बिहार लोक सेवा आयोग के ६७वें परीक्षा के प्रश्न पत्र को फुलप्रूफ प्लान के साथ लीक किया गया। ये सारा सेटिंग कोचिंग वालों ने किया है। सेटर्स के साथ मिलकर पूरी प्लानिंग के तहत सल्वर तक पेपर पहुंचाया जो प्रश्न पत्र के उत्तर समय से पहले कंडिडेट्स तक पहुंचा दे। इसके लिए सल्वर को एक अभ्यर्थी से एक से डेढ लाख तक मिला। कोचिंग वालों का प्लान था कि एग्जाम से प्रश्नपत्र इनके हाथ में आ जाए। फिर वो निर्धारित समय के अंदर कम से कम ११० से लेकर करीब १३० सवालों का जवाब तैयार कर लें। १२०० से १५०० रुपए प्रति सवाल के तौर पर इसके साथ डील हुई थी। सूत्र की मानें तो अमित ने कुछ कोचिंग संचालकों के नाम ईओयू के अधिकारियों को बता भी दिया। इनमें उन कोचिंग संचालकों के नाम भी शामिल हैं‚ जिनके उपर जांच टीम को शुरुआत से ही शक है। हालांकि‚ जांच जारी रहने का हवाला देकर ईओयू ने कोचिंग संचालकों की पहचान उजागर करने से अभी मना कर दिया है। पर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी टीम इस मामले में शामिल लोगों को बख्शने वाली नहीं है। दूसरी तरफ‚ रिमांड पर लिए गए राजेश और सुधीर कुमार सिंह के साथ ईओयू टीम की पूछताछ जारी है। इन्हें ३ दिनों के रिमांड पर लाया गया था। सूत्र का दावा है कि अब तक कि पूछताछ में इन दोनों ने काफी कुछ बताया है। बिल्कुल नई जानकारी दी है। जिसके आधार परईओयू के जांच की गति और तेज होगी। उसके आधार पर कुछ बडे संदिग्धता के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जाएंगे।
कोचिंग वालों का प्लान था कि एग्जाम से प्रश्न पत्र इनके हाथ में आ जाए। फिर वे लोग निर्धारित समय के अंदर कम से कम ११० से लेकर करीब १३० सवालों का जवाब तैयार कर लें। १२०० से १५०० रुपए प्रति सवाल के तौर पर इस बाबत डील हुई थी। इस राज पर से पर्दा उठाने का काम किया प्रश्न पत्र हल करने वाले अमित कुमार ने। उसने जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। और इस तरह प्रश्न पत्र लीक कांड में आर्थिक अपराध इकाई ने सॉल्वर अमित कुमार सिंह के रूप में ९वीं गिरफ्तारी की है। वह मधेपुरा जिला के सुखासन का मूल निवासी है। पटना में लंगर टोली स्थित कोइरी पंचित बैठका के पास इसने अपना ठिकाना बना रखा था। जांच टीम से जुडे सूत्र बताते हैं कि इसे परीक्षा केन्द्र के गिरोह ने सवालों का जवाब तैयार करने के लिए हायर किया था॥। इसके लिए १२०० से १५०० रुपए प्रति सवाल के तौर पर इसके साथ डील हुई थी। इस राज को गिरफ्तार अमित ने ईओयू के अधिकारियों के सामने उगला है। पूछताछ में उसने बताया कि सेटर्स गैंग के फरार चल रहे सरगना आनंद गौरव उर्फ पिंटू यादव के साथ उसकी अच्छी दोस्ती है। पिछले २–३ सालों से ये दोनों एक–दूसरे के काम आ रहे हैं। पूछताछ में अमित ने एक और महत्वपूर्ण बात अधिकारियों को बतायी। इसने यह राज उगला है कि सरकारी नौकरी की तैयारी कराने वाले पटना के कई कोचिंग संचालकों तक हर मेसेज पहुंचाया जाता था। कई कोचिंग संचालक इस शातिराना खेल में सेटर्स गैंग के टच में थे। बीपीएससी पेपर लीक से जुडी हर बात की जानकारी इन्हें होती थी। फिर उन बातों को कोचिंग संचालक एग्जाम की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स को बताते थे। इसके एवज में स्टूडेंट्स से अवैध रूप से रुपयों की डिमांड की जाती थी। यह खेल काफी समय से चल रहा था।
बीपीएससी पीटी की परीक्षा में अभ्यर्थियों से पेपर और उत्तर बताने के लिए ८ से १० लाख रुपए की डील हुई थी। बकायदा इसके लिए ये रकम वसूली गई। हर अभ्यर्थी से १०–१० लाख रुपए लिए गए। ये पैसे अलग–अलग खातों में डलवाये गये। आर्थिक अनुसंधान इकाई ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ कई बैंक अकाउंट्स को सीज किए गए हैं।







