDU को छोड़ किसी दूसरी पार्टी का दामन थामेंगे? राजनीति के जानकार बताते हैं कि आरसीपी सिंह के लिए दूसरा विकल्प अधिक मुफीद नजर आ रहा है. इस बीच जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने जो बात कही है इससे भी यही संकेत मिल रहा है कि आरसीपी सिंह के लिए जदयू ने स्पष्ट संदेश दे दिया है.
JDU के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार से न्यूज 18 ने जब आरसीपी सिंह के लिए JDU में सियासी भविष्य को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, JDU कार्यकर्ताओं की पार्टी है और हर कार्यकर्ता JDU को आगे बढ़ाने की कवायद में दिन रात लगा हुआ है. अब आरसीपी सिंह अपनी भूमिका पार्टी में क्या तय करते हैं, यह उन्हें तय करना है. उन्हें यह तय करना है कि वो कार्यकर्ता की तरह नेता और नेतृत्व के प्रति निष्ठा को कायम रखते हुए पार्टी में अपनी भूमिका स्वयं क्या देखते हैं; और पार्टी को कैसे आगे बढ़ाते हैं.
राजनीति के जानकारों की नजर में नीरज कुमार के बयान से साफ है कि JDU के शीर्ष नेतृत्व का आरसीपी सिंह को लेकर जो रुख है, वो साफ साफ इशारा करता है कि आरसीपी सिंह के लिए JDU में रहकर राजनीति करना आसान नहीं होगा. ऐसे में RCP सिंह JDU में रहकर राजनीति को आगे बढ़ाएंगे इसकी उम्मीद कम दिखती है.
दूसरी ओर भाजपा के साथ आरसीपी सिंह की नजदीकी साफ दिखती है. जब आरसीपी सिंह का 6 जुलाई को जन्मदिन था तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर कई केंद्रीय मंत्रियों ने जन्मदिन की बधाई दी, लेकिन JDU से किसी ने भी बधाई नहीं दी. सबसे विशेष यह भी कि प्रधानमंत्री मोदी ने आरसीपी सिंह के काम की तारीफ की थी.
हालांकि, राजनीति के जानकारों के अनुसुार, इतना कुछ होने के बाद भी भाजपा आरसीपी सिंह को अपने साथ लेने की जल्दबाजी नहीं दिखाने वाली है क्योंकि भाजपा को भी पता है कि इससे बिहार में भाजपा और JDU के संबंध पर सीधा असर पड़ सकता है. जाहिर है भाजपा ऐसा फिलहाल नहीं चाहेगी क्योंकि भाजपा और जदयू बिहार की सत्ता में साझीदार है.
राजनीति के जानकार इस मामले में कुछ और भी स्थिति देखते हैं. दरअसल, आरसीपी सिंह के लिए अपनी अलग पार्टी बनाकर आगे की राजनीति करने का भी विकल्प बचता है, मगर यह इतना आसान नहीं होगा. इसके पीछे दो बड़ी वजह है. पहला तो आरसीपी सिंह को कार्यकर्ताओं और नेताओं का उतना सपोर्ट नहीं दिख रहा है. दूसरा यह भी कि वे जिस जाति से आते हैं उसी जाति से नीतीश कुमार भी आते हैं. नीतीश कुमार के रहते इस जाति की सहानुभूति आरसीपी सिंह को कितनी मिलेगी यह देखने वाली बात होगी.
आरसीपी सिंह के नजदीकी ने अपना नाम सामने नहीं लाने की शर्त पर बताया कि आरसीपी सिंह केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार आकर थोड़ा इंतज़ार करेंगे और बिहार के सियासी नब्ज को पहचानने की कोशिश करेंगे. इसके साथ ही वे सही समय का इंतजार करेंगे ताकि सही समय पर अपनी सियासत को आगे बढ़ाया जा सके. बहरहाल आरसीपी सिंह के लिए आगे के विकल्पों के बात के साथ ही अभी भी दुविधापूर्ण स्थिति है. हालांकि, आने वाले वक्त में यह देखना दिलचस्प होगा कि आरसीपी सिंह का सियासी रुख क्या रहता है.







