सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में 22 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें राज्य में 11 नए आधुनिक शहर बसाने का फैसला लिया गया। बिहार की तस्वीर बदलने वाली इन सेटेलाइट टाउनशिप का नामकरण प्राचीन सांस्कृतिक नामों पर होगा। पटना के पुनपुन में 81 हजार एकड़ में पाटलिपुत्र नाम का नया शहर बसेगा। सेटेलाइट टाउनशिप के लिए चुने गए इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। बिहार में दिल्ली-मुंबई जैसे कॉनसेप्ट पर प्लांड कॉलोनियां बसेंगी। इनमें बाजार और रहने के लिए जगह तय होंगे। चौड़ी सड़कें होंगी। हरियाली के लिए सड़क किनारे और पार्क में पेड़ लगाए जाएंगे।
कनेक्टिविटी का महाजाल: रिंग रोड और एक्सप्रेसवे
81 हजार एकड़ में फैला होगा शहर
बिहार की नई टाउनशिप में लैंड पूलिंग मॉडल क्या है?
लैंड पूलिंग मॉडल एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सरकार और जमीन मालिक एक विकास भागीदार (Development Partner) के रूप में काम करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बिना किसी विवाद के आधुनिक शहरों (ग्रीनफील्ड टाउनशिप) का निर्माण करना है।
- सरकार किसानों से अविकसित भूमि लेती है। विकास के बाद कुल जमीन का 55% हिस्सा विकसित प्लॉट के रूप में मूल मालिकों को वापस कर दिया जाता है, जबकि शेष 45% का उपयोग सड़क, पार्क और बुनियादी सुविधाओं के लिए होता है।
- सरकार इस क्षेत्र में बिजली, पानी, ड्रेनेज और चौड़ी सड़कों का जाल बिछाती है। इससे वापस मिलने वाली 55% जमीन की बाजार कीमत मूल जमीन के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है, जिससे मालिकों को भारी मुनाफा होता है।
- इस योजना में देरी होने पर जुर्माने का प्रावधान है। जमीन का आवंटन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है और पारदर्शिता के लिए इसका नक्शा राजस्व विभाग के पास सुरक्षित रहता है।
लैंड पूलिंग मॉडल में जमीन के बदले पैसा मिलता है या नहीं?
लैंड पूलिंग मॉडल में जमीन के बदले पैसा नहीं मिलता है। सरकार जमीन के बदले नकद मुआवजा नहीं देती है। इसके बजाय, ये एक ‘विकास भागीदारी’ मॉडल है। इसमें भूमि मालिक को उसकी अविकसित जमीन के बदले 55 प्रतिशत विकसित जमीन (प्लॉट) वापस दी जाती है। सरकार का तर्क है कि आधुनिक सुविधाओं (सड़क, पार्क, बिजली) के कारण इस छोटी हिस्सेदारी की बाजार कीमत मूल जमीन की तुलना में कहीं अधिक हो जाती है। यह सीधे पैसे के बजाय भविष्य के पूंजीगत लाभ पर केंद्रित निवेश अवसर है।
बिहार के किस-किस जिले में बन रही नई टाउनशिप?
बिहार सरकार ने कुल 11 शहरों के पास आधुनिक ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनाने का फैसला लिया है। इन नए शहरों को अपनी एक सांस्कृतिक पहचान देने के लिए सरकार ने इनके विशेष नाम भी तय किए हैं। ग्रुप नंबर एक का मास्टर प्लान 31 मार्च 2027 तक आएगा। जिसमें पटना (पाटलिपुत्र), सोनपुर (हरिहरनाथपुरम), गया (मगध), दरभंगा (मिथिला), सहरसा (कोसी), पूर्णिया (पूर्णिया) और मुंगेर (अंग) शामिल है। जबकि, ग्रुप नंबर दो का मास्टर प्लान 30 जून 2027 तक आएगा। जिसमें मुजफ्फरपुर (तिरहुत), भागलपुर (विक्रमशिला), छपरा (सारण) और सीतामढ़ी (सीतापुरम) शामिल है।
बिहार के पाटलिपुत्र टाउनशिप में जमीन कैसे खरीदें?
