बिहार विधान परिषद के उपचुनाव में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भाजपा की ओर से सूर्य कुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा का नामांकर दाखिल कराकर एक तीर से दो शिकार किया है। मंगल पांडे द्वारा रिक्त इस सीट पर 12 मई को मतदान होगा। दरअसल, बिहार में कुशवाहा जाति के एनडीए में दो नेता हैं। मुख्यमंत्री व भाजपा नेता सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा। एक म्यान में दो तलवार जैसी स्थिति कही जा सकती है।
वैसे भी बिहार विधान सभा चुनाव 2025 के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की राजनीति में कुशवाहा वोट के महत्व को समझाते हुए भाजपा आलाकमान पर 10 से 15 सीटों की मांग कर जबरदस्त प्रेसर बनाया था। हालांकि, भाजपा आलाकमान ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा को पांच सीटें दी थी।
भाजपा आलाकमान ने जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 6 सीटों पर चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी, तो उपेंद्र कुशवाहा ने फिर एक बार अपनी नाराजगी जाहिर की तो भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा को भी छह सीटों पर चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी। नीतीश मंत्रिमंडल के गठन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने फिर एक बार गेम खेलकर सभी को चौंका दिया। पत्नी स्नेहलता विधायक या अपने जीते हुए विधायकों को मंत्री न बना कर बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया। इसको लेकर पार्टी के तीनों विधायक ने विद्रोह भी किया था।
उपेंद्र कुशवाहा ने बेटे दीपक प्रकाश को इसलिए मंत्री बनाया कि वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसलिए मंत्रिपद बचाने के लिए एक एमएलसी का अतिरिक्त सीट मिल जाएगा। नीतीश मंत्रिमंडल भंग हो जाने के कारण दीपक फिलहाल मंत्री नहीं है।
सम्राट चौधरी की सलाह पर भाजपा ने सूर्य कुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा को विधान परिषद के लिए नामित कर उपेंद्र कुशवाहा की मुश्किलें बढ़ा दी है। कुशवाहा अब अपने बेटे के हित को देखते हुए अपनी पार्टी का भाजपा में विलय के लिए मजबूर हो सकते हैं।
भाजपा का दबाव भी है उपेंद्र कुशवाहा पर ऐसा करने के लिए। दरअसल, भाजपा उपेंद्र कुशवाहा को कुशवाहा वोट बैंक के लिए सह रही थी और इनके प्रेसर पॉलिटिक्स से भी परेशान थी। अब भाजपा को ही सम्राट चौधरी के रूप में कुशवाहा जाति का बड़ा नेता मिल गया है।
सम्राट चौधरी ने एक ही तीर से दूसरा शिकार किया है पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का। जातिय राजनीति को देखते हुए भूमिहार जाति के विजय सिन्हा की भविष्य की राजनीति को भी पूरी तरह उलझा दिया है।
नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा दोनों उप मुख्यमंत्री थे। दोनों के मध्य शुरू से छत्तीस का आंकड़ा विधानसभा से लेकर सार्वजनिक स्थल पर रहा। नीतीश के बगल में बैठने व साथ चलने के लिए दृष्टिकटु दृश्य देखने को मिलता था।
सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के रिश्ते का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री बनते ही सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा की सुरक्षा में कटौती करते हुए उसे Z+ (जेड प्लस) से घटाकर Z (जेड) श्रेणी कर दिया।
सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के फैसले को भी बदल दिया। सम्राट चौधरी ने 224 राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन वापस ले लिया, जिन्हें विजय सिन्हा ने राजस्व मंत्री रहते ढाई महीने पहले सस्पेंड किया था। राजस्व व भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव को भी बदल दिया।
सम्राट चौधरी को नेता चुनने वक़्त विजय सिन्हा को ही नाम प्रस्ताव करना था। विजय सिन्हा ने नाम प्रस्ताव तो किये लेकिन यह भी बताना नहीं भूले की उनसे ऐसा करने को कहा गया है। सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में दोनों ही उप मुख्यमंत्री जदयू के हैं।
बहरहाल, भूमिहार जाति से जदयू के विजय कुमार चौधरी उप मुख्यमंत्री हैं। सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार में विजय सिन्हा उप मुख्यमंत्री नहीं सिर्फ मंत्री बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में विजय सिन्हा क्या मंत्री बनना चाहेंगे! अब, सूर्य कुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा भी भूमिहार कोटा से मंत्री पद के प्रबल दावेदार हो सकते हैं।
उपेंद्र कुशवाहा पर भाजपा में पार्टी विलय का दबाव !
