छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ का महत्वपूर्ण दिन है। इसे डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। सूर्यदेव के तेज से शोभित छठ पूजा का ये त्योहार बीते 8 नवम्बर को शुरू हुआ था। वहीं बुधवार को शाम के समय डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जायेगा। सूर्य षष्ठी का यह व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत, पारिवारिक सुख-समृद्धि और मान-सम्मान हेतु किया जाता है।
छठ के तीसरे दिन शाम को बांस की टोकरी में फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि से अर्घ्य का सूप सजाया जाता है, जिसके बाद व्रती अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसके साथ ही चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जायेगा और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जायेगा।
सूर्यास्त का समय
शाम के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 30 मिनट पर है और छठ पूजा के चौथे दिन सूर्योदय का समय सुबह 6 बजकर 41 मिनट पर है।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की विधि
सबसे पहले छठ पूजा में उपयोग होने वाली सभी सामग्रियों को एक बांस की टोकरी में रखें। वहीं, सूर्य को अर्घ्य देते समय सभी प्रसाद सूप में रखें और सूप में ही दीपक जलाएं। फिर नदी में उतरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
सूर्य को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें :’ओम सूर्याय नमः’ या फिर ओम घृणिं सूर्याय नमः, ओम घृणिं सूर्य: आदित्य:, ओम ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा मंत्र का जाप करें।
4 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में विधि-विधान से पूजा करने के साथ कुछ नियमों का भी पालन करना होता है। यह व्रत जितना कठिन होता है उतने ही कड़े इसके नियम होते हैं। जानें छठ पूजा के दौरान किन नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है।
छठ पूजा में सफाई का बहुत अधिक ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए बिना साफ-सफाई के पूजा की कोई भी चीज नहीं छूनी चाहिए।
जो महिलाएं इस व्रत को रख रही है। वह इन 4 दिनों में पलंग या चारपाई पर न सोएं बल्कि जमीन पर चादर बिछाकर सोएं।
सूर्य भगवान को अर्ध्य देना बहुत ही जरूरी माना जाता है। इसलिए कभी भी पूजा के लिए चांदी, स्टील, प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हमेशा तांबा के लोटे का इस्तेमाल करना चाहिए।
मान्यताओं के अनुसार, प्याज और लहसुन तासमिक श्रेणी में आते है। इसलिए इन 4 दिनों में इन दोनों का सेवन करने की मनाही होती है। इसलिए पूरे 4 दिनों तक सात्विक रहें।
प्रसाद तैयार करते समय किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आपने ऐसा किया तो आपका प्रसाद झूठा हो सकता है।
जिस जगह आप छठ का प्रसाद बना रहे हैं। ध्यान रखें कि वहां पर खाना न बनता हो। इसके साथ ही मिट्टी के बने नए चूल्हे का ही इस्तेमाल करें।
अगर आपने व्रत रखा है तो बिना सूर्य को अर्ध्य दिए जल या फिर किसी और चीज का सेवन न करें।
पूजा के दिनों में किसी को भी फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। पूजा के बाद फलों का सेवन कर सकते हैं।
छठ महापर्व के इन 4 दिनों के दौरान किसी को अपशब्द न कहें, लड़ाई-झगड़े न करें। घर पर शांति बनाए रखें।