बिहार के नए 11 ग्रीनफील्ड टाउनशिप में फिलहाल जमीन खरीदना संभव नहीं है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इन सभी 11 चिह्नित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ये रोक मास्टर प्लान अधिसूचित होने तक (मार्च 2027 से जून 2027 के बीच तक) प्रभावी रहेगी। जब सरकार इन टाउनशिप को विकसित कर लेगी, तब जमीन खरीदे जा सकते हैं। सरकार अपने पास रखे गए हिस्से (जो लागत निकालने के लिए रखा गया है) को व्यावसायिक या आवासीय उद्देश्यों के लिए आम जनता या डेवलपर्स को बेचेगी। इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके अलावा जब 55% विकसित जमीन मूल मालिकों को वापस मिल जाएगी और सरकार खरीद-बिक्री से रोक हटा लेगी, तब उन निजी मालिकों से विकसित प्लॉट खरीद सकते हैं।
शहर से दूरी और लोकेशन
- इस टाउनशिप का कोर एरिया पटना शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर होगा.
- मौर्यालोक से दूरी: 21 किमी
- पटना जंक्शन: 20 किमी
- पटना एयरपोर्ट: 24 किमी
- कोर एरिया के पास बिहटा-सरमेरा रोड, प्रस्तावित रेलवे जंक्शन और स्पोर्ट्स सिटी जैसी सुविधाएं होंगी.
- 9 प्रखंड के 274 गांव शामिल- इस टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में पुनपुन, फतुहा, संपतचक, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, दानियावां, धनरुआ, मसौढ़ी समेत 9 प्रखंडों के 274 गांव शामिल किए गए हैं. इसके अतिरिक्त पुनपुन नगर पंचायत के 6 वार्ड भी रखे गए हैं.
- कोर एरिया के गांव के नाम जानिए- कोर एरिया में 12 गांव शामिल होंगे. इनमें पीपरा, बाजिदपुर, पनवार, नुरुद्दीनपुर, डुमरी, नादपुर खैरी, खापुरा, कलियानपुर बसियावां, पीपरा चक और सिकंदरपुर गांव शामिल हैं.
- जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक- सरकार ने टाउनशिप के लिए चिन्हित क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर रोक लगा दी है. फिलहाल इसका मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है.
बिहार के सैटेलाइट टाउनशिप में क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
बिहार की नई ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को पूरी तरह से आधुनिक और स्मार्ट शहर की तर्ज पर डिजाइन किया जाएगा। यहां रहने वालों को वो सभी सुविधाएं मिलेंगी जो वर्तमान में बड़े महानगरों (जैसे- गुरुग्राम, नोएडा और चंडीगढ़) में मिलती हैं।
- मास्टर प्लान के तहत 22% जमीन सिर्फ सड़कों के लिए रखी गई है। इसमें मुख्य सड़कें 2-लेन से लेकर 6-लेन तक की होंगी।
- बिजली के तार, इंटरनेट केबल और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से अंडरग्राउंड होंगे, जिससे शहर साफ-सुथरा दिखेगा।
- टाउनशिप को प्रमुख एक्सप्रेसवे (जैसे पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे) और रिंग रोड से जोड़ा जाएगा।
- पटना के पाटलिपुत्र टाउनशिप में फिनटेक सिटी, स्पोर्ट्स सिटी, लॉजिस्टिक हब और ज्यूडिशियल एकेडमी जैसी सुविधाएं होंगी।
- आईटी और सॉफ्टवेयर पार्कों के लिए अलग से जगह आरक्षित होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर नौकरियां मिलेंगी।
- शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स और कमर्शियल स्पेस टाउनशिप के भीतर ही विकसित किए जाएंगे।
- टाउनशिप के कुल क्षेत्र का 5% हिस्सा पार्कों, स्टेडियम और ओपन ग्रीन स्पेस के लिए सुरक्षित रखा गया है।
- अत्याधुनिक सरकारी और निजी अस्पताल, बड़े स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थान (जैसे स्किल ट्रेनिंग सेंटर) टाउनशिप के भीतर ही होंगे।
- ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए 3% जमीन आरक्षित है, जिससे समाज के कमजोर वर्ग को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ रहने का मौका मिलेगा।
अन्य शहरों में भी टाउनशिप
पटना के किस इलाके में बन रही नई टाउनशिप?
