वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 8.7 फीसद की विकास दर को छू लिया है। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि तमाम आर्थिक रिसर्च एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जो प्रतिकूल अनुमान जता रही थीं, वे बेवजह थे। आंकड़े तो पुष्टि यह कर रहे है कि भारत विश्व में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। हालांकि 8.7 फीसद की विकास दर एनएसओ द्वारा फरवरी, 2022 में जतलाए गए 8.9 फीसद की विकास दर के अनुमान से कम है यानी सकारात्मक बेहतरी के अनुमान के बावजूद आर्थिक वृद्धि दर में नरमी रही। ऐसे में ऊंची मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) का जोखिम पैदा हो जाता है, लेकिन अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन से यह आशंका भी बेवजह है।
कहा जा सकता है कि ऐसा जोखिम भारत में अन्य देशों के मुकाबले तो कम ही है। अर्थव्यवस्था को पूंजीगत खर्च और निर्यात के मोच्रे पर बेहतर प्रदर्शन के साथ ही बुनियादी क्षेत्र ने इस कदर मजबूती दी है कि ओमिक्रोन के प्रभाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद विकास दर में कमी का अनुमान गलत साबित हुआ। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि अर्थव्यवस्था को कोरोना महामारी से जूझना न पड़ा हो। वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.1 फीसद के निचले स्तर पर रह जाना इस बात का संकेत है कि महामारी ने अर्थव्यवस्था का यकीनन नुकसान किया है। लेकिन अर्थव्यवस्था के आठ बुनियादी उद्योगों के अच्छे प्रदर्शन ने इस नुकसान को हाहाकारी नहीं होने दिया।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च, 2022 में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली जैसे बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों ने 4.9 फीसद की वृद्धि दर्ज कराई। यह वृद्धि अक्टूबर, 2021 के बाद से सबसे ज्यादा है, उस समय 8.7 फीसद की वृद्धि दर्ज हुई थी। बहरहाल, अच्छी बात यह है कि अर्थव्यवस्था में सकारात्मक सुधार आ रहे हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6.71 फीसद रहा। यह 6.9 फीसद के संशोधित बजट अनुमान से कम है। महंगाई के बावजूद आंकड़ों में राजकोषीय मोच्रे पर अच्छे प्रदर्शन का अनुमान जताया गया है। कहा जा सकता है कि आर्थिक संकेतकों के लिहाज से भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है।