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अस्तित्व पर एक बार फिर खतरा मंडरा रहा है। खतरा उनकी सहयोगी BJP और अपने ही विधायक से है। सियासी गलियारे में चल रही चर्चा की मानें तो BJP ने कुशवाहा के सामने बेटे को बिहार सरकार में मंत्री बनाने के लिए पार्टी के विलय का शर्त रखा है।
दूसरी तरफ उनकी पार्टी के भीतर भी गुटबाजी बढ़ गई है। RLM के 4 विधायक हैं। विधायकों का एक धड़ा चाहता है कि पार्टी का विलय BJP में हो जाए। पार्टी बचाने के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पत्नी को विधायक और बेटे को मंत्री बनाया था, लेकिन अब स्थिति गंभीर हो गई है।
1- दीपक प्रकाश के MLC पद को होल्ड किया
20 नवंबर 2025 को NDA सरकार का शपथ ग्रहण हुआ। मंत्रियों की लिस्ट में एक चौंकाने वाला नाम उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का था। बिना किसी सदन का सदस्य बने आखिरी क्षण में दीपक को मंत्री बना दिया गया था। इन्हें मंत्री बनाने में BJP और खासकर गृह मंत्री अमित शाह की सहमति की बात सामने आई थी।
यह तय किया गया था कि मंगल पांडेय के सीवान सदर सीट से विधायक बनने के बाद उनकी जगह खाली हुई MLC सीट से दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जाएगा। मंगल पांडेय के विधान परिषद का कार्यकाल 2030 तक बचा हुआ था।
इस बीच नीतीश सरकार भंग हो गई। सम्राट चौधरी नए CM बने और कैबिनेट को होल्ड पर कर दिया गया। अब मंगल पांडेय की खाली सीट पर भी BJP की तरफ से मुख्यालय प्रभारी अरविंद शर्मा को कैंडिडेट बना दिया गया है। यानि कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने का फैसला फिलहाल होल्ड है।
सियासी चर्चाओं की मानें तो ऐसा कर बीजेपी प्रेशर पॉलिटिक्स कर रही है। दावा किया जा रहा है कि अगर कुशवाहा मान जाते हैं तो जून में खाली हो रही विधान परिषद की 9 सीटों में से एक पर दीपक प्रकाश को पहले विधान परिषद भेजा जाएगा। इसके बाद उन्हें मंत्री बना दिया जाएगा। नहीं माने तो दीपक विधान परिषद नहीं जा पाएंगे।

2- अपने सबसे खास माधव आनंद के कार्यक्रम में नहीं आए कुशवाहा
27 अप्रैल को RLM के विधायक दल के नेता और मधुबनी विधायक माधव आनंद के बेटे आद्विक आनंद का जनेऊ कार्यक्रम पटना के एक बड़े होटल में हुआ। इसमें बिहार के CM सम्राट चौधरी, पूर्व CM नीतीश कुमार, विजय सिन्हा समेत बीजेपी, जदयू के सभी सीनियर और जूनियर विधायक पहुंचे।
पार्टी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। 26 अप्रैल तक वे बिहार के औरंगाबाद के अलग-अलग कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी और सासाराम की विधायक स्नेहलता कुशवाहा व उनके बेटे पूर्व मंत्री दीपक प्रकाश कार्यक्रम में शामिल हुए।
उपेंद्र कुशवाहा के शामिल नहीं होने से इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी के भीतर एक बार फिर से सब कुछ ठीक नहीं है।

पार्टी के नेताओं का कुछ भी बोलने से इंकार, उपेंद्र कुशवाहा ने साधी चुप्पी
क्या उपेंद्र कुशवाहा पर पार्टी के विलय का दबाव है? इसे समझने के लिए भास्कर ने पार्टी के अलग-अलग नेताओं से बात की। ऑन रिकॉर्ड सभी नेता इस पर उपेंद्र कुशवाहा से बात करने की सलाह देते हैं। लेकिन, ऑफ द रिकॉर्ड सभी अपनी बात खुल कर रखते हैं। सभी इस बात को स्वीकार करते हैं कि पार्टी के विलय की बात चल रही है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और दिनारा विधायक आलोक सिंह ने भास्कर को बताया, ’हमें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से भी इस मामले पर कोई बातचीत नहीं हुई है। वही इस पर कुछ भी स्पष्ट बता पाएंगे।’
वहीं, पार्टी के एक विधायक ने नाम नहीं छापने की रिक्वेस्ट पर बताया, ’ये बात सही है कि पार्टी पर विलय का दबाव है। इस मामले पर एक से दो राउंड की बातचीत भी हो गई है। आगे का निर्णय जल्द आप लोगों के सामने आ जाएगा।’
वहीं, इस पूरे मामले पर उपेंद्र कुशवाहा चुप्पी साधे हुए हैं। वे इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं।
भाजपा उम्मीदवार भरा पर्चा
बिहार भाजपा के मुख्यालय प्रभारी सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) ने आज भोजपुर-सह-बक्सर विधान परिषद स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव के लिए अपना नामांकन पर्चा दाखिल कर दिया। उनके साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी प्रमुख नेता विधान परिषद् पहुंचे थे। नामांकन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी समेत सभी वरिष्ठ नेताओं ने जीत का दावा भी कर दिया। सभी नेताओं ने एक साथ खड़े होकर विक्ट्री की साइन भी दिखा दी।
नामांकन के बाद सूर्य कुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा ने कहा कि बिहार विधान परिषद उपचुनाव में एनडीए उम्मीदवार बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी सहित एनडीए के सभी सहयोगी पार्टियों के राष्ट्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने मुझ पर जो भी भरोसा जताया है, उस पर वे खरा उतरने की कोशिश करेंगे।
‘इस पार्टी के लिए कार्यकर्ता सबसे बड़ी पूंजी है’
भाजपा के नेता अरविंद शर्मा ने भाजपा के पूर्वजों को याद करते हुए कहा कि उनके कठोर परिश्रम से आज भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन सकी है। उन्होंने इस मौके पर भाजपा के सभी प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का भी आभार जताया कि उन सभी का सहयोग उन्हें अब तक मिलता आ रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए भाजपा की तारीफ करते हुए कहा कि इस पार्टी के लिए कार्यकर्ता सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि इस पार्टी ने मुझे वह सब कुछ दिया जिसकी मुझे कल्पना नहीं थी। मैंने जीवनभर एक कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी का कार्य किया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी, पूर्व मंत्री मंगल पांडेय, पूर्व मंत्री रामकृपाल यादव, संतोष कुमार सुमन, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, लोजपा (आर) प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी एवं आरएलएम के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह सहित एनडीए के तमाम वरिष्ठ नेता और विधायकगण उपस्थित रहे।







