कभी जीतन राम मांझी के लिए नीतीश कुमार ने ‘1 अणे मार्ग’ बंगला को खाली किया था। अब सम्राट चौधरी के लिए यादों की पोटली समेट नीतीश कुमार ने अपना नाता इस बंगले से तोड़ लिया। 20 साल तक नीतीश कुमार ने इसी बंगले से बिहार को चलाया। सत्ता का केंद्र रहे ‘1 अणे मार्ग’ एक बार फिर पावर सेंटर बनने के लिए तैयार है। मगर, इस का मुख्तार कोई और होगा। करीब दो दशक तक जिस बंगले से बिहार की किस्मत और सियासत के फैसला नीतीश कुमार करते रहे, अब वहां से सुशासन बाबू पूरी तरह विदा हो रहे। मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सम्राट चौधरी के पास आने के बाद, नीतीश कुमार ने प्रोटोकॉल और नैतिकता का पालन करते हुए आज सीएम के लिए एलॉट सरकारी आवास खाली कर रहे।
सत्ता का केंद्र रहा 1 अणे मार्ग अब इतिहास
पिछले 20 वर्षों से ‘1 अणे मार्ग’ महज एक सरकारी बंगला नहीं, बल्कि बिहार की ताकत का पर्याय बना हुआ था। नीतीश कुमार ने यहीं रहते हुए राज्य की बड़ी नीतियों का खाका खींचा और कई बार सरकारें बनाईं और गिराईं। सत्ता के गलियारों में इस आवास की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की हर छोटी-बड़ी राजनीतिक हलचल यहीं से शुरू होती थी। अब यह ऐतिहासिक आवास नए मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए तैयार है।
2 दशकों में एक बार नीतीश ने खाली किया था CM हाउस
किस्सा साल 2014 के लोकसभा चुनाव का है. जब बिहार की राजनीति में दिलचस्प मोड़ आया. भाजपा से गठबंधन तोड़ने का नुकसान नीतीश कुमार को उठाना पड़ा और जेडीयू 40 (लोकसभा सीटों) में से सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई. हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने खुलकर अपनी गलती मानी और पार्टी में नए नेतृत्व की बात कही. इसके बाद सत्ता हस्तांतरण की रणनीति बनी और उन्होंने अपने करीबी सहयोगी दलित नेता जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना. 20 मई 2014 को मांझी ने शपथ ली. इसके बाद नीतीश कुमार ने 1, अणे मार्ग का सीएम आवास छोड़ दिया और 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास में शिफ्ट हो गए.
फरवरी 2015 में फिर से बिहार की सियासत में खलबली मच गई. नीतीश कुमार ने वापसी का ऐलान किया और 9 फरवरी को जीतन राम मांझी को जेडीयू से बाहर कर दिया गया. मांझी ने पलटवार करते हुए विधानसभा भंग करने की सिफारिश की, लेकिन कैबिनेट ने इसे मंजूरी नहीं दी. इसी बीच नीतीश कुमार ने 97 विधायकों की बैठक कर खुद को नेता चुनवा लिया और बाद में 128 विधायकों के समर्थन के साथ दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति के सामने शक्ति प्रदर्शन किया. 20 फरवरी को विश्वास मत से पहले ही मांझी ने इस्तीफा दे दिया. 22 फरवरी को नीतीश कुमार ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इसके बाद मांझी ने नई पार्टी बनाई, लेकिन मार्च तक उन्होंने 1, अणे मार्ग का आवास खाली नहीं किया. वह बंगला नहीं खाली करने को लेकर अड़ गए.
जीतन राम मांझी ने साफ कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन पहले नीतीश कुमार 7, सर्कुलर रोड छोड़ें. इस पर सरकार सख्त हुई और 1 अणे मार्ग पर भारी पुलिस तैनात कर दी गई. मांझी ने आरोप लगाया कि उन्हें बंगले के फल तक लेने नहीं दिया जा रहा. आम और लीची के पेड़ों को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि मीडिया में इसे ‘फलों की जंग’ कहा जाने लगा. नीतीश ने सर्कुलर रोड का आवास खाली किया, फिर भी मांझी डटे रहे. आखिरकार जून 2015 में उन्होंने बंगला छोड़ा और दूसरे सरकारी आवास में चले गए.
