अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. जार्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद यूएस ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं. अमेरिका ने लगातार 9वीं रात ईरान पर जमकर बमबारी की. जार्डन में दो सैनिकों की मौत के बाद तीसरे सैनिक की मौत की भी पुष्टि हो गई है.
अमेरिका ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले किए. इससे पहले अमेरिका ने जानकारी दी थी कि जॉर्डन में हुए एक हमले में उसके कम से कम दो सैनिकों की मौत हो गई थी. वहीं, क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी रविवार को ईरान की ओर से नए हमलों की सूचना दी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में तीसरे अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हुई है. सेना के मुताबिक, शनिवार को उत्तरी इराक में एक सैन्य अड्डे पर ईरानी ड्रोन से जुड़े विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के दौरान हुए नियंत्रित विस्फोट में एक अमेरिकी सैनिक की जान चली गई.
शनिवार को ही बढ़ी थी मुस्तैदी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि शनिवार शाम 6 बजे (ईडीटी) से शुरू हुए हवाई हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता को कमजोर करना और जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने वाले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को जवाब देना था.
एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि शनिवार को ईरान के हमलों से पहले ही अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी शुरू कर दी थी. इसके तहत लड़ाकू विमानों समेत अतिरिक्त सैन्य संसाधन भेजे गए. बाद में CENTCOM ने कहा कि उसके हवाई हमले पूरे हो गए हैं। इन हमलों में ईरान की तटीय निगरानी प्रणाली और हवाई रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया.
ट्रंप ने क्यों लिया बदला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज रात न्यू जर्सी में वर्ल्ड कप फाइनल से निकलने के बाद ईरान के बारे में पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा कि ईरान में ठिकानों पर आज रात किए गए जवाबी हमले किए गए हैं. कहा कि हमने आज रात फिर उन पर जोरदार हमला किया और ऐसा हमने उन तीन, शायद दो के बजाय तीन, महान देशभक्तों के सम्मान में किया.
ट्रंप ने किया दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है. मिलिट्री के लिहाज से उन्होंने लगभग सब कुछ खो दिया है. उनके पास बहुत कम चीजें बची हैं. उनके पास कुछ मिसाइलें हैं. कुछ ड्रोन हैं. कुछ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है लेकिन ज्यादा कुछ नहीं है.
यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ था. इन हमलों का उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना और उसके सहयोगी समूहों की ताकत कम करना था. इसके बाद शुरू हुई लड़ाई में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सबसे ज्यादा लोग ईरान और लेबनान के हैं. इस युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की भी चिंता बढ़ गई है.







