केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने देशद्रोह कानून के प्रावधानों की फिर से जांच करने के साथ ही पुनर्विचार करने का फैसला किया है. साथ ही केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि जब तक सरकार इस मामले की जांच नहीं कर लेती, तब तक देशद्रोह मामले पर सुनवाई नहीं किया जाए.
केंद्र ने याचिका खारिज करने का किया था अनुरोध
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने देशद्रोह कानून को सही करार देते हुए इसे बरकरार रखने की बात कही थी. देशद्रोह कानून का बचाव करते हुए केंद्र सरकार ने बीते शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से इस कानून को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करने का अनुरोध किया था.
इस मामले पर गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा है कि भारत की ताकत में से एक विविध विचार धाराएं हैं जो देश में खूबसूरती से पनपती हैं। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री का मानना है कि ऐसे समय में जब राष्ट्र ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ (स्वतंत्रता के 75 वर्ष) को मना रहा है। एक राष्ट्र के रूप में औपनिवेशिक बोझ को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत करना आवश्यक है, जिसमें पुराने औपनिवेशिक कानून और प्रथाएं शामिल हैं।
गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने 2014-15 से 1,500 पुराने कानूनों को खत्म कर दिया है, और 25,000 से अधिक अनुपालन बोझ को भी समाप्त कर दिया है, जो लोगों के लिए अनावश्यक बाधाएं पैदा कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर धारा 124ए की वैधता की जांच करने में समय नहीं लगा सकती: केंद्र
मंत्रालय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर धारा 124ए की वैधता की जांच करने में समय नहीं लगा सकती है, बल्कि एक उपयुक्त मंच के समक्ष सरकार द्वारा पुनर्विचार की कवायद की प्रतीक्षा कर सकती है जहां इस तरह के पुनर्विचार को संवैधानिक रूप से अनुमति है।
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को मेजर जनरल एसजी वोम्बटकेरे (सेवानिवृत्त) और एडिटर्स गिल्ड आफ इंडिया और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। जिसमें धारा 124 ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, जिसमें अधिकतम आजीवन कारावास की सजा है। इन याचिकाओं पर केंद्र ने अपना जवाब दाखिल किया है।






