तीनों सेनाओं में भर्ती की नई योजना ‘अग्निपथ’, जिसके तहत भर्ती होने वालों को ‘अग्निवीर’ नाम दिया जाएगा, की घोषणा के साथ ही भड़का युवाओं का गुस्सा भले ही अब ठंडा पड़ गया है, लेकिन अभी भी कुछ शंकाएं उन्हें व्यथित किए हुए हैं।
बताया गया है कि योजना के तहत भर्ती होने वालों में से 25 फीसद को चार साल की सेवा के उपरांत सेना में नियमित कर लिया जाएगा। बाकी के 75 फीसद रिटायर कर दिए जाएंगे। युवाओं के आक्रोश और हिंसा के बाद सरकार को एक के बाद एक स्पष्टीकरण देने पड़े। लेकिन अभी भी अनेक आशंकाएं और संशय उनके मन में उमड़ रहे हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिर से स्पष्ट किया है कि इस योजना को लेकर युवाओं को बेवजह संशय नहीं पालना चाहिए क्योंकि यह योजना काफी सोच-विचार के बाद तैयार की गई है। शनिवार को एक टेलीविजन चैनल के सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस योजना की बाबत युवाओं को बेवजह की शंका नहीं करनी चाहिए। सिंह ने संकल्प जताया कि सरकार इस योजना की नियमित समीक्षा करेगी और जहां कहीं भी खामियां दिखेंगी उन्हें दूर किया जाएगा।
रक्षा मंत्री द्वारा अग्निपथ योजना की घोषणा के साथ ही देश के अनेक राज्यों खासकर उत्तर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में सेना में भर्ती के होने के इच्छुक युवाओं का गुस्सा भड़क गया था। कई जगहों पर तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की गई। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। विरोधी दलों ने भी आग में घी डालने का काम किया। किसी भी नई योजना या कार्यक्रम की घोषणा करने से पहले लोगों को उसके गुण-दोष समझा दिए जाएं तो इस प्रकार की विस्फोटक प्रतिक्रिया से बचा जा सकता है। मोदी सरकार ने पहले भी जो योजनाएं लागू की हैं, उनके लिए जरूरी माहौल नहीं बनाया।
इससे लोग शुरू-शुरू में कुछ समझ न सके और उन्होंने तीव्र प्रतिक्रिया जताई। सर्वाधिक चिंताजनक बात यह है कि लोग हिंसा पर उतारू हो जाते हैं, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। ‘अग्निवीर’ योजना के पक्ष में सेना के उच्चाधिकारियों से लेकर अन्य प्रबुद्धजन भी यह उम्मीद जता रहे हैं कि अरसे से सेनाओं की भर्ती में जिस आमूलचल बदलाव की जरूरत को शिद्दत से महसूस किया जा रहा था, उसे यह योजना मूर्ताकार करेगी। अब देखा जाना है कि आने वाले समय यह योजना अपने उद्देश्य में कितनी सफल रहती है।







