चीन को एक पड़ोसी देश के रूप में समझना बहुत मुश्किल है। वह संबंधों में सुधार की पेशकश भी इस तरह से करता है कि उसके पीछे छिपे संदेश के अर्थ को ठीक से डीकोड करना जरूरी हो जाता है।
‘शांगरी-ला डायलॉग’ में चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगे ने काफी अच्छी बातें कीं और कहा कि चीन और भारत पड़ोसी हैं और आपस में अच्छे संबंध बनाए रखना दोनों देशों के हितों को पूरा करता है तथा दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। वेई ने दक्षिण चीन सागर सहित क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के लिए शांतिपूर्ण तरीकों का आह्वान किया। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात के बारे में उन्होंने कहा, ‘हमने भारतीयों के साथ कमांडर स्तर पर 15 दौर की बातचीत की है और हम इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।‘
भारत और चीन में दो साल से तनातनी के हालात हैं। दो साल पहले पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने एलएसी पर कई ¨बदुओं पर यथास्थिति बदलने के लिए एकाएक एकतरफा कदम उठाए थे, जिसके कारण 45 वर्षो में पहली बार सैन्य संघर्ष हुआ था। ये कदम उन समझौतों का उल्लंघन थे, जिन्हें भारत एवं चीन ने 25 सालों में बहुत सावधानीपूर्वक बातचीत के जरिए हासिल किया था। दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में पांच मई 2020 से तनावपूर्ण सीमाई गतिरोध के हालात हैं।
तभी से हालात सामान्य करने के लिए भारत लगभग एकतरफा प्रयास करता रहा है। 15 दौर की वार्ता के बावजूद चीन भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलों तथा सड़कों और आवासीय इकाइयों जैसे अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण में जुटा हुआ है। ऐसे सूरतेहाल में ‘शांगरी-ला डायलॉग’ में की गई अच्छी बातों का क्या मतलब है। इसे समझ पाना बड़ा उलझा हुआ मामला है। इससे तो लगता है कि भारत को अपने रुख में कोई भी बदलाव करने का कोई सवाल ही नहीं है।
देखा जाए तो चीन के रुख में कोई भी बदलाव नहीं आया है। लगे हाथ चीन-अमेरिका संबंध को एक बेहद महत्त्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ बताते हुए चीनी रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन को किसी खतरे के तौर पर देखने और दुश्मन मानने की जिद एक ऐतिहासिक और रणनीतिक भूल होगी। चीन-अमेरिका संबंध न केवल इन दोनों देशों बल्कि बाकी दुनिया के हितों की पूर्ति करते हैं। चीन की यह अदा तो दोस्ती की आड़ में धमकी की साफ मिसाल है और भारत को इस ओर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है।







