वैश्विक बाजारों में डॉलर के मजबूत होने और विदेशी निवेशकों के लगातार पैसा निकालने की वजह से भारतीय रुपया कमजोर हो गया है. इसी वजह से रुपया पहली बार 1 डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से भी नीचे चला गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है. इससे सरकार और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ गई है.
निवेशक सेफ हेवन में लगा रहे अपना पैसा
बाजार खुलते ही साफ हो गया था कि रुपया कमजोर होने वाला है। शुरुआत में रुपया 95.80 पर था, लेकिन थोड़ी ही देर में इतना दबाव आ गया कि यह 96 के पार चला गया. एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका के फेडरल रिजर्व ब्याज दरें ऊंची रख रहा है और दुनिया में चल रहे तनाव के चलते लोग अपना पैसा सुरक्षित जगह पर लगाना चाहते हैं. इसलिए वो डॉलर खरीद रहे हैं. इसी वजह से रुपया जैसी दूसरी करेंसी कमजोर हो रही हैं और उनकी कीमत गिर रही है.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा, जैसे खाद्य तेल (पाम ऑयल) और दालें, विदेशों से आयात करता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो इन चीजों को खरीदने के लिए हमें ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं। इसका सीधा नतीजा यह होगा कि आने वाले दिनों में आपके किचन में इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड तेल और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
पेट्रोल-डीजल और परिवहन की मार
रुपये की गिरावट का सबसे घातक असर ईंधन पर पड़ता है। भारत अपनी तेल जरूरत का 80% आयात करता है। 96 के पार रुपया जाने का मतलब है कि कच्चे तेल का आयात और महंगा हो जाएगा। इससे न केवल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे, बल्कि ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ने से सब्जी और फल भी महंगे हो जाएंगे।
आरबीआई के सामने बड़ी चुनौती
रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचने पड़ सकते हैं। साथ ही, महंगाई को रोकने के लिए बैंक ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो आपके होम लोन और कार लोन की ईएमआई (EMI) भी बढ़ सकती है।







