बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने कैबिनेट का विस्तार कब करेंगे, इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तरह-तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं. इन सबके बीच सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के बाद हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, आगामी 6 मई को सम्राट कैबिनेट का विस्तार हो सकता है. इस विस्तार में भाजपा और जदयू के बीच मंत्रियों की संख्या को लेकर ’50-50′ का फॉर्मूला तय किया गया है. जानकारी के अनुसार बीजेपी (BJP) कोटे से मुख्यमंत्री समेत कुल 16 मंत्री और जदयू (JDU) कोटे से डिप्टी सीएम समेत कुल 16 मंत्री बनेंगे. वहीं सहयोगी दलों को मिलाकर 4 मंत्री बनेंगे.
दरअसल इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि सम्राट सरकार को विश्वास मत हासिल होने के बाद इसी महीने के अंत तक बिहार मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. लेकिन, 29 अप्रैल को कैबिनेट की दूसरी बैठक बुलाए जाने के बाद संकेत मिले हैं कि अप्रैल में विस्तार संभव नहीं है. अगर विस्तार होना होता तो इसकी हलचल पहले दिखती, जो फिलहाल नजर नहीं आ रही.
मंत्रिमंडल विस्तार में क्यों हो रही देरी?
जानकारी के मुताबिक बिहार बीजेपी के कई विधायक पश्चिम बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं. ऐसे में अगर अभी विस्तार होता और कुछ नेताओं को जगह नहीं मिलती तो नाराजगी चुनाव प्रचार को प्रभावित कर सकती थी. इसी वजह से विस्तार को टालने की रणनीति अपनाई गई है.
JDU से कौन-कौन बनेंगे मंत्री?
जेडीयू की बात करें तो यहां बड़े बदलाव की संभावना कम है. नीतीश कुमार के नेतृत्व में ज्यादातर पुराने मंत्री ही दोहराए जा सकते हैं. डिप्टी सीएम के तौर पर विजय चौधरी और विजेंद्र यादव पहले ही शामिल हैं. इसके अलावा श्रवण कुमार, लेसी सिंह, अशोक चौधरी, जमा खान, शीला मंडल, सुनील कुमार, मदन सहनी और रत्नेश सदा के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं. कुछ सीटों पर बदलाव संभव है, जहां कुशवाहा कोटे से भगवान सिंह कुशवाहा और जयंत राज के नाम चर्चा में हैं. साथ ही “टीम निशांत” की झलक भी कैबिनेट में दिख सकती है, जिसमें युवाओं और महिलाओं को मौका मिल सकता है।
बीजेपी कोटे से किसको मिलेगा मौका?
बीजेपी खेमे में बदलाव की चर्चा ज्यादा है. पार्टी संतुलन साधते हुए जातीय समीकरण, अनुभव और युवा नेतृत्व को ध्यान में रखकर नाम तय कर सकती है. ऐसे विधायकों को मौका मिलने की संभावना है जो संगठन और नेतृत्व की कसौटी पर खरे उतरते हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने संकेत दिया है कि मंत्रिमंडल संतुलित होगा और इसमें युवाओं व महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. बीजेपी कोटे से मंगल पांडेय, विजय सिन्हा, रामकृपाल यादव, श्रेयसी सिंह, लखेंद्र पासवान, रमा निषाद, प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, अरुण शंकर प्रसाद, संजय सिंह ‘टाइगर’ को फिर से मंत्री बनने का मौका मिल सकता है. वहीं इस बार संगीता कुमारी को भी मंत्री बनने का मौका मिल सकता है.
RLM, LJPR और HAM से ये नाम लगभग तय
एनडीए के अन्य सहयोगी दलों में भी बड़े बदलाव की संभावना कम है. आरएलएम से दीपक प्रकाश फिर से मंत्री बन सकते हैं. वहीं चिराग पासवान अपने दोनों मंत्री संजय पासवान और संजय सिंह को दोबारा मौका दे सकते हैं. वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी हम (HAM) की ओर से संतोष मांझी का नाम लगभग तय माना जा रहा है.







