बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरा करने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी अपनी सरकार का पहला विश्वास मत 24 अप्रैल को पेश करेंगे। विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर इस एक दिवसीय विशेष सत्र की तारीख तय कर दी। हालांकि, आंकड़ों के लिहाज से एनडीए सरकार पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस सत्र को लेकर काफी सरगर्मी है। इस फ्लोर टेस्ट के साथ ही राज्य में नई कैबिनेट के विस्तार का रास्ता भी साफ हो जाएगा। वर्तमान में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ही कामकाज संभाल रहे हैं, जबकि मंत्रिमंडल विस्तार मई के पहले हफ्ते में होने की उम्मीद है।
बिहार में विश्वास मत की तारीख तय
बिहार विधानसभा सचिवालय की नोटिस के मुताबिक शुक्रवार, 24 अप्रैल को सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही शुरू होगी। विधानसभा के निदेशक राजीव कुमार की ओर से जारी आह्वान पत्र में सभी विधायकों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। ये सत्र महज एक दिन का होगा, जिसका मुख्य एजेंडा सरकार द्वारा विश्वास मत हासिल करना है।
विश्वास मत तब लाया जाता है जब किसी सरकार को सदन में अपने बहुमत पर संदेह हो या नई सरकार बनने के बाद उसे अपनी ताकत साबित करनी हो. राज्यपाल के निर्देश पर मुख्यमंत्री को एक निश्चित समय सीमा के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है. इस प्रक्रिया के जरिए यह तय होता है कि सरकार के पास विधायकों का पर्याप्त समर्थन है या नहीं. अगर सरकार विश्वास मत हासिल नहीं कर पाती, तो उसे इस्तीफा देना पड़ सकता है.
15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने ली शपथ
गौरतलब है कि, सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. यह बदलाव उस समय हुआ जब लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख किया. इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुना गया और उन्होंने नई सरकार का गठन किया. उनके साथ जेडीयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री भी बनाए गए, विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव.
एनडीए के पास आंकड़ों का गणित
243 सदस्यों वाली विधानसभा में एनडीए की स्थिति बेहद मजबूत है। बहुमत के लिए आवश्यक 122 के जादुई आंकड़े के मुकाबले सत्ता पक्ष के पास भारी बढ़त है।
- भारतीय जनता पार्टी (BJP): 88 विधायक
- जनता दल यूनाइटेड (JDU): 85 विधायक
- लोजपा (रामविलास): 19 विधायक
- हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM): 05 विधायक
- राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM): 04 विधायक
- कुल एनडीए संख्या बल: 201 विधायक (बांकीपुर सीट खाली होने के बाद)
विपक्षी खेमे की चुनौतियां
दूसरी ओर, विपक्षी महागठबंधन के पास वर्तमान में केवल 35 विधायक बचे हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और आरजेडी के तीन विधायकों की अनुपस्थिति ने पहले ही महागठबंधन के भीतर असंतोष और संभावित टूट के संकेतों को जन्म दे दिया है। ऐसे में विपक्ष की ओर से किसी भी बड़े उलटफेर की संभावना बिल्कुल नहीं है।
पिछले विधानसभा सत्र की कार्यवाही
इससे पहले विधानसभा का नियमित सत्र बजट और सरकारी कामकाज पर केंद्रित रहा था, जिसमें विभिन्न विभागों के खर्च, योजनाओं और नीतियों पर चर्चा हुई थी. विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया था, जबकि सरकार ने अपनी उपलब्धियों का ब्योरा पेश किया था. अब विशेष सत्र में मुख्य फोकस केवल विश्वास मत पर रहेगा, जिससे नई सरकार की वैधता और स्थिरता तय होगी.







