अग्निपथ योजना ने जैसे सुधारों का रास्ता खोल दिया है। आक्रोशित युवाओं को चाहे केंद्र सरकार के जिद पकड़़ लेने पर मजबूरी में योजना स्वीकार करनी ही पड़े़ लेकिन उनके आक्रोश के निशाने पर राजनेता सबसे पहले हैं। चुनाव जीतने के बाद उनके लिए जिन सुख–सुविधाओं का अंबार लगता है‚ उन पर ये युवा लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी नाराजी को देखते हुए निर्वाचन आयोग को करीब दो दशक पुराना एक प्रस्ताव याद आ गया है। उसने सरकार से कहा है कि एक से अधिक सीट पर चुनाव लड़़ने को प्रतिबंधित करने के लिए कानून में संशोधन किया जाना चाहिए और यदि ऐसा नहीं किया जा सके तो इस चलन को हतोत्साहित करने के लिए भारी जुर्माने का प्रावधान किया जाना चाहिए। किसी उम्मीदवार के दो सीटों पर जीतने की स्थिति में एक को खाली करने पर उस पर उपचुनाव करवाने की मजबूरी हो जाती है। विधि मंत्रालय में विधायी विभाग में हाल ही में हुए एक संवाद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने इस चुनाव सुधार पर जोर दिया है। यह प्रस्ताव २००४ में सामने आया था। निर्वाचन से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए विधायी विभाग सरकार की नोड़ल एजेंसी के तौर पर काम करने की जिम्मेदारी उठाता है। वर्तमान में लागू निर्वाचन कानूनों के अनुसार‚ कोई भी उम्मीदवार आम चुनाव या कई सीटों के उपचुनाव या द्विवार्षिक चुनाव में दो अलग–अलग सीटों से चुनाव लड़़ सकता है। कोई व्यक्ति एक से अधिक सीट से निर्वाचित होता है‚ तो वह एक ही क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सकता है। इससे उसे एक सीट खाली करनी पड़़ती है‚ और खाली सीट पर चुनाव कराना मजबूरी हो जाता है। यह संसाधनों के दुरुपयोग का सटीक उदाहरण है। १९९६ में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करके व्यवस्था की गई कि कोई भी व्यक्ति एक चुनाव में दो से अधिक सीटों से चुनाव लड़़ सकता है। इस संशोधन से पहले तक चुनाव लड़़ने के लिए सीटों की संख्या की कोई सीमा तय नहीं थी। निर्वाचन आयोग २००४ से ही इस मामले को लेकर गंभीर ंहै। लेकिन संसद से कानून बने बिना उसके हाथ बंधे हैं। यदि मौजूदा प्रावधानों को बरकरार रखा जाता है‚ तो फिर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि उपचुनाव होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति से पूरा खर्च वसूला जाए जिसके इस्तीफे से सीट खाली हुई है। यह प्रस्ताव पहले ही दिया जा गया था कि विधानसभा सीट के उपचुनाव में पांच लाख रुपये और लोक सभा के उपचुनाव में १० लाख रुपये का जुर्माना लगे। इस प्रकार की प्रवृत्ति पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
नीट-यूजी पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को जड़ से बदलने का अवसर……………
भारत की परीक्षा व्यवस्था इन दिनों अपने सबसे बड़े मंथन के दौर से गुजर रही है। गत दिनों नीट-यूजी 2026...







