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क्या लोकतांत्रिक राजनीति पर वंशवाद की जीत होगी?

UB India News by UB India News
February 21, 2021
in पटना, ब्लॉग, राजद
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क्या लोकतांत्रिक राजनीति पर वंशवाद की जीत होगी?
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बिहार में इन दिनों लालू प्रसाद यादव की पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बीच लगातार खींचतान चल रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लोकतांत्रिक राजनीति पर वंशवाद की जीत होगी? तेजप्रताप यादव ने सिंह को तानाशाह कहा था. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि जगदानंद सिंह उनकी अवहेलना करते हैं और उनके कारण ही उनके पिता बीमार पड़े हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता सिंह ने तेजप्रताप यादव की इस अभद्रता पर नाराजगी जताई है. ऐसे में अगर उन्हें पार्टी के अंदर सबकुछ करने के लिए पूरी आजादी नहीं दी जाती है तो वो मानसिक थकान का बहाना बना कर छुट्टी पर जा सकते हैं.

हाल ही में तेज प्रताप ने जगदानंद सिंह पर इस बात को लेकर भी नाराजगी जताई थी कि पार्टी कार्यालय के गेट पर उनका स्वागत करने के लिए वो मौजूद नहीं थे. तेज प्रताप को वहां ये भी कहा गया कि पार्टी कार्यालय में अध्यक्ष से मिलने के लिए मौजूदा और पूर्व विधायकों को पहले से अप्वाइमेंट लेनी पड़ती है. तेज प्रताप इन बातों को सुन कर और भी ज्यादा गुस्से में आ गए थे.

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तेज प्रताप ने सिंह पर पार्टी को कमजोर करने और अपने पिता के खराब स्वास्थ्य के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया था. इसके अलावा उन्होंने पार्टी के भीतर लोकतंत्र को बहाल करने और राज्य के पार्टी नेतृत्व में तत्काल बदलाव की मांग की थी. उन्होंने कहा था ‘मेरे पिता ने गरीबों की पार्टी के तौर RJD को खड़ा किया था. पार्टी के भीतर लोकतंत्र को बढ़ावा दिया. लेकिन उनकी अनुपस्थिति में, जगदानंद सिंह जैसे लोग पार्टी को कमजोर कर रहे हैं.’ तेज प्रताप के बयानों से AIIMS में इलाज करा रहे लालू प्रसाद यादव बेहद नाराज दिखे. लिहाजा डैमेज कंट्रोल के लिए उन्होंने अपने बेटे को दिल्ली तलब किया.
कहा जा रहा है कि तेज प्रताप ने जगदानंद सिंह के खिलाफ इसलिए नाराजगी जताई क्योंकि पार्टी में उन्हें ज्यादा भाव नहीं मिल रहा है. जबकि सिर्फ तेजस्वी यादव की लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी के तौर पर पार्टी में ज्यादा पूछ है. जबकि परिवार के अन्य लोगों को पार्टी के बाकी सदस्यों की तरह देखा जा रहा है.

राजद को हमेशा से ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ के तौर पर देखा जाता रहा है. पार्टी को इस टैग से बाहर निकर कर एक लोकतांत्रिक संगठन बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है. ऐसे में लालू की बड़ी बेटी मीसा भारती और बड़े बेटे तेज प्रताप को संगठनात्मक मामलों से दूर रखने की कोशिश की जा रही है.

पार्टी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव को राज्य अध्यक्ष की तरफ से स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जाना प्रोटोकॉल का एक हिस्सा है. दरअसल तेजस्वी पार्टी के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं. कुछ महीने पहले एक धरने में, तेजस्वी को कुर्सी पर पर बिठाया गया था जबकि जगदानंद सिंह सहित अन्य नेता जमीन पर बैठे थे.

दूसरी तरफ पार्टी तेजप्रताप द्वारा चलाए गए कार्यक्रमों को प्राथमिकता नहीं देती है. हाल ही में, उन्होंने अपने बीमार पिता को हिरासत से रिहा करने की मांग के लिए पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया था. उन्होंने अपने समर्थकों के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित पोस्टकार्ड के बंडलों को लेकर पटना जनरल पोस्ट ऑफिस तक मार्च किया था. बता दें कि लालू को कुछ मामलों में झारखंड उच्च न्यायालय ने जमानत दी है, लेकिन उन्हें जेल से रिहा होने के लिए अन्य मामलों में जमानत की जरूरत है.

कुछ साल पहले पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद तेजप्रताप ने खुद को आरजेडी के उत्तराधिकार की लिस्ट में शामिल किया था. वो अधिक तेजतर्रार है और अपने अनोखे अंदाज के चलते लोगों का ध्यान खींचते हैं.

राजद पर आमतौर पर परिवार का कब्जा रहा है. लालू के छोटे बेटे तेजस्वी पार्टी के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं. लेकिन तेज प्रताप अपने अपने खराब व्यवहार के चलते नेतृत्व के लिए एक अड़चन बने हुए हैं. सत्ता से बाहर, तेज प्रताप और अधिक आक्रामक हो गए हैं और परिवार की विरासत पर कब्जे के लिए संघर्ष तेज हो गया है. साल 2019 के लोगकसबा चुनाव में तेज प्रताप ने शिवहर और जहानाबाद से अपने उम्मीदवार खड़े किए थे.

लालू की अनुपस्थिति में, तेजस्वी ने पार्टी को 2020 के चुनावों में राज्य विधानसभा सीटों की अधिकतम संख्या में जीत दिलाई. लेकिन वो सरकरा नहीं बना पाए. लालू के चुने हुए राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव हैं लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता तेजप्रताप और मीसा भारती की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से चिंतित हैं. तेजस्वी के लिए अपने बड़े भाई पर लगाम लगाना काफी मुश्किल होगा.

तेजस्वी ने विधानसभा चुनावों के दौरान अपने माता-पिता – लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की तस्वीरों को हटाकर राजनीतिक परिपक्वता प्रदर्शित की थी. उन्होंने राजद के राजनीतिक पुनरुत्थान और बेरोजगारी के मुद्दे पर एक सार्वजनिक आंदोलन बनाने की कोशिश की.

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