बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा को उनकी बेहतरीन पुलिस सेवा के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से सराहनीय सेवा पदक दिया गया है. करीब तीन दशक की पुलिस सेवा में उन्होंने कानून-व्यवस्था संभालने, अपराध रोकने, नक्सल प्रभावित इलाकों में काम करने और गंभीर मामलों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस सम्मान को उनकी मेहनत, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बेहतर काम का परिणाम माना जा रहा है.
राकेश कुमार सिन्हा ने 1999 में डीएसपी के रूप में पुलिस सेवा शुरू की थी. 2001 में उन्होंने झारखंड के दुमका से अपनी नौकरी की शुरुआत की. बाद में बिहार कैडर मिलने के बाद उन्होंने जहानाबाद, शेखपुरा, रोहतास, समस्तीपुर, जमुई, नालंदा, सुपौल और खगड़िया समेत कई जिलों में काम किया. इसके अलावा उन्होंने एसटीएफ, बीपीए, एटीएस और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में भी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं. इन पदों पर रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध पर रोक लगाने और गंभीर मामलों की जांच में अहम भूमिका निभाई.
पुलिस सेवा में शानदार काम के बाद राकेश कुमार सिन्हा को 2012 बैच का आईपीएस अधिकारी बनाया गया. आईपीएस बनने के बाद उन्होंने मद्य निषेध, विशेष शाखा, लोकायुक्त कार्यालय और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में एसपी और एसएसपी के पद पर काम किया. इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने अपराध की जांच, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निगरानी और विभागीय कामकाज को बेहतर तरीके से चलाने में योगदान दिया. बाद में उन्हें डीआईजी बनाया गया. फिलहाल वे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में डीआईजी के पद पर काम कर रहे हैं.
राकेश कुमार सिन्हा ने पुलिस की नियमित जिम्मेदारियों के साथ चुनाव से जुड़ी ड्यूटी भी निभाई है. पंजाब और गुजरात में चुनाव के दौरान उन्होंने पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में काम किया. चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी होती है. उन्होंने इस जिम्मेदारी को भी सफलतापूर्वक निभाया. उनकी अच्छी सेवा को देखते हुए अब तक उन्हें 32 प्रशस्ति-पत्र मिल चुके हैं. इनमें छह प्रशस्ति-पत्र बिहार के पुलिस महानिदेशक की ओर से दिए गए हैं.
सराहनीय सेवा पदक राकेश कुमार सिन्हा के लंबे पुलिस करियर की बड़ी उपलब्धि है. दुमका से शुरू हुई उनकी पुलिस सेवा बिहार के कई जिलों के साथ एसटीएफ, एटीएस, विशेष शाखा, मद्य निषेध, लोकायुक्त कार्यालय और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो तक पहुंची. अलग-अलग पदों पर रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम किए. गृह मंत्रालय की ओर से मिला यह पदक उनकी लंबे समय की मेहनत और अच्छी सेवा की पहचान है.
इस बार बिहार पुलिस के 18 अधिकारियों और जवानों को अलग-अलग श्रेणियों में पुलिस पदक के लिए चुना गया है।इसमें इंस्पेक्टर मोहम्मद अफसर हुसैन को गैलंट्री मेडल मिला है। वहीं आईजी संजय कुमार और एसपी बीना कुमारी को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक के लिए चुना गया है। इनमें बिहार पुलिस के एक IG, एक DIG और दो SP भी शामिल हैं। विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (President’s Medal for Distinguished Service) के लिए बिहार के IG संजय कुमार और SP वीणा कुमारी का चयन किया गया है।
15 पुलिस अधिकारियों-जवानों को सराहनीय सेवा पदक
इसके अलावा बिहार पुलिस के 15 अधिकारियों और जवानों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक (Medal for Meritorious Service) देने की घोषणा की गई है।इनमें DIG राकेश कुमार सिन्हा और SP इम्तियाज अहमद समेत पुलिस अधिकारी, दारोगा, एएसआई, हवलदार और सिपाही शामिल हैं। डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा ने 1999 में डीएसपी के रूप में पुलिस सेवा की शुरुआत की थी। 2001 में झारखंड के दुमका में पहली पोस्टिंग हुई। बाद में उन्हें बिहार कैडर मिला। रोहतास, शेखपुरा, जहानाबाद, नालंदा समेत कई जिलों में अपनी सेवाएं दीं। एसटीएफ से लेकर एटीएस और निगरानी में भी जिम्मेदारियां संभालीं। 2012 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी बनाया गया। वर्तमान में वे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में डीआईजी के पद पर सेवा दे रहे हैं। पंजाब और गुजरात चुनाव के दौरान वे पुलिस पर्यवेक्षक भी रहे। अबतक उन्हें 32 प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं। और अब उन्हें यह बड़ा सम्मान मिला है।
किसे मिलता है गैलेंट्री अवॉर्ड ?
गैलेंट्री अवॉर्ड (वीरता पुरस्कार) भारत सरकार द्वारा देश के सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, नागरिक सुरक्षा कर्मियों और आम नागरिकों को उनकी वीरता, साहस, और आत्म बलिदान के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।यह पुरस्कार युद्ध के दौरान या शांति के समय (गैर-युद्ध स्थितियों में) दिखाए गए अदम्य साहस और देशभक्ति को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं
गैलेंट्री अवार्ड दो तरह के होते हैं
गैलेंट्री अवार्ड दो तरह के होते हैं। एक युद्धकालीन गैलैंट्र्री अवार्ड, जो देश के दुश्मन का सामना करते हुए असाधारण साहस दिखाने पर दिए जाते हैं।दूसरा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, जो युद्ध के अलावा अन्य स्थितियों (जैसे आतंकवाद-विरोधी अभियान, आंतरिक सुरक्षा या शांति बनाए रखने के दौरान) में दिखाई गई वीरता के लिए दिए जाते हैं।







