विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा शुक्रवार को एक साथ किए गए उपाय सराहनीय हैं। इन उपायों से तीन लाभ होंगे- विदेशी निवेश का पलायन थमेगा, स्थानीय ऋण बाजार को मजबूती मिलेगी और रुपये की स्थिति सुधरेगी। वैश्विक अनिश्चितता के इस समय में रिजर्व बैंक को ऐसे तमाम उपाय करने ही चाहिए, जिनसे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। ध्यान देने की बात है, अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने विदेशी निवेश के लिए अपने रास्तों को उस तरह से नहीं खोला है, जैसे दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देश कर रहे हैं। तथ्य है, इन छोटे देशों के शेयर बाजार का मूल्य भारतीय शेयर बाजार से ज्यादा हो गया है। भारतीय शेयर बाजार का मूल्य दो साल पहले दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंचने लगा था, मगर अब गिरकर सातवें स्थान पर आ गया है। सबसे मूल्यवान अमेरिकी शेयर बाजार 80 ट्रिलियन डॉलर के करीब है, तो 16 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीनी शेयर बाजार दूसरे स्थान पर है, जबकि भारतीय शेयर बाजार का मूल्य पांच ट्रिलियन से भी नीचे आ गया है। ऐसे में, शेयर बाजार में निवेश की गिरावट को रोकना बहुत जरूरी हो गया है।
विदेशी निवेशकों की ताकत को बढ़ाया गया है। उन्हें ज्यादा कर सुविधा के साथ ही शेयर बाजार में अधिक पहुंच की सुविधा दी गई है। सॉवरेन बॉन्ड में निवेश पर कर छूट, विदेशी निवेशकों के लिए निवेश प्रतिबंधों में ढील और विदेशियों के लिए शेयर निवेश सीमा में वृद्धि से निश्चित ही भारतीय निवेश में बढ़ोतरी होगी। इन उपायों से विदेशी निवेशकों का फायदा बढ़ेगा,पर यह जोखिम भारत को उठाना ही पड़ेगा। हमें व्यापकता में सोचना होगा कि हम अपने देश में निवेश बढ़ाने के लिए क्या ठोस उपाय कर रहे हैं? क्या हम भारत में व्यापार को और आसान बना सकते हैं? क्या हम अपनी पूंजी को विदेश जाने से रोक सकते हैं? वास्तव में, देश के विकास को तेज करने के लिए ऐसा करना ही होगा। अच्छी बात है, शुक्रवार को रुपये का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पचास पैसे बढ़ा है। किसी भी स्थिति में कोशिश होनी चाहिए कि डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर रहे। आज एक बड़ी आशंका है कि एक डॉलर की कीमत 100 रुपये से ज्यादा न हो जाए। पेट्रोल की कीमत तो पहले ही 100 रुपये के पार चली गई है।
अर्थव्यवस्था में गिरावट को रोकना प्राथमिकता बने। वैश्विक गिरावट हमारे लिए बहाना न बने, तो ही अच्छा है। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, उसकी मौद्रिक नीतियां पिछलग्गू न बनें, यह सुनिश्चित करना होगा। निस्संदेह, घोषित उपाय दीर्घकालिक विकास को बल देने के साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाएंगे। रिजर्व बैंक का एक और उपाय खास ध्यान खींच रहा है। अब निर्यातकों को अपनी विदेशी मुद्रा आय को जल्द से जल्द भारत लाना होगा। भारत के हिस्से की विदेशी मुद्रा और कमाई भारत में ही रहे, इसके उपाय बढ़ाने की जरूरत है। रिजर्व बैंक ने उचित ही बैंक दर या रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। जीडीपी विकास दर 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दी गई है, तो खुदरा महंगाई दर अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है। भारत अभी भी संभल या संभाल सकता है। विकास की रफ्तार में आ रही अड़चनों को दूर करना होगा। यह खुशखबरी है कि स्वर्ण के भाव में एक प्रतिशत और चांदी के भाव में दो प्रतिशत की कमी देखी गई है। चुनौतियों के बीच जहां भी सुधार के सुखद संकेत दिख रहे हैं, उनसे प्रेरित होने की जरूरत है।







