उदयपुर में तालिबानी बर्बरता के तार पाकिस्तान से जुड़ने की खबर कहीं से भी अप्रत्याशित नहीं कही जा सकती है। भारत में आतंकवाद को पालने-पोसने का काम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान बड़ी बेशर्मी से अंजाम देता रहा है। अब तक की तफ्तीश में यह ज्ञात हुआ है कि कन्हैयालाल की तालिबानी हत्या के आरोपित रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन दावत-ए-इस्लामी से जुड़े हैं। गौस 2014 में कराची में आतंकी संगठन के शिविर में गया था। वैसे भी भारत में आतंकवाद को बढ़ाने और खूनखराबा करने में पाकिस्तान शुरू से आगे रहा है।
अपने यहां के भयानक मंजर से आंख चुराकर पाकिस्तान दूसरों का घर उजाड़ने का जो षडय़ंत्र रच रहा है, उसकी कीमत उसे आगे चलकर भुगतनी ही होगी। हालांकि इस मामले में अपनी किरकरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत से परेशान पाकिस्तान ने रियाज और गौस के दावत-ए-इस्लामी से संबंध होने के दावे को खारिज कर दिया, किंतु पूरी दुनिया इस बात को जानती है कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का रवैया किस कदर लचर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की लानत-मलामत करने से काम नहीं चलेगा। पाकिस्तान को अब ज्यादा कड़वी दवा खिलानी होगी। यह भी देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के इस कृत्य पर कितनी घेराबंदी की जाती है। भारत ने बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की आतंकवाद में संलिप्तता का पर्दाफाश किया है। कई बार उसे अमेरिका समेत बाकी देशों ने डांट भी पिलाई है। यहां तक कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया है। इन सबके बावजूद पाकिस्तान ने नहीं सुधरने की कसम खा रखी है।
उदयपुर की घटना इसलिए ज्यादा संजीदा है क्योंकि ऐसी वारदात इससे पहले अंजाम नहीं दी गई। दूसरा अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि रियाज और गौस यहां स्लीपर सेल बनाने की साजिश रच रहे थे। स्वाभाविक तौर पर यह हमारी खुफिया एजेंसी की नाकामी ही कही जाएगी। स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। जब कन्हैया को जान से मारने की धमकी मिली तो पुलिस ने शिथिलता दिखाई। जाहिर है पुलिस की सुस्ती का फायदा इन दहशतगदरे ने उठाया। अब भी वक्त है, ऐसी वारदात को अंजाम देने वालों और साजिश रचने वालों को ऐसी सजा मिले जो आने वाले वक्त के लिए नजीर साबित हो।







