उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने हिंदू धर्म के ‘धर्म’ और बौद्ध धर्म की ‘धम्म’ परंपरा का पालन करने की आवश्यकता पर बल देते हुए बुद्धिजीवियों से अगली पीढी को ज्ञान देने और शांतिपूर्ण सह–अस्तित्व और प्रगति के लिए संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का आह्वान किया। श्री नायडू ने रविवार को यूनिवर्सिटी और इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित छठे धर्म–धम्म सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा कि कारोना महामारी के दौर में अनुभवों को साझा करना और साथ–साथ चलना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन को अधिक सुखी बनाने के लिए शांति लाने‚ तनाव कम करने और ध्यान देने के तरीकों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। उप राष्ट्रपति ने शांति के लिए खुशी को अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मनुष्य अपने जीवन में तनाव के कारण पीडि़त है। बिना किसी उचित कारण के भी आज हर कोई किसी न किसी तरह से तनावग्रस्त है और अपने काम पर ध्यान देने में असमर्थ है। यह लोगों की प्रगति के मार्ग में बाधक है। उन्होंने शांतिपूर्ण जीवन के लिए हिंदू और बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करने‚ उसे समझने और अभ्यास करने की आवश्यकता पर बल दिया।श्री नायडू ने प्राचीन भारतीय सभ्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय दर्शन पूरे ब्रह्मांड में किसी भी प्रकार के आक्रमण में नहीं‚ बल्कि शांतिपूर्ण सह–अस्तित्व में विश्वास करता है। उन्होंने गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि एक शांतिपूर्ण ब्रह्मांड के लिए उन्होंने लोगों को धम्म का पालन करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म न केवल मूल्यों की शिक्षा देता है‚ बल्कि हमारी जांची–परखी प्रणालियों‚ रीति–रिवाजों और परंपराओं को बनाए रखता है।
उन्होंने लोगों से अपने अहंकार को दूर करने और हर किसी से अच्छी चीजें ग्रहण करने की अपील की। उप राष्ट्रपति ने नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के अतीत और ऐतिहासिक गौरव को पुनः प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम की गति में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एक ऐसा स्थान है‚ जो नॉलेज एवं विज्डम प्रदान करता है और हमें युवा पीढी को न केवल नॉलेज‚ बल्कि विज्डम देने की जरूरत है। उन्होंने पूरे विश्व के साथ ज्ञान साझा करने का सुझाव देते हुए कहा कि साझा करना और देखभाल करना भारतीय दर्शन का मूल है। अगली पीढी तक नॉलेज और विज्डम पहुंचाने तथा दूसरों की देखभाल और उनके साथ ज्ञान साझा करने से ही इस विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्ेश्य पूर्ण होगा।
श्री नायडू ने प्रकृति के अनुकूल होने और भविष्य के लिए प्रकृति‚ संस्कृति और एकजुटता को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि लोग प्रकृति के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करेंगे‚ तो प्रकृति भी उनके साथ मित्रवत व्यवहार करेगी। उन्होंने मानसिकता और मनोविज्ञान के संबंध में कहा कि आंतरिक और बाहरी शांति के लिए मानसिकता और मनोविज्ञान को बदलने और उन्हें दुबारा उन्मुख करने की आवश्यकता है। उप राष्ट्रपति ने जीवनशैली‚ खान–पान की आदतों‚ विचार और मानसिकता का पुनर्मूल्यांकन करने की सलाह देते हुए कहा कि दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए मानसिकता का विश्लेषण किये जाने की जरूरत है। श्री नायडू ने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन कोविड के बाद की दुनिया को मानवता के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए नए सबक और सूक्षम दृष्टि प्रदान करेगा। एक ऐसी दुनिया ‚जहां प्रतिस्पर्धा करुणा को रास्ता देती है‚ धन और स्वास्थ्य के लिए रास्ता बनाता है‚ उपभोक्तावाद‚ आध्यात्मिकता और सर्वोच्चता का मार्ग प्रशस्त करता है और प्रभुत्व की भावना शांतिपूर्ण सह–अस्तित्व की राह तैयार करती है। उप राष्ट्रपति ने ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय की अकादमिक भावना को सुदृढ करने और नए अंदाज में प्रयास के लिए कुलपति प्रो. सुनैना सिंह की सराहना करते हुए‚ उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के उसी गौरव को फिर से हासिल करने की दिशा में प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय को एक बार फिर ज्ञान की शक्ति के माध्यम से भारत को बाहरी दुनिया से जोड़ने के लिए ‘सेतु और नींव’ के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा‚‘शिक्षा के इस महान केंद्र को रचनात्मक सहयोग की भावना से प्रत्येक छात्रके लिए एक परिवर्तनकारी शैक्षणिक अनुभव प्रदान करना चाहिए।’ श्री नायडू ने जलवायु परिवर्तन के भयंकर परिणामों के बारे में सचेत करते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीने पर जोर दिया और कहा‚ ‘अपनी जड़ों की ओर लौटने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की उस पारंपरिक जीवन शैली को पुनः अपनाना चाहिए जिसमें वे अपने पर्यावरण और प्रकृति के साथ मैाीवत जीवन जीते थे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने दुनिया के सबसे बड़े आत्मनिर्भर नेट–जीरो कैंपस बनाने की दिशा में प्रयास करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय की सराहना की।’
इस मौके पर राज्यपाल फागू चौहान‚ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार‚ श्रीलंका की परिवहन मंत्री पवित्रा वन्नियाराची‚ नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुनैना सिंह‚ इंडिया फाउंडेशन की निदेशक ललिता कुमार मंगलम एवं ध्रुव कटोच और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।







