बिहार में कांग्रेस के 19 विधायक हैं लेकिन स्थिति ऐसी कि महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद ही उसे महत्व नहीं दे रही। दो उपचुनावों में राजद ने कांग्रेस को महागठबंधन से दूर रखा। अब कांग्रेस एक और दो जून को राजगीर में चिंतन शिविर आयोजित करने वाली है। इस चिंतन शिविर में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के 300 नेता-कार्यकर्ता भाग लेंगे।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के निर्देश पर यह चिंतन शिविर आयोजित होने वाला है। कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर कहते हैं कि राजगीर चिंतन शिविर में, उदयपुर में हुए चिंतन शिविर की मुख्य बातों की जानकारी प्रदेश स्तर के नेताओं-कार्यकर्ताओं को तो दी ही जाएगी, साथ ही बिहार कांग्रेस को कैसे मजबूत किया जाए इस पर भी फोकस होगा।
शिविर में प्रदेश प्रभारी, सभी सह-प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, विधानमंडल दल के नेता, सभी वरिष्ठ पदाधिकारी, सांसद, विधायक, विधान पार्षद, जिला अध्यक्ष, सभी संगठनों, मोर्चा और मंच के पदाधिकारी सहित वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। राजगीर में होने वाले चिंतन शिविर से पहले भास्कर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस को राजगीर के चिंतन शिविर में यह चिंतन जरूर करना चाहिए कि आखिर 1990 के बाद से कांग्रेस का जनाधार क्यों घटता चला गया? क्या इसमें नीतिगत फैसले की गलती थी, क्या नेताओं का कार्यकलाप ठीक नहीं था, क्या कार्यकर्ताओं की शिथिलता बड़ा कारण तो नहीं?
वे सवालिया लहजे में कहते हैं कि कोई तो कारण होगा कि कांग्रेस की लोकप्रियता बिहार में घटी है! शर्मा कहते हैं कि जाति, समाज का सच है और सोशल इंजीनियरिंग पर कांग्रेस को ध्यान देना चाहिए। लेकिन संगठन में सिर्फ जाति के नाम पर किसी को पद दे देने से काम नहीं चलेगा बल्कि जाति के साथ सक्षमता को भी आधार बनाकर प्रतिनिधित्व देना चाहिए।
वे उदाहरण देकर कहते हैं कि डॉ. श्री कृष्ण सिंह भूमिहार जाति से थे लेकिन उन्होंने जमींदारी खत्म करने का काम किया, देवघर मंदिर में अछूतों को प्रवेश दिलाने के लिए लाठियां खाईं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. शकील अहमद खान बताते हैं कि वे उदयपुर के चिंतन शिविर में थे। राजगीर में होने वाले शिविर को लेकर वे कहते हैं कि यह तय हुआ है कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को 75 किमी. की पदयात्रा करनी है। 2 अक्टूबर को देशव्यापी पदयात्रा का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
शकील अहमद कहते हैं कि बिहार कांग्रेस के सांगठनिक ढ़ांचे में बदलाव की सबसे ज्यादा जरूरत है और इस सवाल को वे राजगीर सम्मेलन में उठाएंगे। ओबीसी, ईबीसी, दलित, महिला और अल्पसंख्यक को बिहार कांग्रेस के स्ट्रक्चर में जगह मिलनी चाहिए। इससे कांग्रेस की स्थिति सुधरेगी। जनाधार बढ़ेगा।
पार्टी के पदों पर यंग और ओल्ड दोनों तरह के कार्यकर्ताओं-नेताओं का बैलेंस जरूरी है।
युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष मंजीत आनंद साहु कहते हैं कि बिहार की सामाजिक- राजनीतिक संकल्पना को ध्यान में रखकर सभी को पार्टी में समाहित करने की जरूरत है। सबसे ज्यादा चिंतन इसी पर करने की जरूरत है। बिहार में गरीबी, पिछड़ापन काफी ज्यादा है।
इसको ध्यान में रखकर सड़ांध फैला रहे गवर्नेंस को बदलने की जरूरत है। सामाजिक न्याय के साथ कांग्रेस जनता से कैसे जुड़े इस पर चिंतन करने की जरूरत है।






