केंद्र सरकार की निजीकरण और कर्मी विरोधी नीति के खिलाफ विभिन्न ट्रेड यूनियनों और बैंक कर्मचारी संघों के आह्वान पर प्रदेश में सोमवार से शुरू हुई दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन ५०६१ बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होने से करोड़ों रुपए का लेनदेन प्रभावित हुआ। राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने सुबह से ही अपने संस्थानों के सामने प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के निजीकरण के कदम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन राज्य के २९५१ वाणिज्यिक और २११० ग्रामीण बैंकों सहित ५०६१ शाखाओं में कामकाज बाधित रहा। हालांकि स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मी इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए। बैंक कर्मचारी महासंघ‚ बिहार के महासचिव जयप्रकाश दीक्षित ने निजीकरण की नीति को बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि कोविड के कारण वित्तीय प्रभाव के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को एक–एक कर निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने बैंकिंग कानून (संशोधन) २०२१ विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस विधेयक का उद्ेश्य बैंकिंग क्षेत्रों के निजीकरण को प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निजीकरण के कदम का बैंक कर्मचारी और अन्य क्षेत्रों के कर्मचारी और मजदूर पुरजोर विरोध करेंगे। सीटू ने दावा किया है कि केरल‚ पश्चिम बंगाल‚ त्रिपुरा‚ हरियाणा और तमिलनाडु में हड़ताल का व्यापक असर हुआ है। औद्योगिक संस्थानों सहित बैंक‚ वित्तीय संस्थान और यातायात व्यवस्था प्रभापित रही है। सीटू ने बैंकिंग और बीमा क्षेा में हड़ताल का सफल बताया है। केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित संस्थानों के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके अलावा दूरसंचार‚बंदरगाह‚ पेट्रोलियम‚ इस्पात‚ सीमेंट‚ कोयला और बिजली में पूर्ण हड़ताल रही और कोई कामकाज नहीं हुआ। कपड़ा और परिधान क्षेत्र में भी कामकाज नहीं हुआ। सीटू ने कहा कि लगभग ८० लाख आंगनवाडी कार्यकर्ताओं‚ आशा कार्यकर्ताओं और मिड मील कार्यकर्ता ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। इसके अलावा निर्माण मजदूरों‚ बीड़ी श्रमिकों‚ रेहड़ी पटरी दुकानदारों‚ घरेलू कामगारों‚ ओर सफाईकर्मियों ने भी हड़ताल में भाग लिया।
परिवहन व खनन पर भी पड़़ा असर
कर्मचारियों‚ किसानों और आम लोगों पर प्रतिकूल असर ड़ालने वाली सरकार की कथित गलत नीतियों के विरोध में श्रमिक संगठनों की दो दिन की देशव्यापी हड़़ताल के पहले दिन सोमवार को परिवहन और खनन एवं उत्पादन पर भी असर देखा गया। देश के प्रमुख श्रमिक संगठनों के संयुक्त मोर्चा की तरफ हड़़ताल का आह्वान किया गया है। हड़़ताल के पहले दिन पश्चिम बंगाल और केरल में इसका खास असर देखा गया।
हालांकि‚ जरूरी सेवाएं काफी हद तक अप्रभावित रहीं लेकिन बैंकिंग कामकाज पर कई हिस्सों में असर पड़़ा और खनन गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। बिजली एवं ईंधन आपूर्ति पर हड़़ताल का कोई खास असर नहीं देखा गया लेकिन श्रमिक संगठनों ने दावा किया कि झारखंड़‚ छत्तीसगढ एवं मध्य प्रदेश के कोयला खनन वाले इलाकों में कामगार इसका हिस्सा बने हैं। अखिल भारतीय ट्रेड़ यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा‚ हड़़ताल को असम‚ हरियाणा‚ दिल्ली‚ पश्चिम बंगाल‚ तेलंगाना‚ केरल‚ तमिलनाड़ु‚ कर्नाटक‚ बिहार‚ पंजाब‚ राजस्थान‚ गोवा और ओडि़शा के औद्योगिक क्षेत्रों से बढिया समर्थन मिला है। पश्चिम बंगाल में हड़़ताल में शामिल लोगों ने जगह–जगह प्रदर्शन करने के अलावा वाहनों एवं ट्रेनों के आवागमन को भी बाधित करने की कोशिश की। केरल में भी परिवहन निगम की बसों के अलावा ऑटोरिक्शा एवं निजी बसें नहीं चलीं।







