अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में बिहार मंडप के शुभारंभ के मौके पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार के गांवों में जो हुनर है वो पूरे देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में रह रहे हस्तशिल्पियों और बुनकरों द्वारा तैयार की गई चीजें ऐसी हैं कि इससे देश दुनिया में बिहार का मान बढ रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे मधुबनी पेंटिंग‚ मंजूषा कला जैसी बिहार की पारंपरिक लोककलाकारी की तियां हों या बिहार के बुनकरों द्वारा तैयार सिल्क‚ खादी व अन्य चीजों के उत्पाद इनसे राष्ट्रीय स्तर पर तो बिहार की पहचान बनी ही है‚ इन उत्पादों की गुणवत्ता और कलाकारी से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार अपनी जगह बना रहा है। बिहार के उद्योग मंत्री ने बताया कि ‘बिहार मंडप में एक जीवंत प्रदर्शनी अभी कुछ दिनों पूर्व ही पद्मश्री से सम्मानित हुईं विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग की लोक कलाकार दुलारी देवी’ के द्वारा दी जा रही हैं जो कि पूरे देश के युवा–युवतियों के लिए प्रेरणा और आकर्षण का केंद्र है।उन्होंने कहा कि बिहार मण्डप में ‘४१ स्टॉल लगाये गए हैं इनमें से २१ स्टॉल हस्तशिल्पियों और २० स्टॉल बुनकरों के हैं ।’ ये दोनों ही बिहार की पहचान हैं और इनके हुनर और इनकी उद्यमिता ने हमेशा हम सब राज्यवासियों को गौरवांवित किया है॥। शाहनवाज हुसैन ने कहा कि ४१ स्टॉल में से ५ स्टॉल धारक ऐसे भी हैं जिन्हें ‘बिहार स्टार्ट अप नीति २०१७ के अंतर्गत लाभ प्राप्त हुआ। वे एप्लिक कला‚ सुजनी कला और मधुबनी पेंटिंग की कलाकारी’ को अत्याधुनिक प्रबंधन कौशल के साथ आगे बढा रहे हैं। इनमें से ‘एक ने तो टेरोकोटा मिक्स मीडिया की विधा के साथ उत्पादों को गांव से देश के बडे महानगरों तक’ पहुंचाया। उन्होंने कहा कि ‘बिहार की पारंपरिक विधा जडी वर्क‚ लाह चूडी‚ बेंत‚ बांस शिल्प‚ मंजूषा कला‚ रेशम या सिल्क और हैंडलूम वस्त्रों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी है।
देश-दुनिया में बढ़ रहा बिहार का मान
शाहनवाज ने कहा कि बिहार के गांवों में जो हुनर है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है। ग्रामीण इलाके के हस्तशिल्पियों और बुनकरों द्वारा तैयार की गई चीजें ऐसी हैं, जिससे देश-दुनिया में बिहार का मान बढ़ रहा है। चाहे मधुबनी पेंटिंग हो या मंजूषा कला। बिहार की पारंपरिक लोक कलाकारी से जुड़ी कृतियां हों या फिर बुनकरों द्वारा तैयार सिल्क, खादी व अन्य उत्पाद, इनसे बिहार की पहचान बनी है। इनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार अपनी जगह बना रहा है। मंडप में बिहार की पारंपरिक विधा जरी वर्क, लाख चूड़ी, बेंत, बांस शिल्प, मंजूषा कला की मिसाल पेश करने वाली चीजें दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
दुलारी देवी की पेंटिंग का भी किया दीदार
पत्नी रेनू के साथ पहुंचे शाहनवाज ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित लोक कलाकार दुलारी देवी द्वारा लगाई गई मधुबनी पेंटिंग प्रदर्शनी भी देखी। राज्य पुरस्कार से सम्मानित कलाकार मनोज पंडित द्वारा मंजूषा पेंटिंग, जगदीश पंडित द्वारा मृणमय कला और नजमा खातून द्वारा मिट्टी कला की जीवंत प्रदर्शनी भी दर्शकों को खूब भा रही हैं। वहीं, दर्शक बिहार के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी चोखा का भी जमकर स्वाद ले रहे हैं।
बिहार मंडप में लगाए गए 41 स्टाल
बिहार मंडप में 41 स्टाल लगाए गए हैं। इनमें से 21 स्टाल हस्तशिल्पियों और 20 स्टाल बुनकरों के हैं। इनमें पांच स्टाल ऐसे लोगों के हैं, जिन्हें बिहार स्टार्ट अप नीति 2017 के अंतर्गत लाभ मिला है। उद्घाटन समारोह में भाजपा सांसद मनोज तिवारी व विधान पार्षद संजय मयूख और उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के निदेशक अशोक कुमार सिन्हा भी मौजूद थे।







