पूर्व उपमुख्यमंत्री व राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी (Rajya Sabha Member Sushil Modi) ने दो टूक कहा है कि उन्होंने बिहार में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की बात कभी नहीं कही। अलबत्ता उन्हें इसकी जानकारी है कि उत्तराखंड में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने का प्रस्ताव है। वहां स्पष्ट बहुमत वाली भाजपा की सरकार है।
केंद्रीय गृहमंत्री के वक्तव्य की चर्चा की थी
मंगलवार को जारी बयान में सुशील मोदी ने स्पष्ट किया है कि वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव पर अपने भाषण में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) के इस वक्तव्य की चर्चा की थी कि भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने राम मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर करने और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी करने जैसे निर्णयों के बाद भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने को पार्टी का अगला कदम बताया था। साथ ही उत्तराखंड में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही थी।
गठबंधन की सरकार वाले राज्य में आम सहमति से ही निर्णय
सुशील मोदी ने कहा कि राम मंदिर, अनुच्छेद-370, तीन तलाक और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर भाजपा की अलग राय स्पष्ट है, लेकिन जहां पार्टी दूसरे दलों के साथ सत्ता में है, वहां केवल आम सहमति के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार इस प्रयोग का सफल उदाहरण है।
यूसीसी का विरोध कर रहा है जदयू
बता दें कि समान नागरिक संहिता को लेकर बिहार में सत्ताधारी दल जदयू कड़ी मुखालफत कर रहा है। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने बयान जारी कर इसकी आलोचना की है। जदयू संसदीय बोर्ड के चेयरमैन उपेंद्र कुशवाहा तो स्पष्ट कह चुके हैं कि बिहार में यह लागू नहीं होगा।






