प्रबुद्ध नामीगिरामी‚ बुद्धिजीवी और समाजसेवी व पत्रकार मुस्लिम महिलाओं को बदनाम करने के लिए तैयार किए गए ‘बुल्ली बाई एप’ और ‘सुल्ली ड़ील्स’ एप का मामला ठंडे़ बस्ते में जाने वाला है। इस मामले का खुलासा होने पर देश भर में तूफान उठ खड़़ा हुआ था। मुंबई की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को दोनों मामलों में गिरफ्तार तीन छात्रों को जमानत दे दी। ऐप ने कई मुस्लिम महिलाओं का विवरण ‘नीलामी’ के लिए सार्वजनिक किया था। मामले के आरोपी तीनों छात्रों नीरज बिश्नोई‚ ओंकारेश्वर ठाकुर और नीरज सिंह को जमानत मिल गई है। बिश्नोई ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया था कि उसे मामले में झूठा ही फंसाया गया है। उसने मामले के उन सह आरोपियों के साथ समानता का अनुरोध किया जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। अप्रैल में बांद्रा की एक अदालत ने विशाल कुमार झा‚ श्वेता सिंह और मयंक अग्रवाल को जमानत दे दी थी। पुलिस ने आरोपपत्र में दावा किया था कि नीरज बिश्नोई ने एक सहआरोपी को १०० ‘जानी मानी गैर–भाजपा मुस्लिम महिलाओं’ की तस्वीरें भेजने के लिए कहा था ताकि उन्हें नीलामी के लिए ड़ाला जा सके। पुलिस का यह भी आरोप था कि बिश्नोई ने सबसे पहले ‘बुल्ली बाई ऐप’ का लिंक अपने ट्विटर ग्रुप पर साझा किया था और समूह के सदस्य इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि इसका इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा। हालांकि कोई वास्तविक नीलामी या बिक्री नहीं हुई थी‚ ऐप का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं को अपमानित करना था‚ दिल्ली की एक अदालत काफी पहले ही बिश्नोई और ओंकारेश्वर ठाकुर को मानवीय आधार पर जमानत दे चुकी है। दिल्ली कीअदालत ने ‘बुल्ली बाई’ मामले के आरोपी नीरज बिश्नोई और ‘सुल्ली डील्स’ ऐप के निर्माता ओंकारश्वर को मानवीय आधार पर जमानत दी थी। अदालत ने माना था कि आरोपी पहली बार अपराधी बने हैं और लगातार जेल में रहना उनके भविष्य के लिए हानिकारक होगा। मामले के लगभग सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। यह मामला मुस्लिमों के खिलाफ नफरत और घृणा फैलाने का स्पष्ट उदाहरण था। आरोपियों की आसान रिहाई समाज में गलत धारणा भी बना सकती है कि गलती करके भी बचा जा सकता है।
राज्यसभा में पास हुआ वंदेमातरम बिल, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना अब पड़ेगा भारी
राज्यसभा में वंदेमातरम बिल पास हो गया है. बता दें कि इस बिल को 24 जुलाई को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री...