पटना के आसपास बनने वाली नई ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप, जिसे ‘पाटलिपुत्र’ नाम दिया गया है, मुख्य रूप से पुनपुन और फतुहा के इलाकों में विकसित की जाएगी।
- पटना के दक्षिण और पूरब की ओर फैली होगी। इसके विशेष क्षेत्र में 9 प्रखंडों के 274 गांव और 6 वार्ड शामिल किए गए।
- पुनपुन, फतुहा, संपतचक, दनियावां, धनरुआ, मसौढ़ी, नौबतपुर, फुलवारीशरीफ और पटना ग्रामीण इलाका शामिल है।
- टाउनशिप का सबसे पहला और मुख्य विकास पुनपुन प्रखंड के लगभग 12 गांवों (पिपरा, बाजीदपुर, पनवार, सिकंदरपुर) में शुरू होगा।
- पाटलिपुत्र टाउनशिप पटना शहर की वर्तमान सीमा से लगभग 13 किमी और पटना जंक्शन से करीब 20 किमी की दूरी पर स्थित है।
- बिहटा-सरमेरा रोड (रिंग रोड), पटना-गया-डोभी फोरलेन और आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे के पास स्थित है। भविष्य का ‘जट डुमरी’ रेलवे जंक्शन भी इसके करीब होगा।
- ये बिहार की सबसे बड़ी सैटेलाइट टाउनशिप होगी, जिसका कुल प्रस्तावित विशेष क्षेत्र लगभग 81,730 एकड़ है।
- इसके भीतर ही स्पोर्ट्स सिटी, फिनटेक हब, ज्यूडिशियल एकेडमी और लॉजिस्टिक हब जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बिहार के सभी 11 टाउनशिप के बारे में बताएं?
- पटना:पाटलिपुत्र टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में 9 प्रखंडों के 274 गांव शामिल किए गए हैं। पुनपुन, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, नौबतपुर, धनरुआ, दनियावां और मसौढ़ी प्रखंड शामिल हैं। उत्तर में नेवा-पुनपुन सड़क, दक्षिण में जैतिया/पटना प्लार्निंग एरिया, पूरब में एनएच-431 (फतुहा-दनियावां सड़क/फतुहा-इस्लामपुर रेल लाइन) और पश्चिम में नौबतपुर-मसौढ़ी सड़क होगा।
- दरभंगा:मिथिला टाउनशिप दरभंगा शहर से 3.5 किमी और रेलवे स्टेशन से 4.5 किमी दूर विकसित होगी। एयरपोर्ट से इसकी दूरी 1.5 किमी होगी। इसके उत्तर में बरही, दक्षिण में धोई, पूरब में भूसखोल, पश्चिम में सिसो होगा। इसका कोर क्षेत्रफल 1600 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 17400 एकड़ होगा। दरभंगा, बहादुरपुर, केवतिरानवे प्रखंड के 102 गांव इसमें शामिल होंगे।
- छपरा:सारण टाउनशिप रेलवे स्टेशन से 8 किमी की दूरी होगी। कोर क्षेत्र 550 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 15400 एकड़ होगा। इसकी सीमा के उत्तर में गरखा, दक्षिण में छपरा बायपास, पूरब में गरखा-चिरांद रोड, पश्चिम में छपरा-मढ़ौरा रेललाइन होगी। इसमें छपरा, गरखा, नगरा प्रखंड के 78 गांव इसमें शामिल होंगे।
- सोनपुर:हरिहरनाथपुर टाउनशिप स्टेशन से 6 किमी और प्रस्तावित एयरपोर्ट से एक किमी की दूरी पर होगी। उत्तर में परसौना-मारन रोड, दक्षिण में एनएच 31, पूरब में सोनपुर दरियारा रोड, पश्चिम में पटना परसा हाइवे होगा। कोर क्षेत्रफल 2000 एकड़ कोर विशेष क्षेत्रफल 33000 एकड़ होगा। सोनपुर, दरियापुर, परसा प्रखंड के 147 गांव टाउनशिप में शामिल होंगे।
