पूरे देश समेत पटना जिले में भी १९ तरह के सिंगल यूज वाले प्लास्टिक उत्पादों पर १ जुलाई से प्रतिबंध लागू हो जाएगा। पटना नगर निगम की टीम दुकानों एवं विभिन्न जगहों पर इसकी जांच करेगी। अंचल स्तर पर टास्क फोर्स‚ धावा दल की नियुक्ति पूर्व में ही की जा चुकी है। १ जुलाई से सभी अलर्ट मोड में रहेंगे। अपर नगर आयुक्त शीला ईरानी औचक निरीक्षण कर इसकी जांच करेंगी। खरीद–बिक्री या इस्तेमाल करते पकड़े़ जाने पर पांच सौ से एक लाख रुपये तक जुर्माना भरना पड़े़गा। पांच वर्ष के लिए जेल भी जाना पड़े़गा।
इन वस्तुओं पर लागू होगा प्रतिबंध
प्लास्टिक स्टिक वाले इयरबड‚ गुब्बारे में लगने वाले प्लास्टिक स्टिक‚ प्लास्टिक के झंडे‚ कैंडी स्टिक‚ आइसक्रीम स्टिक‚ सजावट में काम आने वाले थर्मोकोल‚ प्लास्टिक कप‚ प्लेट‚ गिलास‚ कांटा‚ चम्मच‚ चाकू‚ स्ट्र‚ ट्रे‚ मिठाई के डिब्बों पर लगने जाने वाली प्लास्टिक‚ प्लास्टिक के निमंत्रण पत्र‚ १०० माइक्रोन से कम मोटाई वाले पीवीसी बैनर आदि पर यह प्रतिबंध लागू होगा। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू होने के बाद इसका उत्पादन‚ आयात‚ भंडारण‚ बिक्री को अपराध माना जायेगा और ऐसा करने पर जुर्माना और जेल हो सकती है। गौरतलब है कि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने अगस्त–२०२१ में ही सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर बैन लगाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। करीब एक वर्ष का समय इस उद्योग से जुडे लोगों को दिया गया था‚ ताकि वे अपने स्टॉक खत्म कर लें और इसके विकल्प का इस्तेमाल करने लगे। सिंगल यूज प्लास्टिक न तो आसानी से नष्ट होता है‚ न ही रिसाइकिल होता है। इस प्लास्टिक के नैनो कण घुल कर पानी और भूमि को प्रदूषित करते हैं इससे भूमि बंजर होती है। यह जलीय जीवों को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं‚ साथ ही नाले के जाम होने का भी कारण हैं। शहरों में जलजमाव का भी एक बडा कारण सिंगल यूज प्लास्टिक है।
एक जुलाई–२०२२ से प्रतिबंध लगने के बाद सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने पर आम लोगों पर ५०० से दो हजार और औद्योगिक स्तर पर इसका उत्पादन‚ आयात‚ भंडारण और बिक्री करने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम १९८६ की धारा १५ के तहत दंड का प्रावधान होगा। ऐसे लोगों पर २० हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पांच वर्ष तक की जेल या दोनों की सजा दी जा सकती है।
उत्पादों को सीज करना‚ पर्यावरण क्षति को लेकर जुर्माना लगाना‚ इनके उत्पादन से जुडे उद्योग को बंद करने जैसी कार्रवाई शामिल है। पटना नगर निगम द्वारा लोगों से प्लास्टिक के बजाय इको–फ्रेंडली विकल्प चुनने का अनुरोध किया है।
उदाहरण के लिए प्लास्टिक की थैलियों के बजाय कपडे‚ कॉटन एवं जूट की थैलियों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। इसको लेकर जारी सर्कुलर में कहा गया है‚ प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपडों के बने थैलों का इस्तेमाल किया जा सकता है।







