महंगाई रोज दिन नये–नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। मौजूदा समय में खाद्यान्न तेल‚ पेट्रोल‚ डीजल‚ गैस और दूध के दाम आसमान को छू रहे हैं। चूंकि ये जीवन यापन के लिए आवश्यक हैं‚ इसलिए आम जन की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल हो गई है। कोरोना महामारी ने भी उनकी मुश्किलों को और बढाया है। अब दिल्ली में भी पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गया। मुंबई में पहले से ही पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर है। देश के 20 राज्यों में पेट्रोल और 3 राज्यों में डीजल 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गया है। मध्य प्रदेश‚ आंध्र प्रदेश‚ बिहार‚ महाराष्ट्र‚ कर्नाटक‚ मणिपुर‚ तेलंगाना‚ सिक्किम और राजस्थान के सभी जिलों में पेट्रोल 100 रुपये के स्तर को पार कर गया है‚ जबकि जम्मू–कश्मीर‚ पंजाब‚ ओडि़शा‚ चंडीगढ़‚ तमिलनाडु‚ केरल‚ पश्चिम बंगाल‚ पांडिचेरी और त्रिपुरा के अधिकांश शहरों में पेट्रोल 100 रुपये लीटर के स्तर को पार कर गया है। डीजल भी ओडि़शा‚ राजस्थान और मध्य प्रदेश में 100 रुपये के स्तर को पार कर गया है। जून‚ 2021 में इधन की कीमत में 16 बार बढ़ोतरी की गई‚ जबकि मई महीने में भी पेट्रोल–डीजल की कीमत में 16 बार बढ़ोतरी की गई थी। भारत में भले ही इधन की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है‚ लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है‚ जिसमें अमेरिका का तेल बाजार भी शामिल है। ऐसे में कहना उचित होगा कि कोरोना महामारी के नकारात्मक प्रभाव से उबरने में भारतीय अर्थव्यवस्था को तेल उत्पादक देशों की नीतियों पर काफी हद तक निर्भर रहना होगा क्योंकि कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए भारत की निर्भरता दूसरे देशों पर आज भी बनी हुई है। इसके अलावा‚ कच्चे तेल की कीमत में कमी या बढ़ोतरी का सीधा संबंध महंगाई से है और किसी भी देश में महंगाई ज्यादा रहने से उसका प्रतिकूल प्रभाव वहां की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। रसोई गैस की कीमत में लगातार बढ़ोतरी करने से देश में अब बिजली से खाना बनाना रसोई गैस (एलपीजी) के मुकाबले अधिक सस्ता हो गया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम रसोई गैस सिलेंडर अब 843.50 रुपये में मिल रहा है। 1 जुलाई‚ 2021 को रसोई गैस सिलेंड़र की कीमत में 140 रुपये की बढ़ोतरी की गई‚ जो अब तक की अधिकतम बढ़ोतरी है। हालांकि‚ देश में पाइप से गैस की आपूर्ति‚ जिसे पीएनजी कहा जाता है‚ रसोई गैस के मुकाबले काफी सस्ती है। रसोई गैस की कीमत में ताजा बढ़ोतरी से एलपीजी और पीएनजी के बीच कीमतों का अंतर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। वैसे‚ आगामी महीनों में पीएनजी की कीमत में भी वृद्धि होने का अनुमान है। देश में इस समय प्राकृतिक गैस की आपूर्ति 1.79 डॉलर प्रति मिलियन थर्मल यूनिट की दर से की जा रही है‚ जिसके कारण पीएनजी अधिक सस्ती है। हालांकि‚ एक अनुमान के अनुसार घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत में भी अक्टूबर‚ 2021 तक 60 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। बावजूद इसके‚ यह रसोई गैस के मुकाबले सस्ती होगी। वर्ष 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी तो पेट्रोल की कीमत 71 रुपये थी‚ जो वर्ष 2021 में बढ़कर 106 रुपये हो गई। इसी तरह‚ डीजल की कीमत वर्ष 2014 में 57 रुपये प्रति लीटर थी‚ जो वर्ष 2021 में बढ़कर 100 रुपये से अधिक हो गई। इन 7 सालों में पेट्रोल की कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है‚ जबकि डीजल की कीमत में लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रसोई गैस की कीमत वर्ष 2014 में 414 रुपये थी‚ जो वर्ष 2021 में बढ़कर 835 रुपये हो गई। खाद्यान्न तेल की कीमत वर्ष 2014 में 52 रुपये थी‚जो वर्ष 2021 में बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर हो गई। दूध की कीमत में भी बीते सालों में तेज वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में दूध की कीमत 32 रुपये थी‚ जो वर्ष 2021 में बढ़कर 60 रुपये हो गई। देश में महंगाई रोज बढ़ रही है‚ लेकिन इसका विरोध देश में किसी भी स्तर पर देखने को नहीं मिल रहा है‚ जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है। इसलिए सरकार का दायित्व है कि वह आम जनता को बढ़ती महंगाई से निजात दिलाए। कोरोना महामारी की वजह से पहले से ही आम जन आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है। ऐसे में अगर महंगाई इस तरह से बढ़ेगी तो उनके लिए जीना दुश्वार हो जाएगा। मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक है। महंगाई अधिक होने से भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखेगा‚जिससे ऋण की दर कम नहीं होगी और उधारी का उठाव भी कम होगा। परिणामस्वरूप विविध उत्पादों के उत्पादन और मांग में कमी आएगी। अस्तु‚महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार को मामले में जल्द अग्रतर कार्रवाई करनी होगी।
राज्यसभा में पास हुआ वंदेमातरम बिल, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना अब पड़ेगा भारी
राज्यसभा में वंदेमातरम बिल पास हो गया है. बता दें कि इस बिल को 24 जुलाई को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री...






