ADVERTISEMENT
Friday, August 14, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

80वां स्वतंत्रता दिवस: 14 अगस्त 1947 को कैसे तैयार हुआ नया भारत?

UB India News by UB India News
August 14, 2026
in Breaking News, खास खबर, दिन विशेष
0
80वां स्वतंत्रता दिवस: 14 अगस्त 1947 को कैसे तैयार हुआ नया भारत?

RELATED POSTS

भारत की सहनशीलता को कमजोरी न समझें…………….

किसी ने कॉमेडियन बोला तो किसी ने महिला विरोधी……………

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

14 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का वह दिन था, जब देश ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने से कुछ ही घंटे दूर था। यह दिन केवल 15 अगस्त के इंतजार का दिन नहीं था। इस दिन स्वतंत्र भारत की पहली सरकार का ढांचा तैयार था, नेताओं के बीच मंत्रालयों का बंटवारा हो चुका था, संविधान सभा अपने ऐतिहासिक मध्यरात्रि सत्र की तैयारी कर रही थी और देश की नई राजनीतिक व्यवस्था आकार ले रही थी। इसी रात जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में ऐतिहासिक भाषण दिया। साथ ही, उस ऐतिहासिक सत्र की छोटी-छोटी तैयारियों को लेकर भी गंभीर चर्चा चल रही थीं। 14 अगस्त 1947 को क्या-क्या हुआ, किस नेता को कौन सा विभाग मिला और उस ऐतिहासिक रात में क्या संदेश दिया गया? आइये जानते हैं…

What Was Happening on the Eve of Freedom? How Was a New India Taking Shape on August 14, 1947?
आजादी के दौर की तस्वीरें – फोटो : nehruarchive

14 अगस्त 1947 इतना खास क्यों था?

14 अगस्त को भारत की आजादी में सिर्फ कुछ घंटे बाकी थे। ब्रिटिश शासन से सत्ता भारतीय नेतृत्व को मिलने वाली थी। सत्ता हस्तांतरण अपने आप में एक लंबी प्रक्रिया थी। इसके लिए नई सरकार की व्यवस्था तैयार करनी थी, अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारियां तय करनी थीं और संविधान सभा के जरिए स्वतंत्र भारत की शुरुआत को औपचारिक रूप देना था। नई सरकार के सदस्यों और उनके विभागों की तस्वीर सामने आ चुकी थी। दूसरी तरफ संविधान सभा की उस बैठक की तैयारी चल रही थी, जो भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होने वाली थी।

आजाद भारत की पहली कैबिनेट में किसे कौन सा विभाग मिला?

15 अगस्त से काम करने वाली स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट में अलग-अलग नेताओं को महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए थे। 14 अगस्त से जुड़े दस्तावेज में प्रधानमंत्री और मंत्रियों के नाम के साथ उनके विभागों की सूची दी गई है।

  • जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। उनके पास विदेश मामले, कॉमनवेल्थ संबंध और वैज्ञानिक अनुसंधान की जिम्मेदारी थी। यानी सरकार का नेतृत्व करने के साथ देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बड़ी जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी।
  • सरदार वल्लभभाई पटेल को गृह, सूचना एवं प्रसारण और रियासतों से जुड़े विभाग मिले थे। गृह विभाग के साथ रियासतों की जिम्मेदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी, क्योंकि आजादी के समय भारत के सामने विभिन्न रियासतों को नई व्यवस्था से जोड़ने की चुनौती थी।
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद को खाद्य एवं कृषि विभाग दिया गया था। मौलाना अबुल कलाम आजाद को शिक्षा की जिम्मेदारी मिली थी।
  • डॉ. जॉन मथाई को रेलवे एवं परिवहन, जबकि सरदार बलदेव सिंह को रक्षा विभाग सौंपा गया था।
  • जगजीवन राम के पास श्रम, सीएच भाभा के पास वाणिज्य और रफी अहमद किदवई के पास संचार विभाग था।
  • राजकुमारी अमृत कौर को स्वास्थ्य और डॉ. बीआर आंबेडकर को कानून विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी।
  • वहीं आरके षणमुखम चेट्टी के पास वित्त, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पास उद्योग एवं आपूर्ति और एनवी गाडगिल के पास कार्य, खान एवं बिजली विभाग था।

इस तरह स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में प्रशासन, गृह, रक्षा, वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, परिवहन और संचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों की जिम्मेदारियां अलग-अलग नेताओं को सौंप दी गई थीं।

What Was Happening on the Eve of Freedom? How Was a New India Taking Shape on August 14, 1947?
जवाहरलाल नेहरू – फोटो : nehruarchive

क्या कैबिनेट अचानक बनी?

