राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा के साथ ही देश के सर्वोच्च पद के लिए हलचल शुरू हो गयी है। कोशिश तो यही रहती है कि इस पद पर सर्वसम्मति से निर्वाचन हो जाए‚ लेकिन लोकतंत्र के नाम पर विपक्ष भी शक्ति प्रदर्शन करना चाहता है। अगला राष्ट्रपति एनडीए का होना तय है‚ लेकिन उसके पास बहुमत के लिए १ फीसद वोटों की कमी है। इसी बात ने कांग्रेस की विपक्षी मोर्चा बनाने की उम्मीदें जगा दी हैं। भाजपा को बीजू जनता दल (बीजेड़ी) और वाईएसआर कांग्रेस का साथ मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस के लिए ये सिर्फ विपक्ष की एकजुटता दिखाने का मौका होगा‚ लेकिन उसे इस प्रयास में लंबे वक्त से कोई सफलता नहीं मिल रही है। इस खातिर वह कांग्रेस से बाहर किसी अन्य दल से भी प्रत्याशी के चयन पर तैयार हो सकती है। इस बार राष्ट्रपति निर्वाचन मंडल का आकार मामूली सा घटा है। जम्मू–कश्मीर विधानसभा के चुनाव नहीं हुए हैं। इसलिए ८७ विधायकों की कमी हो गई है। उस अनुपात में सांसदों के मत का मूल्य भी ७०८ से घटकर ७०० रह गया है। कुल मत १०‚९८‚२२१ की जगह १०‚८६‚४३३ होंगे। राष्ट्रपति चुनाव में लोक सभा‚ राज्य सभा और विधानसभा के सदस्य मतदान में हिस्सा लेते हैं। भाजपा लोक सभा‚ राज्य सभा में सबसे मजबूत स्थिति में है। लोक सभा में एनडीए के सांसदों की संख्या ३३७ एवं राज्य सभा में १०८ है। २८ राज्यों की विधानसभाओं में अकेले भाजपा के १३७९ विधायक हैं। इसके अलावा एनडीए में शामिल दलों के विधायक अलग हैं। एनडीए के पास कुल ५‚३०‚६९० मत हैं‚ जबकि जीतने के लिए ५‚४३‚२१६ मत चाहिए। लोक सभा में बीजेड़ी के २१ सांसद और वाईआरएस कांग्रेस के २२ सांसद हैं। भाजपा को उम्मीद है इन दोनों दलों का वोट भाजपा को मिलेगा। दोनों के वोटों को जोड़ दिया जाए तो ४० हजार से ऊपर बैठते हैं‚ जबकि भाजपा को जीतने के लिए महज १३‚००० वोटों की जरूरत है‚ मगर कुछ राज्यों में क्षेत्रीय दलों के उभार ने भाजपा के रणनीतिकारों को उलझा दिया है। वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल तो मान भी जाएं‚ लेकिन तेलांगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली टीआरएस चुनाव को रोचक बना सकती है। केसीआर केंद्र से नाराज हैं और विपक्ष का मोर्चा खड़़ा करने का प्रयास करते रहते हैं। फिलहाल इस समय देश और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जो हालात बने हुए हैं उन्हें संभालने के लिए किसे जिम्मेदारी मिलती है‚ जानने के लिए इंतजार करना होगा।
युद्ध तय नहीं करते कि कौन सही है: राष्ट्रों की ताकत या नैतिकता, जंग के दौर में मानवता का सवाल
कोविड से बची दुनिया मानो यह मान बैठी है कि युद्ध करना और बम गिराना ही किसी राष्ट्र की पहचान...







