भारत में आम तौर पर मोटरसाइकिल चलाना या बाइक राइडिंग करना ज्यादातर पुरुषों का खेल ही माना जाता था। लेकिन गुरु ग्राम की सुपर्णा सरकार ऐसी लड़की हैं, जिन्होंने अपनी ‘स्टार एकेडमी ऑफ बाइक ट्रेनिंग’ के माध्यम से पुरुषों की इस दुनिया में अपनी पहचान बना ली है।
इसके माध्यम से सुपर्णा ने कई महिलाओं को बाइक राइडिंग की ट्रेनिंग दे कर पुरुषों को अच्छी टक्कर दी है। सुपर्णा ने यह दिखा दिया कि कोई भी काम सिर्फ पुरु षों के लिए ही नीयत हो ऐसा नहीं है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ अपने शौक को सुपर्णा ने जिंदा रखा और फिर उसी को अपना पेशा बना लिया।
भारत की मोटरसाइकिलों के सभी ब्रांडों में ‘मर्द बाइक’ मानी जाने वाली ‘रॉयल एनफील्ड या बुलेट’ को चलाना कभी-कभी मदरे के बस की बात भी नहीं होती। लेकिन सुपर्णा ऐसी दो रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिलों की मालकिन हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने इन मोटरसाइकिलों पर होने वाले ऑफ-रोडिंग और डर्ट बाइकिंग इवेंट्स में भी हिस्सा लिया और पहला स्थान भी हासिल किया। 2019 में उन्होंने महिलाओं के बीच हुई ‘द आगरा ताज बाइक रैली’ में भी पहला स्थान हासिल किया। जैसे इतना ही जलवा काफी नहीं था, तो जब सुपर्णा की शादी हुई तो उन्होंने बाइक पर सवार होकर मेहमानों के सामने शादी में शानदार एंट्री की थी। ऐसा किसी ने पहले न कभी देखा था, न सुना था। कहावत है न कि ‘जो रु चे सो पचे’। यदि आपको एक आलीशान दफ्तर में एक अच्छे पद पर बैठा दिया जाए और आपका मन कुछ और करने की सोचे तो क्या होगा? न तो आप जो कर रहे हैं, वो अच्छे से कर पाएंगे और न ही अपने सपने को सच कर पाएंगे। इसलिए अपने कॅरियर की शुरुआत एक आईटी कंपनी से करने वाली सुपर्णा ने बहुत जल्द यह सोच लिया कि वो बाइक राइडिंग को ही अपना पेशा बनाएंगी। सुपर्णा कहती हैं कि 2018 में जब उन्हें अपने ही कॉलेज में एक व्याख्यान देने के लिए बुलाया गया था तो उन्होंने यह इच्छा जाहिर की कि वे सुरक्षित बाइक राइडिंग की ट्रेनर बनना चाहती हैं।
इरादे की पक्की सुपर्णा ने कुछ ही महीनों में बाइक राइडिंग ट्रेनर की नौकरी करना शुरू कर दी। वहां उन्होंने करीब 18 महीने काम किया। जब कोविड महामारी के कारण वे भी औरों की तरह घर की चारदीवारी में सिमट कर रह गई तो भी उन्होंने अपने इस इरादे को जिंदा रखा। सुपर्णा ने जब अहसास किया कि वे खुद एक सुरक्षित बाइक राइडर हैं, तो क्यों न इस कला को सबके साथ साझा किया जाए। खासकर महिलाओं को इस कला में पारंगत करने के इरादे से उन्होंने कोविड महामारी के दौरान अपनी ही एक एकेडमी बनाई। आज इस एकेडमी में न सिर्फ महिलाएं, बल्कि पुरुष भी सुरक्षित बाइक राइडिंग सीखने आते हैं। जिन लोगों ने सुपर्णा को इस एकेडमी में प्रशिक्षण देते हुए देखा हैं, वो कहते हैं कि सुपर्णा न सिर्फ बाइक राइडिंग सिखाती हैं, बल्कि इसकी बारीकियों से भी अपने विद्यार्थियों को परिचित कराती हैं। वो हरेक सीखने वाले को न सिर्फ पूरा समय देती हैं, बल्कि उनसे उनकी समस्या को समझ कर उसका समाधान भी करती हैं। देश भर की युवतियों के लिए सुपर्णा का जीवन सचमुच बहुत प्रेरणादायक है, जिसने रूढ़ियों को तोड़ कर वो कर दिखाया है, जो हर मर्द आसानी से हिम्मत नहीं करेगा। ऐसी लगन से ही अपने मकसद को हासिल किया जाता है।
प्राय: लड़कियां लोक निंदा के भय से संकोच कर जाती हैं, या उनके परिवारजन प्रोत्साहित नहीं करते कि लोग क्या कहेंगे? पर इसकी परवाह किए बिना जब सुपर्णा ने मल्टीनेशनल कंपनी की अपनी पहली नौकरी बदली तो उन्हें मोटरसाइकिल की एक कंपनी में राइड आयोजन की मार्केटिंग का काम मिला। यहां उन्होंने अपने इस इरादे को पंख लगा दिए। इसी जॉब के लिए उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री वाली नौकरी छोड़ दी थी। यह सोच कर कि डिग्री तो उनके पास है ही और इसी आधार पर नौकरी भी दोबारा मिल जाएगी लेकिन बाइक राइडिंग के अपने जज्बे को जिंदा रखने का यही एक मौका था। फौजी की इस बेटी ने दृढ़ संकल्प लेकर बाइक राइडिंग के समुद्र में छलांग लगा ही डाली और इस जगत में अपने लिए एक अलग और अच्छा स्थान भी हासिल किया।
सुपर्णा के अनुसार बाइक की इस कंपनी में काम करने से पहले वो अन्य महिला बाइकर्स की तरह सिर्फ मोटरसाइकिल को स्टार्ट कर उसकी सवारी करती थीं लेकिन यहां आकर उन्हें सही मायने में पता चला मोटरसाइकिल को सही ढंग से कैसे कंट्रोल किया जाता है। इसके बाद उन्होंने अहसास किया कि वो शायद अकेली महिला हैं, जिनके पास ये सब जानकारी हैं। इसी इरादे से उन्होंने ज्ञान बांटना शुरू किया और आज वे एक बाइक राइडिंग ट्रेनर एकेडमी सफलता से चलाती हैं। जहां चाह वहां राह, सुपर्णा इस बात का जीता जागता उदाहरण हैं, जो देश की कई बेटियों को प्रेरणा देती हैं।







