एक बार फिर राजधानी दिल्ली को बम धमाकों से दहलाने की साजिश नाकाम हुई। इससे पहले इसी वर्ष जनवरी महीने में गाजीपुर मंड़ी में विस्फोटक बरामद किया गया था। एक महीने के अंतराल में दो जगहों पर इंप्रोवाइज्ड़ इलेक्ट्रानिक डि़वाइस (आईईड़ी) का मिलना वाकई चिंताजनक है। राहत की बात बस यही है कि दोनों ही जगहों पर दहशतगर्द इसमें धमाका नहीं कर सके। पूर्वी दिल्ली के पुरानी सीमापुरी में जिस बंद घर से ३ किलोग्राम का आईईड़ी बरामद किया गया है‚ अगर वह फटता तो ५०० मीटर के दायरे में तबाही मच जाती। पता चला है कि इस घर में तीन से चार युवक रहते थे‚ जो फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही पूरी साजिश से पर्दा उठ सकेगा। पुलिसिया तफ्तीश इस ओर संकेत कर रही है कि गाजीपुर और सीमापुरी के तार एक–दूसरे से जुड़े़ हैं। चिंता की सबसे ज्यादा बात दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना का यह बयान है कि बिना स्थानीय समर्थन के इतनी बड़़ी साजिश को रचा जाना नामुमकिन है। यानी कहीं–न–कहीं स्थानीय स्तर पर देश को अस्थिर करने वालों को यहां के कुछ लोगों का समर्थन हासिल है। लाजिमी है कि स्थानीय स्तर पर खुफिया व्यवस्था को चुस्त–दुरुस्त और साजो–सामान से युक्त रखना होगा। निश्चित तौर पर स्लीपर सेल सक्रिय है और उसे यह भी बखूबी पता है कि स्थानीय बाशिदों को अपने इस खूनी खेल में शामिल किया जा सकता है और इस्तेमाल भी किया जा सकता है। एक और मसले पर संजीदगी से विचारने करने की जरूरत है। किरायेदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया जाना वाकई चिंता की बात है। दिल्ली को अपने निशाने पर लेने को उतारू आतंकी संगठन किसी भी कीमत पर यहां खूनखराबा करना चाहते हैं। न केवल देश की राजधानी वरन पंजाब और जम्मू–कश्मीर में भी इसी तरह का आईईड़ी मिलना बड़े़ पैमाने पर निर्दोषों का कत्लेआम की साजिश को बेपर्दा करता है। लगातार खुफिया एजेंसियों का गड़़बड़़ी फैलाने के बाबत अलर्ट जारी करना यही दर्शाता है कि खतरा पग–पग पर है। चुनांचे‚ धर्मों के बीच समन्वय कायम करने की दिशा में सभी को काम करने की महती आवश्यकता है। यह बात हमेशा जहन में रखनी होगी कि एकता और आपसी सद्भाव का धागा कमजोर न पड़े़।
धरना-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की जगह कोई और स्थान हो?
सुप्रीम कोर्ट में आज दाखिल एक याचिका में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का मुद्दा भी उठ गया. दरअसल, याचिका में अपील...







