देर आए दुरुस्त आए। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विदेश यात्रा से नए एनर्जी के साथ लौटे या फिर इस खास समय में हुई आलोचना से सबक सीख सत्ता से सीधे दो दो हाथ करने को तैयार बैठे हैं। बानगी देखे कि सदन से दूर रहने वाले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लोकभवन मार्च का ऐलान करते सम्राट चौधरी की सरकार को अल्टीमेटम तक दे डाला कि बिहार को पुलिस राज्य बनने नहीं देंगे। राजद के युवराज तेजस्वी यादव की इस राजनीति चेतना की वजह क्या है? क्यों अचानक से सक्रिय हुए? समझिए बिहार की राजनीति में जो हाडबोंग मचा है उसके बरक्स क्यों बदल बदले से युवराज नजर आए है।
विरोध की छाया लंबी करेंगे तेजस्वी
राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अंततः जेन जेड के तेवर को समझ राजनीत में आक्रामकता की परिभाषा समझ चुके हैं। पेपर लीक मसले को बयानों से ज्यादा नहीं जिया। सड़कों पर उतरने से परहेज नहीं किया। उनकी आंख कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध के तरीके और बगल के झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के बाद खुल चुकी है।
इसका कितना असर पड़ा है वह सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर एके-47 के इस्तेमाल के विरोध में 19 अगस्त को पटना में ‘लोकभवन/राजभवन मार्च’ का ऐलान कर दिया है। इस 19 अगस्त माह कों वीरचंद पटेल पथ स्थित पार्टी कार्यालय से लोकभवन/राजभवन तक मार्च कर विपक्ष की भूमिका को सार्थक करने का प्रदर्शन करने जा रहे है ।
क्यों हुए आंदोलन पर उतारू?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजद नेतृत्व के द्वारा जो लापरवाही बरती गई उसका असर बड़ा दूरगामी हुआ। एक साथ कई चीजें खोती नजर आई। सबसे पहले तो राष्ट्रीय जनता दल के पास लोकतांत्रिक लड़ाई का जो सबसे बड़ा हथियार था। वह था। मुस्लिम और यादव के कॉम्बिनेशन वाला वोट। वह भी ऐसा जो अभी तक अटूट ही बना हुआ था। वह बांकीपुर में काफी धमक के साथ टूटता नजर आया।
इस MY ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ऐसा किया जैसे वर्षों से बंधी जंजीर तोड़ कर कोई भागता हो। MY समीकरण की एक जुटता को राजद सुप्रीमी लालू यादव ने बांध कर रखा था। वे उनके हितों को ले कर खुद आमने सामने की लड़ाई लड़ते थे। मुस्लिमों के हित को देखते लालू यादव ने कभी बहुमत हिंदू की तरफदारी नहीं की। पर तेजस्वी यादव MY का फेवर आक्रामकता तो दूर ए तो जेड समीकरण की तरफ भागे। नतीजतन M Y की राजद से दूरी तनती गई। तेजस्वी इस खाई को भरने उतरे हैं।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उनके तमाम बड़े नेताओं ने इस चुनाव के प्रति इतने लापरवाह दिखे कि जनता ने एक मजबूत विपक्ष के रूप में जनसुराज को आजमाने की कोशिश खुल कर की। बीजेपी को नापसंद करने वाले और सत्ता पर अंकुश के लिए मजबूत विपक्ष चाहने वाले मतदाताओं ने अब तक जो राजद की तरफ देखा था इस बार पलट कर जनसुराज की तरफ देखा और भरपूर अपना समर्थन दियां।
लोकतंत्र में जनता की इस बदली समझ के साथ तेजस्वी यादव को अपनी विपक्ष की भूमिका भी खोते दिखीं। इस भूमिका में वापसी की छटपटाहट में तेजस्वी ने सिवान मामले का दामन थाम कर जेन जी को आकर्षित करने राजभवन मार्च की और चल पड़े।
राजद के रणनीतिकारों ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम को एक दूसरे अंदाज में लिया। उन्हें इस बात से सदमा लगा कि जनसुराज के नायक प्रशांत किशोर चुनाव जीत गए। लेकिन इस से भी बड़ा सदमा इस बात से लगा कि उनके लगभग 30 हजार वोट जनसुराज की तरफ शिफ्ट कर गए। यह वोटो की बड़ी तायदाद हैं जिसमें अधिकांश वोट मुस्लिम और यादव के हैं। इसके साथ ही तेजस्वी यादव जिस एटूजेड की बात करते थे,अगर वोटो को आकलन करें और इन प्राप्त वोटों का जातीय विश्लेषण करे तो जन सुराज इस मामले में सफल पार्टी साबित हुई। राजनीतिक विश्लेषकों ने भी यह टिप्पणी करते कहा कि प्रशांत किशोर को सभी जाति और धर्म के वोट मिले।