7 सर्कुलर रोड भी नीतीश का पसंदीदा बंगला
नीतीश कुमार जिस 7 सर्कुलर रोड आवास में शिफ्ट हुए हैं। उससे उनका पुराना और गहरा लगाव रहा है। यह बंगला उनके लिए कोई नया नाम नहीं है।
- पहला प्रवास: वर्ष 2014 में जीतन राम मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार इसी बंगले में शिफ्ट हुए थे।
- अस्थायी कार्यालय: मुख्यमंत्री रहते हुए भी 2016 में रेनोवेशन के दौरान वे यहीं से सरकार चलाते थे।
- आधुनिक परिसर: नीतीश कुमार की देखरेख में एक सुव्यवस्थित और आधुनिक परिसर के रूप में विकसित किया गया।
- हालिया इस्तेमाल: पिछले कुछ समय से इस बंगले का इस्तेमाल मुख्यमंत्री कार्यालय के विस्तारित हिस्से के तौर पर भी किया जाता रहा।
1 अणे मार्ग बंगला में शिफ्ट होंगे सम्राट चौधरी
बिहार की बदलती सियासत में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही आवास परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई थीं। नीतीश कुमार ने शुक्रवार का दिन इस विदाई के लिए चुना। 7 सर्कुलर रोड को पूरी तरह से अपने मुताबिक नीतीश कुमार ने रेनोवेट कराया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास छोड़ना ये दिखाता है कि राज्य में अब नेतृत्व की कमान पूरी तरह से नई पीढ़ी और नए गठबंधन के पास जा चुकी है।
7 सर्कुलर रोड होगा नीतीश कुमार का नया आवास
नीतीश कुमार जिस 7 सर्कुलर रोड आवास में जा रहे हैं, उसे उन्होंने अपनी विशेष देखरेख में तैयार करवाया गया है। इस बंगले की कुछ खास विशेषताएं हैं।
यह बंगला आधुनिक तकनीक से बना है। बड़े भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम है। बंगले के लॉन को खास लुक देने के लिए कोलकाता से मंगवाकर घास लगाई गई है। वर्तमान में इस आवास का उपयोग मुख्यमंत्री के कार्यालय (CM Office) के रूप में किया जा रहा था।
लालू प्रसाद यादव के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार
इस आवास में शिफ्ट होने के बाद नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एक-दूसरे के पड़ोसी बन जाएंगे। यहां से राबड़ी आवास बस दो घर बाद है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी। दोनों घर सर्कुलर रोड के दक्षिण तरफ है।
नीतीश कुमार को पसंद है 7 सर्कुलर रोड बंगला
नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड बंगला बेहद पसंद है। 2014 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने CM पद छोड़ दिया था। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। तब वे रहने के लिए 7 सर्कुलर रोड बंगले आ गए थे।
इसी बंगले में रहते हुए नीतीश ने जीतन राम से मुख्यमंत्री की कुर्सी वापस ले ली थी। विधानसभा 2015 में फिर जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री बने थे। CM बनने के बाद नीतीश एक अणे मार्ग गए, लेकिन 7 सर्कुलर बंगला अपने पास ही रखा।
विपक्ष ने 2 बंगले रखने का आरोप लगाया तो इसे मुख्य सचिव के नाम अलॉट किया गया। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले को भूकंप रोधी तकनीक से लैस करवाया था।
नंबर 7 से है नीतीश को लगाव
नीतीश कुमार अपने लिए नंबर 7 को लकी मानते हैं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री बने थे, तब उनके फोन नंबर का अंतिम अंक 7 था।
नीतीश जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें जो गाड़ी मिली थी उसका नंबर 777 था। नीतीश ने 1977 में राजनीति शुरू की थी। 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को 7 निश्चय नाम दिया। अभी बिहार सरकार 7 निश्चय पार्ट-3 पर काम कर रही है।
19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है 1 अणे मार्ग
नीतीश अभी सीएम आवास एक अणे मार्ग में रह रहे हैं। यह घर लगभग 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है। यहीं से नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को दिशा दी। अब राज्यसभा जाने के बाद उनका 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना एक तरह से बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है।
सरकारी बंगला अलॉट कौन करता है?
बिहार सरकार के गजट के मुताबिक, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री को रहने के लिए घर देने की व्यवस्था है। सरकार का भवन निर्माण विभाग आवास अलॉट करता है।
- केंद्रीय पूल के तहत मंत्रियों को बंगला और विधानमंडल पूल के तहत विधायकों/MLC सदस्यों को फ्लैट दिया जाता है।
- कैबिनेट सचिवालय के मुताबिक, मंत्री को राजधानी में फ्री में एक आवास दिया जाता है, जिसमें स्टाफ क्वार्टर और बगीचा भी होता है। इसके रख-रखाव से लेकर साज-सज्जा भी सरकारी पैसे से होता है।
- बिजली, पानी फ्री रहता है। मंत्री इस आवास को मंत्री पद जाने के 30 दिन तक कर सकते हैं। उसके बाद उन्हें खाली करना पड़ता है।
- सभी 243 विधायकों के लिए विधायक आवास परिसर में घर बनाया गया है।
- हर आवास का एरिया एक समान 3,681 स्क्वायर फीट है। आवास की नंबरिंग विधानसभा की संख्या के हिसाब से है।
- इसी तरह विधान परिषद सदस्यों के लिए विधान पार्षद आवास परिसर में 75 आवास बनाए गए हैं। मंत्रियों के लिए अलग बंगला है।







