बिहार भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधायक मनोज शर्मा ने बयान जारी कर कहा कि तेजस्वी यादव किस–किस बात के लिए प्रायश्चित करेंगे‚ कहां–कहां जाकर माफी मांगेंगे। अपने पिता लालू यादव के कृत्यों पर कहां –कहां पर्दा डालेंगे। इतिहास गवाह है कि इनके पिता लालू यादव ने अगडे समाज खास कर भूमिहार समाज को किस तरह से प्रताडित किया था। कहते हैं ना खाल बदल लेने से नीयत नहीं बदलती है। भले भूमिहार समाज के कुछ भटके हुए लोगों ने तेजस्वी यादव को मंच दे दिया हो लेकिन‚ उनको नहीं भूलना चाहिए कि लालू–राबडी की सरकार थी तो उन्हें कैसे प्रताडित किया गया था। यहां तक कि लालू यादव के शासनकाल में अगडे समाज के अभिभावक अपने बच्चों के नाम से सरनेम हटा देते थे। ये वो लोग हैं जिन्होंने अगडे समाज के युवाओं को बिहार से पलायन पर मजबूर कर दिया था। श्री शर्मा ने कहा कि सडे हुए दही से खुशबूदार चूडे का स्वाद खराब हो जाएगा। तेजस्वी यादव भले लाख माफी मांग लें‚ लेकिन भूमिहार समाज उन्हें कभी माफ नहीं करने वाला है। तेजस्वी यादव उसी बगीचे के पौध है जहां अगडी जाति से नफरत करना सिखाया जाता है। आज भले तेजस्वी यादव बार–बार भरे मंच से माफी मांग रहे हों लेकिन भूमिहार समाज के खिलाफ जो मंजर दिखाया गया था उसका खौफ आज भी पुराने लोगों के जेहन में है। कई नरसंहार कर दिए गए‚ हजारों लोग भूमिहार समाज के मारे गए‚ कभी लालू सरकार में न्याय नहीं मिला। जैसे लाल कपडा देख सांड़़ भडकता है वैसे ही भूमिहार समाज को देखकर लालू यादव भडकते थे।
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव की ये सोची समझी साजिश है। जिसके तहत ये सत्ता के शीर्ष पर पहुंचना चाहते है। जैसे ही तेजस्वी यादव अपने मिशन में कामयाब हो जाएंगे‚ पहले इसी समाज को वो दूध में मख्खी की तरह निकाल कर बाहर फेकेंगे। जिस चुनाव की सभी दुहाई दे रहे है तो विधानपरिषद का स्थानीय निकाय का चुनाव जातीय आधार पर नही होता है उसका समीकरण कुछ और होता है। ऐसे में यदि तेजस्वी यादव ये गलत फहमी पाल रहे है कि उनके साथ भूमिहार समाज है तो उनकी ये बडी गलती है। भूमिहार समाज कभी तेजस्वी यादव को अपना नेता स्वीकार नही करेगा।
समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं………
UGC की नई नियमावली ने देश सहित बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है। अपर कास्ट के बढ़ते आक्रोश...