नहीं। नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। 4 अगस्त को जवाहरलाल नेहरू ने लॉर्ड माउंटबेटन को नई कैबिनेट के सदस्यों के नाम भेजे थे। उस समय अंतिम रूप से विभागों का बंटवारा कैबिनेट की पहली बैठक में किए जाने की बात कही गई थी।

फिर 14 अगस्त की रात संविधान सभा में क्या हुआ?

14 अगस्त की मध्यरात्रि में संविधान सभा का ऐतिहासिक सत्र हुआ। यह वही सत्र था जिसमें भारत की स्वतंत्रता के ऐतिहासिक क्षण को औपचारिक रूप से दर्ज किया गया। इसी सत्र में जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण दिया। उन्होंने इस क्षण को भारत और उसकी नियति के बीच लंबे समय से किए गए वादे के पूरा होने के रूप में प्रस्तुत किया। उनका संदेश था कि जब दुनिया का बड़ा हिस्सा सो रहा होगा, तब भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जागेगा। भाषण में सिर्फ भावनात्मक बातें नहीं थीं। नेहरू ने उसी वक्त यह भी बताया कि आजादी मिलने के बाद देश के सामने क्या जिम्मेदारियां होंगी।

नेहरू ने कहा- आजादी के बाद असली काम शुरू होगा

नेहरू के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आजादी के बाद भारत के सामने आने वाली चुनौतियों से जुड़ा था। उन्होंने भारत की सेवा को देश की करोड़ों जनता की सेवा से जोड़ा। उनके अनुसार भारत की सेवा का अर्थ उन लोगों की सेवा करना था जो गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसरों की असमानता से जूझ रहे थे। उनके लिए आजादी केवल सत्ता हासिल करना नहीं थी। देश को लगातार मेहनत करके उन सपनों को वास्तविकता में बदलना था, जिनके लिए स्वतंत्रता आंदोलन लड़ा गया था।

नेहरू ने यह भी कहा कि भारत के सपने केवल भारत के लिए नहीं हैं। दुनिया के देश एक-दूसरे से इतने जुड़े हुए हैं कि कोई भी देश खुद को बाकी दुनिया से अलग करके नहीं देख सकता। शांति, स्वतंत्रता और समृद्धि भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने देश के लोगों से अपील की कि वे विश्वास और आत्मविश्वास के साथ इस बड़े सफर में शामिल हों। यह समय छोटे विवादों, दुर्भावना और एक-दूसरे को दोष देने का नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत का निर्माण करने का था।

What Was Happening on the Eve of Freedom? How Was a New India Taking Shape on August 14, 1947?
आजादी के दौर की तस्वीरें – फोटो : nehruarchive

स्वतंत्रता की शपथ में क्या था?

मध्यरात्रि के इस ऐतिहासिक सत्र में स्वतंत्रता के साथ सेवा का संकल्प भी जुड़ा था। नेहरू ने प्रस्ताव रखा कि आधी रात के बाद संविधान सभा में मौजूद सदस्य भारत और उसके लोगों की सेवा के लिए खुद को समर्पित करने की शपथ लें। इस संकल्प में भारत को दुनिया में उसका उचित स्थान दिलाने और विश्व शांति तथा मानव कल्याण में योगदान देने की प्रतिबद्धता भी शामिल थी।

14 अगस्त की रात की तैयारियों से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी था कि संविधान सभा में गीत गाया जाए या नहीं, इसे लेकर भी चर्चा हुई थी। नेहरू ने इस मुद्दे पर संविधान सभा के अध्यक्ष को लिखा था कि ऐसे अवसरों पर गायन सामान्य प्रक्रिया नहीं है। उस समय भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान भी नहीं था। इसलिए वे 14 अगस्त की रात या 15 अगस्त की सुबह संविधान सभा में गीत गाए जाने को लेकर सहज नहीं थे।

हालांकि उन्होंने यह माना कि आधी रात का सत्र अपने आप में असाधारण था और इसलिए वहां कुछ अलग किए जाने पर विचार हो सकता है। इस विषय पर कांग्रेस की बैठक में भी चर्चा हुई थी और अंतिम फैसला संविधान सभा के अध्यक्ष पर छोड़ दिया गया था।

उस समय राष्ट्रीय ध्वज का क्या महत्व था?

