294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए दो चरणों में मतदान होगा. 23 और 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव में राजनीतिक दलों के बीच तीखी टक्कर की संभावना है. इसी क्रम में पड़ोस के राज्यों के सीमावर्ती जिलों में भी हलचल तेज है और इसी आधार पर बिहार में भी सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी किए गए हैं. खास तौर पर पश्चिम बंगाल से लगे तीन जिलों में विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. इसी कड़ी में बंगाल चुनाव से पहले अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें पश्चिम बंगाल और बिहार समेत कई पड़ोसी राज्यों के मुख्य सचिव, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पुलिस महानिदेशक और उत्पाद विभाग के अधिकारी शामिल हुए. इस बैठक में केंद्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया. बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव के दौरान अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और सीमाओं पर सुरक्षा को पुख्ता करना रहा.
बिहार के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट
बैठक के बाद बिहार के तीन सीमावर्ती जिलों-किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में विशेष अलर्ट जारी किया गया है. ये जिले पश्चिम बंगाल से सटे होने के कारण संवेदनशील माने जाते हैं. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि चुनाव तक इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी बरती जाए और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाए.
वाहनों की सघन जांच और चौकसी बढ़ी
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बंगाल से आने-जाने वाले सभी वाहनों की सघन जांच की जाए. खासतौर पर रात के समय और संवेदनशील मार्गों पर चेकिंग और भी कड़ी करने को कहा गया है. सीमा पर अस्थायी चेकपोस्ट बनाकर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जा सके.
शराब, हथियार और मादक पदार्थों पर सख्ती
चुनाव के दौरान अवैध शराब, मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी बढ़ने की आशंका को देखते हुए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. उत्पाद विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं. अधिकारियों का मानना है कि इन अवैध गतिविधियों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, जिसे हर हाल में रोकना जरूरी है.
नेपाल सीमा पर भी कड़ी निगरानी
इसी क्रम में बिहार की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नेपाल सीमा पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है. सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि नेपाल से सटे इलाकों में भी गश्त तेज की जाए और संदिग्ध लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाए. इससे अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है.
अपराधियों की सूची साझा करने का फैसला
बैठक में यह भी तय किया गया कि फरार और वारंटी अपराधियों की सूची दोनों राज्यों के बीच साझा की जाएगी. इससे अपराधियों की आवाजाही पर रोक लगेगी और उन्हें जल्द पकड़ने में मदद मिलेगी. पुलिस अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है.
क्यों अलर्ट है बिहार के ये तीन जिले
किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया भौगोलिक रूप से पश्चिम बंगाल के करीब हैं और इन इलाकों में सीमाएं कई जगह खुली और व्यस्त हैं. ऐसे में चुनाव के दौरान यहां से अवैध गतिविधियों के जरिए वोटिंग को प्रभावित करने की आशंका रहती है. यही वजह है कि चुनाव बंगाल में होने के बावजूद इन जिलों में विशेष अलर्ट जारी किया गया है.
तीन जिलों में चौकसी के क्या संकेत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए बिहार समेत सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में बढ़ी चौकसी इस बात का संकेत है कि प्रशासन किसी भी तरह की गड़बड़ी को लेकर पूरी तरह सतर्क है.