- भागलपुर:विक्रमशिला टाउनशिप रेलवे स्टेशन से 10 किमी की दूरी पर होगी। इसका कोर क्षेत्रफल 861 और विशेष क्षेत्रफल 24000 एकड़ होगा। इसकी सीमा के उत्तर में गंगापथ, दक्षिण में पचरुखी, पूरब में चंपानाला और पश्चिम में शाहकुंड-अकबरनगर रोड शामिल होगा। इसमें नाथनगर, शाहकुंड, सुल्तानगंज, नारायणपुर प्रखंड के 126 गांव शामिल होंगे।
- गया:मगध टाउनशिप गया रेलवे स्टेशन से दस किमी और एयरपोर्ट रेलवे स्टेशन से 12.5 किमी और एयरपोर्ट से 5 किमी दूर टाउनशिप विकसित होगी। इसका कोर क्षेत्रफल 1629 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 22200 एकड़ होगा। इसके उत्तर में गया शहर, दक्षिण में बोधगया, पूर्व में फल्गु नदी और पश्चिम में रसुलगंज होगा। गया टाउन, बोधगया, परैया, प्रखंड के 71 गांव इसमें शामिल होंगे।
- मुजफ्फरपुर:तिरहुत टाउनशिप शहर से 1.5 किमी की दूरी पर टाउनशिप विकसित होगी। इसका कोर क्षेत्रफल 800 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 20200 एकड़ होगा। इसकी सीमा के उत्तर में पानापुर (कांटी के नजदीक), दक्षिण में दुबियाही/तुर्की, पूरब में नया बायपास और पश्चिम में मड़वन शामिल होगा। कुदनी, मारवां, कांटी और मुसहरी के 68 गांव इसमें शामिल होंगे।
- सहरसा:कोसी टाउनशिप सहरसा शहर से तीन किमी दूर विकसित होगी। कोर क्षेत्रफल 1020 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 25200 एकड़ होगा। नगर निगम के वार्ड 39, 40 और सोलिनाबाद के अलावा सौर बाजार और कहरा प्रखंड के 34 गांव इसमें शामिल होंगे। प्रस्तावित टाउनशिप के उत्तर में सहरसा शहर, दक्षिण में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस वे, पूर्व में सिलेट और पश्चिम में रेललाइन होगी।
- मुंगेर:अंग टाउनशिप रेलवे स्टेशन से 12 किमी और सुल्तानगंज में प्रस्तावित एयरपोर्ट से 25 किमी की दूरी पर विकसित होगी। इसका कोर क्षेत्रफल 1016 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 6750 एकड़ होगा। इसकी सीमा के उत्तर में इटहरी, दक्षिण में लोहची, पूर्व में बरियारपुर और पश्चिम में जमालपुर सिटी से मिलेगी।
- सीतामढ़ी:सीतापुरम टाउनशिप रेलवे स्टेशन स्टेशन 2.5 किमी की दूरी पर होगी। इसका कोर क्षेत्रफल 532 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 10 हजार एकड़ होगा। सीमा के उत्तर में सीतामढ़ी-बैरगनिया लाइन, दक्षिण में नया बायपास, पूरब में लखनदेई नदी और पश्चिम में सनखान होगा। इसमें डुमरा, रीगा, परसौनी के 30 गांव शामिल होंगे।
- पूर्णिया:रेलवे स्टेशन से 9 किमी और एयरपोर्ट से एक किमी की दूरी पर पूर्णिया टाउनशिप बसेगा। इसका कोर क्षेत्रफल 1374 एकड़ और विशेष क्षेत्रफल 26 हजार एकड़ होगा। इसके उत्तर में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस वे, दक्षिण में गंगैली, पूरब में वाटर चैनल और पश्चिम में रहुआ शामिल है। कृत्यानंद नगर और पूर्णिया पूर्व के 49 गांव इसमें शामिल होंगे।