आजादी के साथ भारत को अपनी राष्ट्रीय पहचान भी मिल रही थी। राष्ट्रीय ध्वज को लेकर स्वतंत्रता से पहले संविधान सभा में चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया चली थी। दस्तावेजों में राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी चर्चा 22 जुलाई 1947 को दर्ज है। ध्वज में मौजूद चक्र की प्रतीकात्मकता को भी समझाया गया था। इस तरह राष्ट्रीय ध्वज नए भारत के अतीत और भविष्य दोनों को जोड़ने वाला प्रतीक बन रहा था।

What Was Happening on the Eve of Freedom? How Was a New India Taking Shape on August 14, 1947?
स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के दौरान की तस्वीरें – फोटो : Indianculture,gov,in

ब्रिटिश सेना की विदाई भी इसी बदलाव का हिस्सा थी

राजनीतिक सत्ता के हस्तांतरण के साथ ब्रिटिश सेना की भारत से वापसी भी महत्वपूर्ण थी। नेहरू ने ब्रिटिश सैनिकों की वापसी को पुराने औपनिवेशिक संबंधों के अंत का प्रतीक माना। उनके अनुसार किसी देश में विदेशी सेना की मौजूदगी विदेशी शासन का स्पष्ट प्रतीक होती है। इसलिए ब्रिटिश सेना की वापसी भारत की स्वतंत्रता के व्यावहारिक और प्रतीकात्मक दोनों पहलुओं से जुड़ी थी। हालांकि ब्रिटिश सैनिकों की पहली टुकड़ी 17 अगस्त 1947 को बॉम्बे से रवाना हुई।

आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े फैसले हो रहे थे

आजादी के साथ भारत को अपनी आर्थिक व्यवस्था भी संभालनी थी। सत्ता हस्तांतरण के बीच भारत और ब्रिटेन के बीच वित्तीय मुद्दों पर भी बातचीत चल रही थी। स्टर्लिंग बैलेंस से जुड़े समझौते में भारत के मौजूदा बैलेंस से 3.5 करोड़ पाउंड की राशि को 31 दिसंबर 1947 तक किसी भी मुद्रा क्षेत्र में खर्च करने के लिए उपलब्ध कराने पर सहमति बनी थी। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक के पास 3 करोड़ पाउंड का कार्यशील बैलेंस रहने वाला था। इससे पता चलता है कि आजादी के समय राजनीतिक सत्ता के साथ आर्थिक व्यवस्था को संभालने की तैयारी भी चल रही थी।

रियासतों के सामने क्या चुनौती थी?

आजादी के समय भारत की एक बड़ी चुनौती रियासतों का भविष्य भी था। स्वतंत्र भारत को केवल ब्रिटिश भारत की सत्ता संभालनी नहीं थी, बल्कि रियासतों को भी नई राजनीतिक व्यवस्था के साथ जोड़ना था। नेहरू के दस्तावेजों में रियासतों और संविधान सभा के संबंध तथा उनके भविष्य को लेकर लगातार चर्चा दर्ज है। इस पूरे दौर में यह सवाल महत्वपूर्ण था कि भारतीय रियासतें नई लोकतांत्रिक व्यवस्था में किस तरह शामिल होंगी। इसलिए स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारत के सामने सरकार बनाने के साथ-साथ राजनीतिक एकीकरण की भी बड़ी चुनौती थी।

आधी रात को देश आजाद हुआ, लेकिन उसी क्षण यह जिम्मेदारी भी तय हो गई कि अब भारत को अपनी सरकार खुद चलानी है, अपनी समस्याओं का समाधान खुद खोजना है और अपने भविष्य का निर्माण खुद करना है।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

भारत की सहनशीलता को कमजोरी न समझें…………….

भारत की सहनशीलता को कमजोरी न समझें…………….

by UB India News
August 14, 2026
0

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने कहा है कि भारत की उदारता और सहनशीलता को उसकी कमजोरी नहीं समझना...

किसी ने कॉमेडियन बोला तो किसी ने महिला विरोधी……………

किसी ने कॉमेडियन बोला तो किसी ने महिला विरोधी……………

by UB India News
August 14, 2026
0

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर से विवाद खड़ा दिया...

कल 13वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…………..

कल 13वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…………..

by UB India News
August 14, 2026
0

इस साल 15 अगस्त को जब देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाएगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से...

जनगणना में पूछे जाएंगे 40 सवाल…………….

जनगणना में पूछे जाएंगे 40 सवाल…………….

by UB India News
August 14, 2026
0

गृह मंत्रालय (MHA) ने आज जनगणना के लिए 40 सवालों की एक सूची जारी की है। इसमें निर्देश दिया गया...

बाबरी के भक्त कभी भी बजरंग बली के भक्त नहीं हो सकते………………

बाबरी के भक्त कभी भी बजरंग बली के भक्त नहीं हो सकते………………

by UB India News
August 14, 2026
0

स्वामी परमहंस रामचंद्र दास महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर अयोध्या के दिगंबर अखाड़ा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते...

Next Post
आजादी की रात 11 बजे की वो आवाज!

आजादी की रात 11 बजे की वो आवाज!

माइन्स एंड मिनरल एक्ट पर बवाल क्यों …………….

माइन्स एंड मिनरल एक्ट पर बवाल क्यों ................

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend